Jawaharlal Nehru की मौत ऐसी थी
कि दिल्ली की हवा तक उदास हो गई थी।
विरोधी भी चुप थे,
समर्थकों की आँखें भीगी थीं,
और मुल्क को पहली बार लगा था
कि कोई शख़्स नहीं,
एक पूरा ख़्वाब चला गया।
Jawaharlal Nehru की मौत ऐसी थी
कि दिल्ली की हवा तक उदास हो गई थी।
विरोधी भी चुप थे,
समर्थकों की आँखें भीगी थीं,
और मुल्क को पहली बार लगा था
कि कोई शख़्स नहीं,
एक पूरा ख़्वाब चला गया।
रुख़्सती ऐसी
कि संसद की दीवारें नम थीं,
सड़कों पर सन्नाटा था,
और जिनसे उम्र भर मतभेद रहे,
उन्होंने भी सिर झुकाकर कहा—
“आज हिंदुस्तान थोड़ा अनाथ हो गया।”
1962 के युद्ध के समय देशभर में “नेशनल डिफेंस फंड” के लिए दान अभियान चला था। उस दौर में कई लोगों ने अपने गहने दान किए थे, और इंदिरा गांधी द्वारा अपने आभूषण दान करने का उल्लेख भी कई स्रोतों में मिलता है।
"मैं RSS का कट्टर विरोधी हूं, क्योंकि इसके खिलाफ खड़े होने वालों में सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे देशभक्त शामिल थे।"
-थलापति विजय (TVK प्रमुख)