ऐसे ही दिल्ली में बने बनाए डामर वाले अच्छे सड़कों को उखाड़ उखाड़ कर दुबारा बनाया जा रहा जबकि जहां सच में जरूरत है वहां कुछ नहीं हो रहा
RWA और नगर निगम कितने निकम्मे होते हैं उसका एक उदाहरण हमारी सोसायटी है। इसका मेन गेट बनने में छः महीने लगे थे। यह काम आप यदि सामान्य तरीके से करवाते, जैसे आपका घर बनता है, तो सप्ताह भर लगता। पूरा लोहे का ढाँचा खड़ा होने में, उसको HPL से कवर करने में, लाइट लगाने में।
डेढ़ महीने पहले उसी गेट के आगे से जाते नाले पर एक ट्रक पलट गया, तो उस नाले को खोदने में सप्ताह भर लगा, फिर सीमेंट से बनाने में दूसरा सप्ताह, और बाकी के चार सप्ताह किस कार्य में गए, यह हमें पता नहीं। नाला अभी बना नहीं है।
उसी के पास एक टी-प्वाइंट है। वहाँ उसे तोड़ कर फिर से टी-प्वाइंट बनाया गया। आवागमन पर इसका कोई प्रभाव नहीं, पर किसी को लगा कि बना देते हैं एक बार और।