"सम्बन्धों को अनुबन्धों को परिभाषाएँ देनी होंगी
होठों के संग नयनों को कुछ भाषाएँ देनी होंगी
हर विवश आँख के आँसू को
यूँ ही हँस हँस पीना होगा
मै कवि हूँ जब तक पीड़ा है
तब तक मुझको जीना होगा..."
कविताओं की एक और मनहर साँझ 🎤💕
आज शाम 08:00 बजे,
जरूर जुड़ें🤝
नोट: कार्यक्रम का लिंक एक घंटे पूर्व @ परिवार के व्हाट्सएप समूह में प्रेषित किया जाएगा।
@DrKumarVishwas
@Vishwaasam