सुबह बताएगी, हुज़ूर, रात क्या गुल खिलाये है,
आज मुद्दतों बाद, हमारी बात पर, वो मुकुराएँ है!!
वो भी, ज़ुल्म ए जिंदगी के, जरूर सताये है,
तभी फुरसत ए सुकूँ मे, मेरे करीब आये है!!
दूर थे, तो बड़े बेचैन और बेताब थे, हम,
आज करीब आये, तो लगता है, जान जाए है!!
। मृदुल मनीष।।