शुभ संध्या ❤️ राधे राधे 🙏
रिश्ते बचाने के लिए अक्सर हम अल्फाज बदल देते हैं
सच लिखना चाहते हैं मगर फिर कलम बदल देते हैं
अजीब कशमकश है जिंदगी की इस राह में अपनों को खुश रखूं तो मेरा खुद का आत्मसम्मान रूठ जाता है
अब बने है पत्थर के तो हैरत कैसी है
जब थे मोम के तो जलाए बहुत गए थे