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कहानी - पुरानी संदूक की आख़िरी चाबी... “कहानी में प्रयुक्त सभी नाम, क़िरदार और घटनाएँ लेखक की कल्पना पर आधारित हैं। यदि किसी वास्तविक व्यक्ति या घटना से समानता हो, तो उसे केवल संयोग समझा जाए।” गाँव के एक पुराने घर में, लकड़ी की एक बड़ी संदूक रखी थी। वह इतनी पुरानी थी कि, उस पर समय के निशान साफ़ दिखाई देते थे। घर के बच्चों को हमेशा, उस संदूक के बारे में जिज्ञासा रहती थी। मग़र किसी ने उसे कभी खुलते नहीं देखा, क्योंकि उसकी चाबी वर्षों पहले खो गई थी। दादी अक्सर कहती थीं, "उसमें कोई ख़ज़ाना नहीं है। लेकिन उनकी मुस्कान देखकर, किसी को उनकी बात पर पूरा यक़ीन नहीं होता था। समय बीतता गया। घर बदला, लोग बदले, मग़र वह संदूक, उसी कोने में चुपचाप रखी रही। एक दिन पुराने सामान की सफ़ाई करते हुए, अलमारी के पीछे एक छोटी सी चाबी मिली। उस पर जंग लगी थी, मग़र उसका आकार कुछ अलग था। सबको लगा, शायद यही उस संदूक की चाबी है। पूरे परिवार के लोग इकट्ठा हो गए, और कई सालों बाद ताला खोलने की कोशिश हुई। थोड़ी मेहनत के बाद, ताला खुल गया। संदूक का ढक्कन धीरे-धीरे उठा, और सबकी निगाहें उसके भीतर चली गईं। मग़र अंदर सोना-चाँदी नहीं था। वहाँ पुरानी तस्वीरें थीं, कुछ चिट्ठियाँ थीं, और पीले पड़ चुके कई कागज़ थे। एक-एक चीज़ बाहर निकाली गई। तस्वीरों में दादा-दादी की जवानी थी, पुराने त्योहार थे, और वे लोग थे जो अब इस दुनिया में नहीं थे। एक चिट्ठी दादा जी की थी, जो उन्होंने शादी के बाद दादी को लिखी थी। एक कागज़ पर पूरे परिवार के सपने लिखे थे, जो वर्षों पहले देखे गए थे। घर में कुछ देर के लिए, अजीब सी ख़ामोशी छा गई। सब लोग उन चीज़ों को देख रहे थे, जिन्हें समय लगभग भुला चुका था। तब दादी ने धीरे से कहा, "मैं जानती थी कि चाबी एक दिन मिल जाएगी।" किसी ने पूछा, "आपने इसे ढूँढा क्यों नहीं?" दादी मुस्कुराईं और बोलीं, "क्योंकि कुछ संदूक सामान नहीं, यादें सँभालकर रखती हैं। और यादों की क़ीमत तब समझ आती है, जब उन्हें देखने वाले बड़े हो जाते हैं।" उस दिन सबने जाना, कि असली ख़ज़ाना सोना नहीं होता। कभी-कभी कुछ पुरानी तस्वीरें, कुछ अधूरी चिट्ठियाँ, और अपनों की यादें ही सबसे बड़ी दौलत होती हैं। उसके बाद वह संदूक फिर बंद हुई, मग़र इस बार उसके ताले में चाबी लगी रही। क्योंकि अब घर के लोग समझ चुके थे, कि कुछ दरवाज़े ख़ज़ाने नहीं, अपनी जड़ों तक पहुँचने के लिए खोले जाते हैं। 🗝️📦✨ #अशोक_मसरूफ़ Pic credit---Pinterest
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प्रभात का संदेश-- प्रभात की प्रथम किरण जब धरा का स्पर्श करती है, तब ऐसा लगता है मानो ईश्वर ने एक और अवसर मनुष्य को सौंप दिया हो। किन्तु हम प्रायः असंतोष और अहंकार में इतने व्यस्त रहते हैं, कि उस अनमोल अनुकम्पा को पहचान ही नहीं पाते। प्रकृति प्रतिदिन सिखाती है.. नव आरम्भ का सौभाग्य सबको मिलता है, पर उसका सदुपयोग विवेकवान ही कर पाते हैं।॥ #अशोक_मसरूफ़ PIC credit---Pinterest
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तिरी यादों के ग़म में ही मैं यूँ डूबा हूँ मुद्दत से, न रात अपनी, न दिन अपना, न कोई हमसफ़र अपना। #अशोक_मसरूफ़ PIC credit---Pinterest
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ग़ज़ल - कि ग़ज़ब दौर का ये भी अजीब मंजर है, यहां इंसान ही खुद ख़ुद से बे ख़बर सा है। किसी की आँख में ठहरा हुआ-सा इक सपना, किसी के दिल में सफ़र बूढ़े सा ही जर्जर है। वो ही एक नाम जो लब पर कभी नहीं आया, उसी का ज़िक्र मिरी सोच में मग़र क्यूँ है। मैं कभी ग़म की नुमाइश में तो यक़ीं न करूँ, मेरी ख़ामोशी में भी इक बड़ा असर सा है। हार कर भी जो मुसलसल खड़ा हुआ अब तक, उसी के हाथ में जीने का इक हुनर भी है। जाने कितने ही तो रिश्ते धुएँ में खो गए हैं, बस वफ़ा का ही चरागाँ तो आज भी घर है। मुझसे वो दूर सही, फ़िर भी दूर कब होगा, मेरी हर ही दुआ में अब भी ज़िक्र उसका है। किसी के जाने से दुनिया नहीं बदलती है, आज क्यूँ उस के बिना दिल उदास सा है। 🌹 चरागाँ -- दीपोत्सव #अशोक_मसरूफ़ PIC credit---Pinterest
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जब तक अमेरिका के पास नरेंद्र मोदी की अश्लील सीडी है तब तक अमेरिका भारत को ब्लैकमेल करता रहेगा : ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़
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15/06/2026 दर्शन श्री बाबा पतालेश्वर महादेवन मंदिर हर हर महादेव... जय जय मां
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परेशां है , जिंदगी हमसे ! जिंदगी से , परेशां हैं हम ! न वो , छोड़ रही हमको ! न उसे , छोड़ सकते हैं हम !! #परेशां_जिंदगी ❤️✍️ #GoodMorning 💖💫 @realvbha2 💃
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राम राम जी सुप्रभात मित्रों 🙏🙏🌷💚🌷
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GOOD MORNING जीवन का आनंद ज़मीन पर बैठकर खाने पंछियों के चहचहाने पौधों के लहलहाने और बच्चों के मचलने में प्राप्त होने लगे तो समझ लीजिए आप, भौतिक सुखों से पड़े जीवन के सुख-शांति की परम् प्राकृतिक अवस्था में है आदित्य.ए. के
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शुभ सोमवार
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सुनो मोहतरमा! चराग लेकर ढूढो या मोमबत्ती, अगर कोई मुझ सा मिले तो उसे वहीं जला देना।
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ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥ 🙏🔱
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The girl was completely confident that being heavier would give her the advantage But Physics had other plans The boy put in just a little effort, and the very next second She was launched into the air and landed right on top of him.
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वो बोलते हैं बहुत, हमारे लब बेजुबानी हैं, ज़्यादा क्या बतलाएं हम, हमारी इतनी सी प्रेम कहानी है! 🥀🥀🥀🥀🥀
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मेरे खिलाफ होकर भी मुझसे दोस्ती का चाहत रखने का सबब क्या है क्या मैं समझू अनकहे जज्बात दबे पांव आहिस्ता मुझे घेरने का इरादा तो नहीं .!! बदले बदले मौजूं में बदले बदले स्वभाव में इतना रद्दोबदल का सबब क्या है क्या में समझूं इस मौसम में कोई अनहोनी कहानी तो नहीं .!! #उन्मुक्त_मन
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जीवन की तमाम दुख और तकलीफ साथ बैठकर ठहाके लगाकर कट जातें हैं बस कोई एक साथ देने वाला होना चाहिये जय श्री कृष्णा
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Vo jo Chaddha nahi thin, aur isliye chaddhi nahi ban pa rahi thi.... Waqt aur ambition ne aisi karwat li k Vo ab Thong ban gayi hain. @sayani06
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Replying to @___Naazla__
हालात का शिकार हूँ जो जी में आये बोल मैं तेरा गुनेहगार हूँ जो जी में आये बोल दुनियाँ में जिसे चाहा वो मिल ना सका मुझे मैं तेरा तालाबग़ार हूँ जो जी में आये बोल मुलाक़ात ना हुई तो रंजो गम बढ़ गये दोस्त इसी लिये बेज़ार हूँ जो जी में आये बोल निसार फतेहपुरी
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सम्मान किसी व्यक्ति की उपस्थिति का नहीं उसके अस्तित्व का होता है ये तब भी बना रहता है जब मतभेद हो या परिस्थितियां अनुकूल न हो सम्मान वहां जन्म लेता है जहां अहंकार नहीं होता प्रेम भी बिना सम्मान के अधूरा है क्योंकि सम्मान से प्रेम हृदय में जीवत रहता है दिमाग में नहीं। सुप्रभात 🙏
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सब जानते समझते हैं मिट्टी का तन है फिर भी मन अहंकार से लबालब भरा है । गौरांग साहू
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