बम घरों पर गिरें कि सरहद पर रूह-ए-तामीर ज़ख़्म खाती है
टैंक आगे बढ़ें कि पिछे हटें,कोख धरती की बाँझ होती है
जंग तो ख़ुद ही एक मसअला है,जंग क्या मसअलों का हल देगी
इसलिए ऐ शरीफ़ इंसानो,जंग टलती रहे तो बेहतर है
आप और हम सभी के आँगन में,शम्अ' जलती रहे तो बेहतर है
- साहिर लुधियानवी