ना चादर बड़ी कीजिये,ना ख्वाहिशे
दफ़न कीजिये,चार दिन की
जिंदगी है सब चैन से बसर कीजिये
ना परेशान किसी को कीजिये ,ना हैरान
किसी को कीजिये कोई लाख गलत
भी बोले बस मुस्कुरा का छोड़ दीजिये
न रूठा किसी को कीजिये,न झूठा
किसी को कीजिये,कुछ फुर्सत के
पल निकालिये ,कभी खुद से भी मिला
कीजिये