आज गाँव में एक लड़के से मिला। वह CBSE का छात्र था। 10वीं में उसके लगभग 80% अंक आए थे। उसके बाद वह JEE की तैयारी करने कोटा चला गया। एक औसत छात्र था, लेकिन परिवार ने सपनों के लिए बड़ा दांव लगाया।
Allen की 2024 में 1 साल की फीस लगभग ₹1.44 लाख थी।
2 साल की फीस = ₹2.88 लाख
कोटा में रहने-खाने और अन्य खर्च का औसत ₹15,000 प्रति माह मान लें।
24 महीने का खर्च = ₹3.60 लाख
कुल खर्च: 💰 कोचिंग फीस = ₹2.88 लाख 💰 रहने-खाने का खर्च = ₹3.60 लाख
➡️ कुल = ₹6.48 लाख
अब अगर JEE में अच्छी रैंक नहीं आई, तो आगे किसी न किसी कॉलेज में डोनेशन या मैनेजमेंट कोटा से एडमिशन लेने का दबाव भी रहेगा, जहाँ लाखों रुपये और खर्च हो सकते हैं।
यही आज की शिक्षा व्यवस्था की सबसे बड़ी विडंबना है। प्रतिभा और मेहनत अपनी जगह है, लेकिन पैसा भी उतना ही बड़ा कारक बन चुका है।
गरीब और मध्यमवर्गीय परिवारों के कई होनहार छात्र सिर्फ इसलिए पीछे रह जाते हैं क्योंकि वे महंगी कोचिंग, बड़े शहरों का खर्च और अतिरिक्त संसाधन नहीं जुटा पाते।