कुछ लोगों की गलतियों के आधार पर पूरे शिक्षक समाज को “धंधेबाज” या “दो कौड़ी का” कहना न सिर्फ अनुचित है, बल्कि उन लाखों शिक्षकों का अपमान भी है जो वर्षों से छात्रों का भविष्य गढ़ रहे हैं।
शिक्षक फीस लेकर ज्ञान देता है, मेहनत करवाता है और युवाओं को रोजगार तक पहुँचाता है। सवाल यह है कि समाज के साथ बड़ा विश्वासघात किसने किया—शिक्षा देकर भविष्य बनाने वालों ने, या सच को तोड़-मरोड़कर पेश करने वालों ने?
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मासूम बच्चे और उनके माता-पिता की गाढ़ी मेहनत की कमाई का पैसा लूटने वाले कुछ कोचिंग सेंटर के सेलिब्रिटी टीचर्स आज भाड़े के वीडियो बना बनाकर ज्ञान दे रहे हैं। सार्वजनिक रूप से महिलाओं को गाली देने वाले, उनकी नक़ल उतारने वाले ये छिछले यूट्यूबर बच्चों की कड़ी मेहनत पर अपनी दुकान सजाते हैं। असल हीरो बच्चे हैं, ये माँ बाप की मेहनत की कमाई के लुटेरे कितना भी कूदें, देशभर के बच्चों को live जोड़कर हमने पेपर लीक के पिड़ित बच्चों को आवाज़ दी तो इनके स्टारडम को बड़ा धक्का लगा है! शिक्षा को धंधा बनाने वालों को दर्द हो तो अच्छा है।वैसे कोचिंग माफिया के खिलाफ मेरा विडियो वायरल करने के लिए धन्यवाद! मेरे शो पर सभी panelist ने बोला कि कोचिंग माफिया पर नकेल कसी जाए।