दारोगा जी का काम भी कितना मुश्किल है… पहले फाइल आती है, फिर “लिफाफा” आता है… और फिर इंसाफ अपने आप “सेटल” हो जाता है 😏
Akhilesh Yadav जी ने सही ही कहा था — “हथेली गर्म, पुलिस नरम”
आगरा का ये वीडियो बता रहा है कि सिस्टम में अब भी “प्रोसेस” पूरी ईमानदारी से फॉलो हो रहा है… बस तरीका थोड़ा कैशलेस नहीं हुआ अभी तक 💸