राजनीति में वैचारिक मतभेद तो स्वाभाविक हैं, परंतु जब सत्य उजागर होता है तो बौखलाहट भी स्वाभाविक हो जाती है। आप राम मंदिर के चढ़ावे की चोरी का "खुलासा" करने चले थे, परंतु जनता जानती है कि असली खुलासा तो आपके पुराने रिकॉर्ड का हो रहा है।
निजी हमलों की बात करते हो? याद कीजिए, जब स्मृति ईरानी जी की बेटी पर झूठे आरोप लगाए गए, जब कंगना रनौत पर अश्लील टिप्पणियां की गईं, जब मैथिली ठाकुर जैसी युवा बहनों पर कीचड़ उछाला गया तब आपकी "मर्यादा" कहां छिप गई थी?
जैसी करनी, वैसी भरनी यह सनातन सत्य है। समय परिवर्तनशील अवश्य है, परंतु सत्य और न्याय की अदालत कभी नहीं बदलती।
अब जब अपनी बेटी पर आ गई तो "कार्यवाही" की धमकी? पहले अपने घर के आंगन साफ कीजिए, फिर दूसरों को उपदेश दीजिए।