DYFI

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कम्युनिस्ट पार्टी (कम्युनिस्ट आंदोलन) का ऐतिहासिक संदर्भ, गठन व मूल सिद्धांत 1920 में रूसी अक्टूबर क्रांति (1917) से प्रेरित होकर इस आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवाद से मुक्त कराना था।
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भगत सिंह, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ केन्या (मार्क्सवादी) के एक अहम प्रतीक हैं। ये वही भगत सिंह थे जिन्होंने सोवियत क्रांतिकारियों से प्रेरणा ली थी—इतनी ज़्यादा कि उन्होंने HRA नाम में 'S' (यानी 'सोशलिस्ट') जोड़ दिया था।
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जिस दिन उन्हें फाँसी दी गई, उस दिन वे सावरकर की नहीं, बल्कि व्लादिमीर इलिच लेनिन की किताब पढ़ रहे थे। क्यूबा के भगत सिंह, चे ग्वेरा हैं। भारत के चे ग्वेरा, भगत सिंह हैं। पूरी दुनिया क्रांतिकारियों की ज़मीन है।
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कम्युनिस्ट पार्टी (कम्युनिस्ट आंदोलन) का ऐतिहासिक संदर्भ, गठन व मूल सिद्धांत 1920 में रूसी अक्टूबर क्रांति (1917) से प्रेरित होकर इस आंदोलन की शुरुआत हुई, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत को ब्रिटिश साम्राज्यवाद से मुक्त कराना था।
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कम्युनिस्ट आंदोलन ने केवल राजनीतिक संघर्ष नहीं किया, बल्कि मजदूरों, किसानों, छात्रों और युवाओं को संगठित कर एक व्यापक जन आंदोलन खड़ा किया। AITUC, AIKS और AISF जैसे संगठनों ने मेहनतकश जनता को उनके अधिकारों के लिए संघर्ष करने की ताकत दी।
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साथ ही प्रगतिशील लेखक संघ (PWA), इप्टा (IPTA) ने साहित्य, कला, संस्कृति को जनता के संघर्षों से जोड़कर प्रगतिशील, जनवादी चेतना का विकास किया खेतों से लेकर कारखानों, शिक्षण संस्थानों और सांस्कृतिक मंचों तक, कम्युनिस्ट आंदोलन ने भारत में सामाजिक बदलाव और जनजागरण की मजबूत नींव रखी
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आज के पूंजीवादी दौर में, जब हर चीज़ को पैसे और मुनाफ़े की कसौटी पर तौला जाता है, इंसान लगातार आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक दबावों के बीच जीने को मजबूर है। बेरोज़गारी, महंगाई, असुरक्षा, सामाजिक भेदभाव और राजनीतिक ध्रुवीकरण लोगों को भीतर से तोड़ते हैं।
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मजदूर, किसान, छात्र, युवा और महिलाएं जब संगठित होकर अपने अधिकारों के लिए आवाज़ उठाते हैं, धरना-प्रदर्शन और जनआंदोलनों के माध्यम से अन्याय का विरोध करते हैं, तभी परिवर्तन की संभावनाएं जन्म लेती हैं।
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संघर्ष ही निराशा का जवाब है और एकजुटता ही सबसे बड़ी शक्ति। सामूहिक संघर्ष इंसान को अकेला नहीं रहने देता, उसे उम्मीद और हौसला देता है, और समाज को बदलने की वास्तविक ताकत पैदा करता है। इसलिए हार मानने के बजाय संगठित होकर लड़ना ही बेहतर भविष्य का रास्ता है।
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आज के पूंजीवादी दौर में जहां पैसे से ही काम बनता है, वहां राजनेतिक, सामाजिक स्तर पर बदलती परिस्थितियों व उससे बनती व्यवस्था हमेशा इंसान को खुद में व आपस मे उलझा कर रखती है। खुद की जान लेना आसान फैसला नही होता, पर ठोस समाधान के लिए एकजुट हो व्यवस्था से भिड़ना ही पड़ता है। #SMS
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Manish ☭ retweeted
This needs to stop. Greedy Uncle Sam keeps costing innocent lives every day. These were people doing their jobs on a merchant vessel, far away from political decision-making. That pedophile doesn’t care about civilian lives or peace. #IranWar‌
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राजस्थान : सीकर में DYFI के राज्यस्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर शुरु
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राजस्थान : सीकर में DYFI के राज्यस्तरीय दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर की तैयारी ! 12-13 जून
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दोपहर की धूप, पसीने से तर शरीर, व एक कैमरा- क्या आप एक मज़दूर के दिन को कैद कर सकते हैं? "A Sweltering Day With a Worker" – CITU Short Film Competition, Summer 2026 छात्र, युवा फिल्मकार व सभी सेक्टर के मज़दूर हिस्सा ले सकते हैं Apply: 17 जून तक Submit: 5 जुलाई 🔗 Scan & Apply
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*☭ जयपुर के खो नागोरियान में अवैध पटाखा फैक्ट्री हादसा: 8 मजदूरों की मौत* सीटू ने मोदी सरकार और राज्य सरकार की मजदूर-विरोधी नीतियों को ठहराया जिम्मेदार जयपुर के खो नागोरियान क्षेत्र में एक अवैध पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण धमाके और आगजनी में 8 मजदूरों की दर्दनाक मौत हो गई।
जयपुर के खो नागोरिया में अवैध पटाखा फेक्ट्री बन रहे मकान में भीषण आग।
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✊ मृतक श्रमिकों के परिवारों को ₹1-1 करोड़ मुआवजा, आश्रित को स्थायी सरकारी नौकरी तथा बच्चों की निःशुल्क शिक्षा-स्वास्थ्य सुविधा दी जाए। ✊ औद्योगिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए राज्य स्तरीय त्रिपक्षीय कमेटी गठित की जाए।
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मजदूरों की जान सस्ती नहीं है। सुरक्षित कार्यस्थल, सख्त श्रम कानून और जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। ☭ सीटू राजस्थान ☭ लाल सलाम
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