जैन दर्शन के तेजस शरीर के अस्तित्व को अब विज्ञान ने स्वीकार किया है। प्राणी के शरीर में जो जैव विद्युत शक्ति है, वही जैन दर्शन में तेजस शरीर कहलाता है। औदारिक शरीर केवल ढांचा है, इसका अनुभव तब स्पष्ट होता है, जब जीव मृत्यु को प्राप्त होता है। मृत शरीर में सब कुछ होता है, मात्र...