तो सुबह नींद में से उठो। प्रार्थना करो कि हमें झूठ, कपट, बेईमानी, भोग, संग्रह, शरीर और संसार की आसक्ति मिटाने की सत्बुद्धि दे, महाराज। इतना आप कर सकते हैं, इसमें कोई जोर नहीं आएगा। तेरे तरफ प्रीति दे दे, क्योंकि हम जीवात्मा चैतन्य परमात्मा के हैं। शरीर जड़ है, परिवर्तनशील है और हमारा नहीं है, महाराज, यह हम अब समझे हैं। शरीर मैं नहीं हूँ, शरीर मेरा नहीं है। अगर मेरा होता तो महाराज, मेरे कहने में चलता। अब खोपड़े में बात समझ आ गई। शरीर मेरा होता तो मेरे कहने में चलता। मैं चाहूंगा क्या बाल सफेद हो जाए, झुर्रियाँ पड़ जाए, बीमार हो जाए या मर जाए। कोई नहीं चाहता, तो शरीर हमारे कहने में नहीं चलता और शरीर हम नहीं हैं। फिर भी महाराज, आपकी माया आप ही हरिए हरि और आपकी कृपा आप ही भरिए, महाराज। हम अब आपके सन्मुख होना चाहते हैं। हमारी ताकत नहीं है, तुम्हारी कृपा और दया चाहते हैं।
#AsharamjiBapu