Writer, Litrature Lover, Singer

Joined October 2015
497 Photos and videos
Pinned Tweet
5 Nov 2025
#ये चाय की आदत! कमाल है! ये चाय की आदत, मुझ पर, भारी है!. प्रधानमंत्री बनने की, अब तैयारी है! शुभ प्रभात।।
78
29
257
24,232
मृत्तिका का दीप तब तक जलेगा अनिमेष एक भी कण स्नेह का जब तक रहेगा शेष। हाय जी भर देख लेने दो मुझे मत आँख मीचो और उकसाते रहो बाती न अपने हाथ खींचो प्रात जीवन का दिखा दो फिर मुझे चाहे बुझा दो यों अंधेरे में न छीनो- हाय जीवन-ज्योति के कुछ क्षीण कण अवशेष । शुभ प्रभात
1
6
शहर उजडा तो, बस जाएगा, लेकिन, हमारा घर, न फिर आबाद होगा! जीतेगा, तु, ये मालूम है, यारा, हमारी तरह, न तु नाबाद होगा!!
1
6
बंगाल के घटना क्रम ने एक बात साबित किया, की, हर नेता बिकाऊ है!! भाग कर पहुँच जाते, है सब के सब, जहाँ, दिखता, प्याऊ है!! इन सब से बेहतर तो, यार, बड़ा, भाऊ है!!!! वाह।।
1
8
Elon Musk साब से बस, इतना निवेदन है! हमारी भी पे आउट आने लगे, प्रति वेदन है! नही है, कोई रंज ओ गम, आपकी दौलत से, जनाब, हमारी दौलत, हर प्राणी से संवेदन है!!
1
10
जाना था हम से दूर, बहाने बना दिये, ये किस जहाँ मे, तुम ने ठिकाने बना लिए!!
1
22
कल्पना की उड़ान, उम्मीद का दामन नही, छोड़ा!. इंसान हूँ, गलतियाँ की है!! मगर किसी का, विस्वास नही तोड़ा।।।
1
15
नदियों का, हाथ में शस्त्र लिये शत्रु का, नख और सींग वाले जन्तुओं का तथा राजकुल का विश्वास कभी नहीं करना चाहिये। ।।नीति विशेष।।
1
12
आज ये चित्र देख कर लगा, की जले पर नमक है, भाई, राजनीति मे अभी इनकी, पुरजोर, धमक है!!
1
17
सत्ता च्युत होने के बाद दीदी बिफर गयी है, होश वो हवास खो बैठी है! खैर, अनपेक्षित परिणाम से ऐसा होना स्वभाविक है, लेकिन, राजीनीति मे ये आचरण घोर अवसान कारक है। दीदी कुछ भी कर के, भाजपा को जवाब देना चाहती है, कोई भी कीमत अदा करने को तैयार ह, बस यही जुनून उनका सर्वस्य विनाश का कारण बनेगा।।।
1
15
कदम जो बढ़ाया है, साथ तो, पीछे मत, हटना! हर रास्ता, मुझ तक आयेगा, संभल कर, कहीं और तकना! स्वयंबर से उठा लेंगे, तुम्हे, हमे, ऐसा वैसा मत, समझना! ।।विद्रोही प्रेम।।।
1
12
अब लगता है, हो जाएगा, इन दोनों का मेल, देखें, किसको मिलती, सफलता, अब तक दोनों, फेल!!!
1
22
जो हालात दीदी के है, उसमे उन्ही का दोष है, बद हवास होने का कारण, पार्टी का असंतोष है! कुछ भी कर जाएंगे ये, अब, मन मे बड़ा ही, रोष है!
1
14
हरेक बात पे जो कहते हो, की सत्ता ज़िम्मेदार है, यही वो बात है, जो जनता को नागवार है!! कोई तो काम की बात करो, जिस से आम आदमी का सरोकार हो, वरना क्या फर्क, आपकी या उनकी सरकार हो!!! ।।मृदुल मनीष।।
2
25
क्या, सच मे, सुश्री मायावती जी, के है, ये शब्द! सुन के जाने कितने ही जन, हुए, आज निःशब्द!!
1
32
@ranaashutosh10 राणा साब, आपके अद्भुत भाषा ज्ञान का मप्रशंसक हूँ, अपनी एक कविता का अंश आपको समर्पित कर रहा। अच्छी या बुरी, अपने मनोभाव से अवगत कराये, तुच्छ विप्र कवि को प्रेरणा मिलेगी। "कहीं तो कोई बात हुई है बेमौसम बरसात हुई है। दिल ही दिल रो रहा है कोई पृत में कोई घात हुई है। बिछड़ा है कोई मीत से अपने नयनों से बरसात हुई है। कहीं तो कोई बात हुई है। सुबह से नहीं गया निवाला किसी गरीब के उदर में ज्वाला, भिक्षा मांग रहा है सड़क पर, भूख से शर्म की हार हुई है"! ।।मृदुल मनीष।।
2
2
55
कहीं तो कोई बात हुई है, बे मौसम बरसात हुई है!
1
31
महंगाई से परेशान जनता के लिए हमारी सरकार बड़ी चिंतित है, नेता भिन्न प्रकार से साथ होने का दावा पेश कर रहे, आये दिन! बड़े भले और सरल हृदय के लोग है, ये! मेरे पास एक फॉर्मूला है, जनता को इस घोर महंगाई के मकड जाल से मुक्त कराने का। देश मे अभी 543 सांसद है, और इनके फंड का आधा भी, अगर ये स्वेच्छा से दान कर दे तो उस से प्राप्त राशि होगी: 1000cr. अगर इस राशि को 140cr लोगों मे वितरित कर दी जाए, तो प्रति व्यक्ति सात करोड़ की रकम प्राप्त करेगा, फिर मुश्किल से मुश्किल हालात भी मजे से गुजर जाएगी!! आप सब का क्या ख्याल।।।
2
40
कल एक कवि संगोष्ठी मे गया था! जाने माने लोगों के बीच एक विधुर प्रौढ़ सज्जन पे नज़रे थम गयी! कई कलाओं मे महारत हासिल थी, उन्हें! कमाल की बाँसुरी बजाते थे, भाला फेंक के चैंपियन रह चुके थे! कई किताबे लिखी, और धर्म और दर्शन मे भी गहरी रुचि थी!. एक वाक्य मे उनकी सारी संवेदना छिपी थी। "जब भी घर की अलमारी खोलता हूँ, उसमे रखी सलीके से उसकी साड़ियां याद दिलाती है! आज भी रात के पिछले पहर, वो इस घर मे आती है" एकाकी जीवन की व्यथा का बोझ शब्दो मे बयां नही की जा सकती।।
2
36
सुबह बताएगी, हुज़ूर, रात क्या गुल खिलाये है, आज मुद्दतों बाद, हमारी बात पर, वो मुकुराएँ है!! वो भी, ज़ुल्म ए जिंदगी के, जरूर सताये है, तभी फुरसत ए सुकूँ मे, मेरे करीब आये है!! दूर थे, तो बड़े बेचैन और बेताब थे, हम, आज करीब आये, तो लगता है, जान जाए है!! । मृदुल मनीष।।
1
3
66
निगाह ए यार ने दिये है, ज़ख़्म इतने, जितने, सारी उम्र, किसी दुश्मन ने ना लगाएं है!!
1
2
48
जिस चाँद की थी आरजू, बे इंतेहा हमें, वो चाँद बे तकल्लुफ् हो, मेरे दिल मे, उतर आयें है!
2
38