प्रयागराज की सड़कों पर उमड़ा प्रतियोगी छात्रों का ग़ुस्सा सिर्फ़ एक परीक्षा का विरोध नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ़ आवाज़ है जिस पर युवाओं का भरोसा लगातार टूटता जा रहा है। लेखपाल भर्ती परीक्षा को निरस्त कर निष्पक्ष और पारदर्शी प्रक्रिया की मांग कर रहे छात्रों का कहना है कि भाजपा सरकार में भर्ती परीक्षाएं अब मेहनत नहीं, बल्कि अव्यवस्था और संदेह का प्रतीक बन चुकी हैं।
पेपर लीक, धांधली और लगातार उठते सवालों ने प्रतियोगी युवाओं के भविष्य को असुरक्षा के अंधेरे में धकेल दिया है। मेहनत करने वाला छात्र आज खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहा है।