प्रधानमंत्री का बयान बता रहा है कि उनकी राजनीति विकास का केवल ढोंग करती है। उनकी राजनीति केवल सांप्रदायिक नफ़रत की बुनियाद पर खड़ी है। दस साल बाद भी वे एक भाषण बिना मुसलमान, मुस्लिम लीग और मछली के नहीं दे सकते। यह बहुसंख्यक वर्ग का भी अपमान भी है। ऐसा लगता है प्रधानमंत्री बहुसंख्यक को भी इसी लायक़ समझते हैं । उसके बच्चे बेरोज़गारी से मरते रहेंगे प्रधानमंत्री उन्हें मुसलमान मुसलमान सुनाते रहेंगे। अफ़सोस ।