✅ 1. 1955 – राज्य पुनर्गठन आयोग (SRC) की रिपोर्ट
10 अक्टूबर 1955 को SRC ने अपनी अंतिम रिपोर्ट दी, जिसमें प्रस्ताव किया गया कि
मानभूम जिला का 19 पुलिस थाने वाला क्षेत्र (पुरुलिया जिला)—जिसमें
चांडिल
ईचागढ़
पटमदा
तीनों थाने शामिल थे, पश्चिम बंगाल के नए प्रस्तावित “पुरुलिया” जिले में दे दिया जाए।
📌 इस समय Chandil, Ichagarh और Patamda – तीनों WEST BENGAL में दिखाए गए थे।
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✅ 2. 1956 – मुख्यमंत्री बी. सी. रॉय का हस्तक्षेप और केंद्र और बिहार सरकार और टाटा स्टील के दबाव के कारण
SRC की सिफारिश के बाद भी अंतिम निर्णय सरकार करती थी।
1956 में पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री डॉ. विधान चंद्र राय ने बिहार सरकार से सहमति बनाकर
➡️ चांडिल, ईचागढ़ और पटमदा तीनों थाने वापस बिहार को दे दिए।
यही वजह है कि
बाकी 16 थाने पश्चिम बंगाल के पुरुलिया जिले में गए,
पर ये 3 थाने बिहार में ही रह गए (आज झारखंड में हैं)।
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✅ 3. 1956 के ये तीन थाने आज 6 प्रखंड बन चुके हैं
✔ Chandil subdivision (Seraikela–Kharsawan district)
SRC के समय का दो थाने → आज चार प्रखंड
1. Chandil
2. Nimdih
3. Ichagarh
4. Kukru
सभी सरायकेला–खरसावां जिले में।
✔ East Singhbhum district
SRC के समय का एक थाना (Patamda) → आज दो प्रखंड
5. Patamda
6. Boram
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✓ इन 6 वर्तमान प्रखंडों (Chandil, Ichagarh, Nimdih, Kukru, Patamda, Boram) का क्षेत्र
1955 की SRC रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के प्रस्तावित पुरुलिया (पलिया) जिले को दिया गया था।
✓ लेकिन 1956 में CM बी. C. Roy के निर्णय से
ये तीन थाने (Chandil, Ichagarh, Patamda) वापस बिहार (अब झारखंड) आए।
इसलिए आज ये क्षेत्र झारखंड में हैं, न कि पश्चिम बंगाल में।
मानचित्र : सरायकेला खरसावां जिला और पूर्वी सिंहभूम जिला