यह सिर्फ एक हत्या नहीं, पूरा सिस्टम कटघरे में खड़ा है।
मेरठ में दलित महिला की हत्या, बेटी का अपहरण, आरोपी खुलेआम फरार और परिवार तबाह—
और सवाल ये कि दबंगों का इतना हौसला आया कहां से?
अगर पुलिस पहले सक्रिय होती,
अगर ऐसे लोगों पर पहले ही कार्रवाई होती,
तो आज लाश सड़क पर और बेटी लापता नहीं होती।
शव उठाने से लोगों का इनकार बताता है कि
👉 भरोसा खत्म हो चुका है
👉 न्याय की उम्मीद टूट रही है
अब सिर्फ FIR, पोस्टमॉर्टम और बयान नहीं चाहिए—
तुरंत गिरफ्तारी, अपहृत बेटी की सकुशल बरामदगी और फास्ट ट्रैक कार्रवाई चाहिए।
मेरठ पुलिस प्रशासन को समझना होगा—
ये मामला दबा तो गुस्सा और फटेगा।
कानून का इकबाल कायम करना है तो अब एक्शन दिखाना होगा।