बुजुर्गों ने सत्य ही कहा है कि:-
त्रेतायुग में शिक्षा का स्तर उच्चतम और जीवनपरक था।
भगवान श्रीराम ने महर्षि वशिष्ठ और विश्वामित्र से शिक्षा पाई थी।
उनके जीवन में शिक्षा के संस्कार स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं सत्य, मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा।
आज शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है क्यो