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लखनऊ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. रीता चौधरी ने अपने वक्तव्य में अर्जक संघ की संस्कृति और महिलाओं के अधिकारों की व्याख्या की, जिसमें महिलाओं को समता, और स्वतंत्रता के अधिकार पर बल दिया गया है। पढ़ें, यह खबर forwardpress.in/2026/06/news…
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REPOST #DeathAnniversary अपने सरोकारी लेखन और पक्षधरता के कारण दलित-बहुजन सोच और समाज के अभिन्न हिस्सा रहे विचारक, नाटककार, आलोचक मुद्राराक्षस को स्मरण कर रहे हैं कंवल भारती forwardpress.in/2016/07/bahu…
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यहां वह प्रकृति से संवाद कर रही हैं और कह रही हैं कि उन्हें बस प्रकृति के साथ जाना है, उसकी दिशा में जाना है। न बाएं देखना है और न दाएं। वही रास्ता अपनाना है जो प्रकृति का है और एक दिन विलीन हो जाना है। पढ़ें, यह समीक्षा forwardpress.in/2026/06/book…
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Every decade produces brilliant Dalitbahujan voices who critique power with precision and then watch power ignore them, not because the critique was wrong, but because critique without organization is a letter that was never sent, writes Adeeb Haider forwardpress.in/2026/06/when…
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जिस भाजपा को खुद यकीन नहीं कि वह चार विधायकों को जुटा सकेगी, उसने नाथवानी नामक रेस के घोड़े पर दांव लगा दिया है, क्योंकि उसे यकीन है कि नाथवानी कुछ विधायकों की ‘अंतरआत्मा की आवाज’ को जगा कर समर्थन जुटा लेंगे। पढ़ें, विनोद कुमार का यह विश्लेषण forwardpress.in/2026/06/news…
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सम्राट चौधरी के रहते अब भाजपा को दूसरे कोईरी नेता की जरूरत नहीं रही। हालांकि उपेंद्र कुशवाहा के बेटे को सम्राट चौधरी के मंत्रिपरिषद में जगह मिल गई, लेकिन बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा ने उन्हे उम्मीदवार नहीं बनाया। बता रहे हैं किरणेश forwardpress.in/2026/06/news…
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REPOST #DeathAnniversary केवल 25 वर्ष के बिरसा मुंडा की हत्या अंग्रेजों ने धीमा जहर देकर कर दी थी। इसके पहले ही वे आदिवासियों में राजनीतिक, सामाजिक और आर्थिक मोर्चे पर आंदोलन का आगाज कर चुके थे। यही वजह रही कि उन्हें धरती आबा कहा जाने लगा था forwardpress.in/2018/11/mhan…
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फिल्म की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि वह जगदेव प्रसाद के जीवन को किसी चमत्कारी नायक की कथा में बदलने के बजाय उनके सामाजिक और वैचारिक निर्माण की प्रक्रिया को समझने का प्रयास करती है। बता रहे हैं अरुण नारायण forwardpress.in/2026/06/news…
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इस संग्रह की तीसरी और अंतिम श्रेणी की कहानियां सामाजिक संघर्षों पर आकर ठहरती हैं। जो लेखक के लेखन का उत्स है। सुरेंद्र स्निग्ध की रचनाओं में सामंतवादी प्रवृतियों से संघर्ष करते कई किरदार नजर आते हैं। बता रहे हैं श्रीधर करुणानिधि forwardpress.in/2026/06/book…
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कोई भी आंदोलन हो, कोई भी पार्टी हो, कोई भी लीडर हो यह देखा जाना चाहिए कि इस पार्टी के मज़बूत होने से क्या वंचितों को न्याय मिलेगा? क्या वंचितों के लिए आरक्षण का पूर्ण रूप से अनुपालन किया जाएगा और उसे सम्मानपूर्वक देखा जाएगा? क्या जातिवाद का ख़ात्मा होगा? forwardpress.in/2026/06/news…
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REPOST #BirthAnniversary बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में पेरियार के उग्र जाति-विरोधी विचारों ने तमिलभाषी इलाकों में जबरदस्त राजनीतिक उबाल पैदा कर दिया था। एम. करुणानिधि जीवनपर्यंत इन विचारों के प्रतिबद्ध रहे। बता रहे हैं रामनरेश यादव forwardpress.in/2020/08/bahu…
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संतराम बी.ए. सम्मान-2024 से सम्मानित डॉ. रमाकांत ठाकुर ने क्षोभ व्यक्त किया कि आज जब हम संतराम बी.ए. की स्मृतियों को याद कर रहे हैं तो सभी दलित व पिछड़ी जातियाें के लोग अपनी जातियों की हद में जाकर सीमित हो गए हैं। इससे ब्राह्मणवाद दिन-ब-दिन मजबूत हो रहा है forwardpress.in/2026/06/news…
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दयानंद के जुलूस की तैयारी कर रहे रानाडे जैसे सुधारवादी नेताओं ने जुलूस से एक दिन पहले ही, जोतीराव से मदद मांगी थी। यह मानते हुए कि दयानंद का आध्यात्मिक दृष्टिकोण चाहे जो भी हो, अंततः वे भी समाज सुधार चाहते हैं, जोतीराव तुरंत उनकी मदद को तैयार हो गये थे forwardpress.in/2026/06/phul…
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आरएसएस समर्थित संगठन ‘जनजाति सुरक्षा’ मंच द्वारा पृष्ठभूमि में भारत माता की फोटो के साथ ‘भगवान’ बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती पर जो ‘जनजाति सांस्कृतिक समागम’ किया गया और उसमें जो प्रस्ताव पास किए उन्हें आदिवासी पहचान पर हमले के बतौर लिया जाना चाहिए forwardpress.in/2026/06/news…
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This contradiction lies beneath the language of ‘mainstreaming’. State institutions encourage young people to become disciplined and future-oriented, even while the opportunities available to them remain narrow and precarious, writes Sahib Singh Tulsi forwardpress.in/2026/06/bast…
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