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Joined January 2013
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साथियों यदि आप अच्छा कर नहीं पा रहे हैं तो अच्छा सोच तो सकते हैं,ओर अच्छा स्वभाव/आचरण तो अपना सकते हैं,अच्छाई की दुआ और बुराई की बद्दुआ खाली नहीं जाती,पर कब,कैसे और किस रूप में,ये नहीं पता। तथा अच्छा करने वालों के साथ बुरा कम होता है, So व्यक्ति को सकारात्मक तरिके से रहना चाहिए।
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पांचना बाँध की राजनीति दोनों समाजों के लिए अत्यंत नुकसानदेह साबित हो सकती है। पानी किसी जाति का नहीं, जीवन का अधिकार है। यदि हम आपस में लड़ेंगे, तो लाभ कुछ राजनीतिक व्यक्तियों को होगा और नुकसान दोनों समाजों को उठाना पड़ेगा। इसलिए आपस में मिल बैठकर ही इसका समाधान संभव ह @1K_Nazar
पाँचना डैम मामले में गुर्जर समुदाय के कुछ भ्रमित व अज्ञानी व्यक्ति आज मीणाओं को बहुत कुछ भला-बुरा कह रहे है व जाति के नाम पर कमांड एरिया की नहरों में पानी इसलिए रोक रहे है ताकि मीणाओं को सिंचाई हेतु पानी नहीं मिले, क्या उन्हें यह पता है कि - 1. स्व. श्री राजेश पायलेट एक बार भरतपुर में सांसद बने और अगले चुनाव में महाराज जी श्री विश्वेन्द्र सिंह जी ने उन्हें हराया। उन्हें वहां से दौसा शिफ्ट करना पड़ा। 2. अजमेर में सचिन पायलट के एक बार सांसद बनने के बाद अगले चुनाव में उन्हें श्री सांवरमल जाट ने हराया। श्री सचिन पायलट को अजमेर से टोंक शिफ्ट होना पड़ा। 3. श्रीमति रमा पायलट को बानसुर में रोहिताश्व शर्मा ने हराया। 4. स्व. श्री राजेश पायलट, श्रीमती रमा पायलट व श्री सचिन पायलट को मीणाओं ने दौसा में जबर्दस्त सपोर्ट किया एवं तीनों को 7 बार (1984, 1991, 1996, 1998, 1999, 2000, 2004) लोकसभा का चुनाव जिताया। इतने लम्बे समय के लिए दौसा में राजनिति में सक्रिय रहने में मीणाओं की प्रमुख भूमिका रही है। फिर भी गुर्जरों के लोग कमांड एरिया के मीणाओं का जातिवादी मानसिकता से पानी रोक रहे है। 5. जब सचिन पायलट मानसर गये तब भी मीणाओं के 4 विधायकों ने उनका साथ दिया। जबकि गुर्जरों के 7 विधायकों में से केवल 3 ही उनके साथ थे। गुर्जरों को उक्त तथ्य को भलीभांति समझ लेना चाहिए। मीणाओं का अहसान मानने की बजाय उन्हें 20 वर्षों से नहरों में पानी रोककर उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। ऐसे लोगों को शर्म आनी चाहिए। साथ ही उन लोगों को भी सोचना होगा जो चुपचाप तमाशा देख रहे है व मौन धारण कर रखा है। अब भी समय है वस्तुस्थिति को समझे और पाँचना डैम का पानी रोकने वाले गुर्जरों को हीरो नहीं मानकर उन्हें गुर्जर समाज का नुकसान करने वाला समझा जाना चाहिए। उन्हें समझाया जाये कि पाँचना डैम के कमांड एरिया की नहरों में मीणाओं को परेशान करने के लिए पानी रोकना एकदम गलत है एवं माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना है। समझाने की जरूरत है कि नहरों में पानी खोलने दे अन्यथा अब सभी लोग सब कुछ समझ रहे है @rpmeenapdz
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* आपके खेत को मिलेगा 20 फीट का रास्ता सुने पटवारी प्रेम प्रकाश मीणा जी द्वारा दी गई ये जानकारी * *क्या पड़ोसी ने आपके खेत मे जाने का रास्ता रोक रखा है* 🌾*पिन्टू मीना पहाड़ी* सहायक कृषि अधिकारी *गंगापुरसिटी*
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आर के सोनेत retweeted
पुलिस सुधार (Police Reforms) केवल बड़े अधिकारी या नीतियां बनाने वाले ही कर सकते हैं। लेकिन सच यह है कि पुलिस की असली छवि और जमीन पर बदलाव लाने की सबसे बड़ी ताकत एक कांस्टेबल जवान के पास होती है, क्योंकि जनता का सबसे पहला और सीधा सामना उन्हीं से होता है। एक कांस्टेबल जवान अपने स्तर पर पुलिस व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए निम्नलिखित कदम उठा सकता है: 1. कम्युनिटी पुलिसिंग और व्यवहार में बदलाव संवेदनशील व्यवहार: थाने या नाके पर आने वाले आम नागरिकों, विशेषकर महिलाओं, बुजुर्गों और वंचित वर्ग के लोगों से सम्मानपूर्वक बात करना। जब जनता का डर भरोसे में बदलता है, तो पुलिसिंग आधी आसान हो जाती है। बीट प्रणाली (Beat System) को मजबूत करना: अपनी बीट के क्षेत्र में लोगों से नियमित संवाद रखना। स्थानीय दुकानदारों, युवाओं और प्रबुद्ध नागरिकों के साथ मिलकर 'व्हाट्सएप ग्रुप' या कम्युनिटी मीटिंग्स के जरिए छोटी-मोटी समस्याओं को अपराध बनने से पहले ही सुलझाना। 2. तकनीकी दक्षता और आधुनिक सोच स्मार्ट पुलिसिंग: आज के समय में तकनीक का ज्ञान बहुत जरूरी है। एक जवान डिजिटल टूल्स, ऑनलाइन एफआईआर ट्रैकिंग, सीसीटीवी एनालिसिस और साइबर क्राइम की बुनियादी कड़ियों को सीखकर जांच में बड़ी भूमिका निभा सकता है। कागजी कार्रवाई में पारदर्शिता: दैनिक डायरी (GD entry) और मामलों के रिकॉर्ड को पूरी ईमानदारी और स्पष्टता से बनाए रखना, जिससे किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या हेरफेर की गुंजाइश न रहे। 3. नए कानूनों और अधिकारों की सटीक जानकारी अप-टू-डेट रहना: देश के नए आपराधिक कानूनों (जैसे भारतीय न्याय संहिता आदि) और मानवाधिकारों की गहरी समझ रखना। जब एक कांस्टेबल को खुद कानूनों की सही जानकारी होगी, तो वह न तो किसी का अनुचित उत्पीड़न होने देगा और न ही खुद किसी दबाव में आएगा। प्रक्रिया का पालन: किसी को हिरासत में लेते समय या पूछताछ करते समय तय गाइडलाइंस (जैसे डी.के. बसु गाइडलाइंस) का कड़ाई से पालन करना, जिससे पुलिस की साख बढ़े। 4. साथी जवानों का मानसिक और नैतिक सहयोग तनाव प्रबंधन में मदद: पुलिस की नौकरी भारी तनाव वाली होती है। एक जवान अपने सहकर्मियों के साथ अच्छा माहौल बनाकर, उनके सुख-दुख में साथ देकर और योग/खेलकूद जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर वर्क-कल्चर को सकारात्मक बना सकता है। गलत प्रथाओं का विरोध: अपने स्तर पर किसी भी तरह के छोटे-मोटे भ्रष्टाचार या 'थाना संस्कृति' की कुप्रथाओं को बढ़ावा न देना। ईमानदारी की शुरुआत खुद से होती है। 5. सही मंच पर अपनी आवाज उठाना संपर्क सभा (Darbar) का उपयोग: पुलिस महकमे में नियमित रूप से होने वाली 'संपर्क सभाओं' या 'सैनिक सम्मेलनों' में जवानों के कल्याण, ड्यूटी के घंटों, और लॉजिस्टिक्स (जैसे बेहतर हथियार, गाड़ियां या वायरलेस) से जुड़े रचनात्मक सुझाव उच्च अधिकारियों के सामने रखना। संक्षेप में कहें तो: कानून की किताब और नीति चाहे कितनी भी अच्छी हो, उसे जमीन पर उतारने वाला हाथ एक कांस्टेबल का ही होता है। यदि हर जवान अपनी ड्यूटी को केवल 'नौकरी' न मानकर 'जनसेवा' की भावना से करे, तो पुलिस सुधार बिना किसी बड़े बजट के भी संभव है।
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गुर्जरों का लठ्ठ मज़बूत रहा है। लेकिन यह दौर लठ्ठ का नहीं। हाक़िम बैंसला ठीक हैं... लेकिन अपना नेतृत्व किसी अनुभवी व्यक्ति को दीजिए।🙏 मेरी बात का बुरा मत मानो... लेकिन जैसे ही मीणा समुदाय के बन्धुगण पटरी रोकेंगे... पूरे देश को मसला पता चल जाएगा। और पहली नज़र में 'असभ्य' और 'अलोकतान्त्रिक' कहकर आपके धरना को जनसामान्य कानून की स्पष्ट अवहेलना कह देगा। वहीं मीणा समुदाय का आंदोलन बहुत ही ज्यादा लोकतान्त्रिक और सभ्य प्रतीत होता है। मैं यह बात बिना आधार के नहीं कह रहा। - आंदोलन में बड़ी संख्या में मीणा माताएं शामिल हैं। - दलित/ब्राह्मण/अन्य को भी ये शामिल कर रहे। - जाट/राजपूत/गद्दी/खेलदार बाहुल्य गाँव भी शामिल। - ट्रेन जाम से पहले भीड़ इकठ्ठा कर आंदोलनरत। - आंदोलन से जाति का टैग हटा जनआंदोलन बना रहे। - हथियार का कोई प्रदर्शन नहीं कर रहे । - 'हमारी मांग तो सरकार से है' को दोहरा रहे। और आप? 🤔 आपको समझना पड़ेगा कि अभी समय बदल चुका है। आपने गंभीर नदी क्षेत्र से जो मांग उठवाई है... वह फिर भी तार्किक प्रतीत होती है। उस पर आपको ऊर्जा लगाने की जरूरत है। अगर भावुक गुर्जर युवाओं को साइड में कर दें तो आपको भी यह पता है कि 2007-08 वाला आंदोलन विफल (ज़ी हाँ ) ही रहा है। अभी मिल यह 5% भी अस्थायी ही है। कोर्ट में जाते ही हटना तय है। 🙏 समझिए बात को...मैं तो आपका दर्द और इस विवाद का इतिहास समझता हूँ... लेकिन अन्य लोग नहीं समझते। और हाँ...मैं सड़क/पटरी/पानी रोकने के किसी भी कृत्य का समर्थन करता ही नहीं। न भविष्य में करूंगा। 🙏 लेकिन... आपकी भावनाओं को समझता हूँ। बाँध का पानी 2004-05 में रोका गया। यह इजहार था तत्कालीन सरकारी की वादाखिलाफ़ी के विरोध का। सरकार की गलत नीति भी आजतक जारी है...और आपका विरोध भी... 🙏 ऐसा नहीं है कि पानी रोककर सिर्फ आपने ही विरोध जताया है। हरियाणा के जाट आरक्षण आंदोलन में भी पानी सप्लाई रोकी गई... जिसे आर्मी बुलाकर चालू करवा लिया गया था। लेकिन... मेरी सलाह तो सिर्फ इतनी है कि " 1 बूँद भी पानी नहीं देंगे " वाली भाषा नहीं चल सकती। रणनीति को मॉडर्न बनाओ। इतने सालों में MBC आरक्षण से लगी नौकरियों के फ्लस्वरूप जन्मा आपका सरकारी कर्मचारियों का 'मिडिल क्लास' कहाँ है? उनकी मदद क्यों नहीं लेते आप लोग? 🤔 क्या खंडीप का आंदोलन बड़े मीणा अधिकारियों के सहयोग के बिना चलना संभव है? 🙏 सारा खेल नैरेटिव का ही है। मैं तो स्पष्ट देखता हूँ आप लोग तो खुलकर सच भी नहीं बोल पा रहे हो। किसी को सांसद, विधायक या मुख्यमंत्री बनाने का इंतजार छोड़कर सच बोल ही देना चाहिए। सच जानकर जैसे मैं आपकी भावना समझ रहा हूँ... अन्य लोग भी समझ पाएंगे। अपनी कौम के 72 लोग खोकर भी आप अमूमन पहली वाली स्थिति में ही खड़े हो। आपको विचार करने की जरूरत तो है ही... 🙏 बस... सनद रहे... यह दौर 'केवल' लठ्ठ का नहीं है। मेरा व्यक्तिगत स्टेण्ड... 👇 मीणा और गुर्जर दोनों ही समुदाय मेरे और मेरे समुदाय के लिए समान हैं। हज़ारों साल से हमारा समुदाय इन दोनों प्रभावशाली समुदायों के बीच गुजर-बसर करता आया है। आज भी ठीक ही स्थिति है। 🙏 लेकिन... मैं व्यक्तिगत रूप से NATURAL JUSTICE का समर्थक हूँ... 🙏 'EQUALS MUST BE TREATED EQUALLY' की बात का समर्थक हूँ। इसलिए गुर्जरों को वे सभी हक और अधिकार मिलने चाहिए जो उनके 'समकक्ष' समुदायों को मिल रहे हैं। गुर्जर और मीणा इस क्षेत्र के 2 सर्वाधिक प्रभावशाली समुदाय हैं। और सरकारी संरक्षण की जरूरत वँचितो को ज्यादा होती है। आज बेचारे कुम्हार, नाई, सुथार, दर्जी, छीपा, लुहार, जंगम जैसी भूमिहीन जातियों के बच्चों की कट-ऑफ़ मीणा और गुर्जर दोनों जातियों से ज्यादा जा रहीं है। लेकिन वे असहाय हैं। अपने असंतोष को जाहिर भी नहीं कर सकते। 🙏 दोनों मज़बूत जमींदार जातियाँ अपने आप को 'सर्वाधिक भूखा-नंगा, कमजोर, वंचित' दिखलाकर अधिकाधिक हिस्सेदारी लेने की दिशा में अग्रसर हैं। खैर... जो भी हो..... दोनों समुदाय बैठकर बात करें... और विषय को हर करने का शान्तिपूर्ण प्रयास करें। करौली-सवाईमाधोपुर में... 🔰 मीणा गुर्जर आबादी : 30% 🔰 अन्य आबादी : 70% दोनों समुदाय के बंधु हज़ारों साल से चले आ रहे भाईचारे को कायम रखें। और भड़काऊ बातें करने की बजाय शांति से काम लें। और क्षेत्र की जनता को भी शांति के माहौल में रहने दें। भजनलाल सरकार का नाकारापन ही है...जो दोनों को टकराने का समय दिया जा रहा है...वाकई दुर्भाग्यपूर्ण। राजधर्म निभाइए... भजनलाल ज़ी... 🙏 हालांकि ज़ब 2 मज़बूत समुदाय आमने-सामने आते हैं तो सरकारें भी पंगू नज़र आती हैं.... फिर चाहे वसुंधरा सरकार हो... या हरियाणा, गुज़रात, महाराष्ट्र और मणिपुर की सरकारें। शांति कायम रहे।
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मेरे पसंदीदा नेता श्री @GovindDotasra जी के अरबपति रिश्तेदार को बेशकीमती ज़मीन का 1/- (एक रूपये) में सरकारी पट्टा… शिक्षा विभाग में बहुत बड़े अफ़सर रहे श्री रमेश पूनिया जो डोटासरा जी के सुपुत्र श्री अविनाश जी के ससुर हैं, जिनके तीनों बच्चे RAS हैं और साक्षात्कार में 80-80-80 नम्बर लाए थे क्योंकि उन पर अफ़सर और नेता सदा ही मेहरबान रहे हैं… इस पट्टे की ग़ायब हो चुकी पूरी फाइल निकलवाकर जाँच की जाए तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आ सकते हैं लेकिन CM श्री @BhajanlalBjp सहित @BJP4Rajasthan के किसी नेता की औक़ात नहीं है… मेरी पंक्तियाँ पढ़कर किसी BJP नेता को जोश आ भी गया तो डोटासरा जी के नाम से इनकी धूजनी छूट जाएगी… डोटासरा जी की जय हो…👍 मगरमच्छों को पकड़ने की बात करने वाले BJP नेता, मगरमच्छों का बाल भी नहीं पकड़ सकते…
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मेरे घर का बिजली बिल हर महीने 5–7 हजार रुपये आता था, यानी साल का लगभग 72–84 हजार रुपये खर्च आता था। इसे कम करने के लिए मैंने 3.5 लाख रुपये खर्च करके 5KW Solar System लगवा लिया। मुझे लगा था कि बिल लगभग खत्म हो जाएगा, लेकिन बाद में समझ आया कि Solar लगवाना और उससे सही फायदा लेना अलग बात है। मेरे इलाके में रोज़ 4–5 घंटे बिजली कटती थी, फिर भी मैंने Subsidy के लालच में On-Grid Solar चुन लिया। बाद में पता चला कि बिजली जाते ही Solar भी बंद हो जाता है। दूसरी गलती मैंने सस्ता Installer चुनकर की। शुरुआत में कुछ पैसे बचे, लेकिन खराब Installation की वजह से बाद में Repair पर हजारों रुपये खर्च करने पड़े। इसके बाद मैंने Panels की सफाई पर ध्यान नहीं दिया, जिससे बिजली उत्पादन कम होने लगा और हर महीने नुकसान होने लगा। तब मैंने 10–15 दिन में Panels साफ करना शुरू किया, System Monitoring पर ध्यान दिया और Solar की पूरी Performance पर नजर रखी। अब जाकर मुझे Solar का सही फायदा मिलना शुरू हुआ।
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एक आदमी अपना नया घर बनवा रहा था। घर बनाने में उसकी करीब ₹45 लाख की पूंजी लग रही थी उसने ₹12 लाख स्ट्रक्चर पर, ₹6 लाख टाइल्स पर, ₹4 लाख दरवाजों और खिड़कियों पर, ₹3 लाख पेंट पर और लगभग ₹2 लाख बिजली के काम पर खर्च किए थे घर लगभग तैयार था और अब MCB Box लगाने का काम चल रहा था। इलेक्ट्रीशियन ने MCB लगा दी और काम खत्म करने लगा तभी वहां खड़े एक इंजीनियर ने पूछा, "RCCB लगाई है क्या?" आदमी बोला, "नहीं, उसकी क्या जरूरत है?" इंजीनियर मुस्कुराया और बोला, "एक बार पूरे घर की कीमत और अंदर लगे Electrical सामान की कीमत भी देख लो?" उसने घर में लगे सामान की सूची बनाई। 2 AC = ₹90,000, 1 Fridge = ₹30,000, 1 LED TV = ₹50,000, Washing Machine = ₹25,000, Water Purifier = ₹15,000, Microwave = ₹12,000, Fans और Lights = ₹35,000 यानी सिर्फ Appliances और Electrical Items की कीमत लगभग ₹2,57,000 बैठ रही थी फिर इंजीनियर ने कहा, "इन्हें सुरक्षित रखने के लिए सही Electrical Protection भी उतनी ही जरूरी है?" अब आदमी ने RCCB की कीमत पूछी। बाजार में एक अच्छी 32 Amp RCCB लगभग ₹1,500 से ₹3,000 में मिल जाती है यानी ₹45 लाख के घर में यह लागत कुल बजट का बहुत छोटा हिस्सा थी इंजीनियर ने समझाया कि RCCB का मुख्य काम Shock Protection देना है। यदि कहीं Leakage Current हो तो यह तुरंत ट्रिप होकर सप्लाई बंद कर सकती है इसके अलावा यह Electrical System की अतिरिक्त सुरक्षा में भी मदद करती है और घर की वायरिंग को अधिक सुरक्षित बनाती है आदमी ने सोचा कि जब घर में लाखों रुपये का निवेश किया जा रहा है तो सुरक्षा पर कुछ हजार रुपये खर्च करना भी जरूरी है उसने तुरंत RCCB लगवाने का फैसला किया ताकि घर का Electrical Setup और बेहतर बनाया जा सके तब उसे समझ आया कि घर बनाते समय सिर्फ सुंदर टाइल्स, पेंट और फर्नीचर ही महत्वपूर्ण नहीं होते कई बार छोटी दिखने वाली Safety Devices भी लंबे समय तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं घर बनाते समय लोग ₹50,000 की टाइल्स, ₹1 लाख का पेंट और ₹90,000 का AC आसानी से खरीद लेते हैं लेकिन Electrical Safety पर ध्यान देना भी उतना ही जरूरी होता है जितना घर की बाकी सुविधाओं पर क्या आपके घर के MCB Box में RCCB लगी हुई है या सिर्फ MCB ही लगी है?
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. . मॉर्निंग वाक की किशमें.......
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वो आदिवासियों को ही मिलना चाहिए और मिल रहा है!! मोहित के पेट में क्यों कीड़े चल रहे हैं??
ST आरक्षण ही पांचना बाँध पानी विवाद का मूल है? पांचना का पानी तो सबको मिलना चाहिए। और ST आरक्षण? 🤔 ईमानदारी से सच क्यों न बोल पा रहे हम? 🙏
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रामपाल मीना जी वास्तव में @PoliceRajasthan के एक कर्मठ, जुझारू, कर्तव्यनिष्ठ, निडर ओर ईमानदार अधिकारी ह @INCRajasthan के राज में उन्होंने दौसा जिले के कई थानो मे, खासकर मंडावरी मे जिम्मेदारी निभाते हुए बहुत उत्कृष्ठ कार्य किय थे जिसकी वजह से वहा की जनता आज भी इन्हें मिस करती है
उदयपुरवाटी थाने को पहली बार मज़बूत अधिकारी मिला है श्री रामपाल मीणा जी थाने की एक इंच ज़मीन नहीं छोड़ेंगे रोड के बीच से बराबर जमीन लेनी होगी
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एक आदमी के यहां हर महीने ₹6,000 का बिजली बिल आता था। साल भर में उसका बिजली खर्च लगभग ₹72,000 पहुंच जाता था? उसने सोचा कि एक बार Solar लगवा लिया जाए। इसलिए उसने करीब ₹3.5 लाख खर्च करके 5KW Solar System लगवा लिया उसे लगा था कि अब बिजली का बिल लगभग खत्म हो जाएगा और कुछ सालों में पूरा पैसा भी वसूल हो जाएगा लेकिन कुछ महीनों बाद उसे समझ आया कि Solar लगवाना और Solar से फायदा कमाना दोनों अलग बातें हैं पहली गलती उसने Solar System चुनने में की। उसके इलाके में रोज़ 4-5 घंटे Power Cut होता था फिर भी उसने Subsidy के चक्कर में On-Grid Solar लगवा लिया जिसकी कीमत लगभग ₹2.8 लाख थी बाद में उसे पता चला कि बिजली जाते ही On-Grid System भी बंद हो जाता है। यानी दिन में धूप होने के बावजूद घर में बिजली नहीं आती अगर उसने Hybrid Solar लगाया होता तो उसे लगभग ₹4.5 लाख खर्च करने पड़ते, लेकिन Power Cut के समय भी बिजली मिलती रहती यानी शुरुआत में लगभग ₹1.7 लाख बचाने के चक्कर में वह रोज़ की परेशानी झेलने लगा दूसरी गलती Installation में हुई। उसने सबसे सस्ता Installer चुन लिया जिसने ₹20,000 से ₹30,000 कम रेट में काम करने का वादा किया था बाद में पता चला कि Earthing, LA Protection और कुछ Safety Components सही तरीके से लगाए ही नहीं गए कुछ महीनों बाद Fault आने लगे और Repair पर ही लगभग ₹15,000 से ₹25,000 खर्च हो गए अब तीसरी गलती की बारी आई। Solar लगवाने के बाद उसने Panels की सफाई करना लगभग छोड़ दिया धीरे-धीरे Panels पर धूल, मिट्टी और पक्षियों की गंदगी जमा होने लगी उसका 5KW Plant सामान्य स्थिति में लगभग 600 यूनिट प्रति माह बिजली बना सकता था लेकिन गंदगी की वजह से उत्पादन लगभग 15% कम हो गया यानी हर महीने लगभग 90 यूनिट बिजली कम बनने लगी अगर बिजली की कीमत ₹8 प्रति यूनिट मानी जाए तो हर महीने लगभग ₹720 का नुकसान होने लगा एक साल में यही नुकसान लगभग ₹8,640 तक पहुंच गया और 10 साल में यह आंकड़ा ₹86,400 के करीब पहुंच सकता है तब उसे समझ आया कि Solar System में नुकसान सिर्फ खराब मशीन से नहीं होता कई बार गलत System चुनने, गलत Installation करवाने और Maintenance न करने से लाखों रुपये का नुकसान हो सकता है उस दिन के बाद उसने हर 10-15 दिन में Panels की सफाई शुरू कर दी और System की Monitoring भी करने लगा अगर आप ₹3.5 लाख खर्च करके Solar लगवाएं और बाद में गलत फैसलों की वजह से ₹1 लाख से ज्यादा का नुकसान हो जाये?
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एक आदमी ने ₹25 लाख का प्लॉट पसंद कर लिया था? सेलर बार-बार कह रहा था कि जल्दी एडवांस दे दो, वरना कोई दूसरा खरीद लेगा। लेकिन तभी उसके एक दोस्त ने कहा कि पैसे देने से पहले कागज जरूर चेक कर लेना। आदमी बोला कि जमीन तो सामने दिख रही है, फिर कागजों की क्या जरूरत है। दोस्त हंसकर बोला कि असली जमीन कागजों में होती है, मैदान में नहीं। सबसे पहले उसने Mother Deed मांगी। जिससे पता चलता है कि जमीन पहले किसकी थी और मालिकाना हक कैसे बदलता गया। फिर उसने Sale Deed चेक की। यही दस्तावेज साबित करता है कि जमीन कानूनी रूप से किसके नाम है। इसके बाद Encumbrance Certificate निकलवाया। ताकि पता चल सके कि जमीन पर कोई लोन, केस या कानूनी विवाद तो नहीं है। फिर Khata Certificate देखा। क्योंकि भविष्य में मकान बनाने और टैक्स भरने के लिए इसकी जरूरत पड़ती है। इसके बाद ROR (Record Of Rights) निकलवाया। जिससे जमीन के रिकॉर्ड और असली मालिक की जानकारी मिल गई। अब कैलकुलेशन शुरू हुआ। प्लॉट की कीमत = ₹25,00,000 रजिस्ट्री खर्च लगभग = ₹1,75,000 स्टाम्प ड्यूटी और अन्य शुल्क = ₹50,000 कुल निवेश = ₹27,25,000 दोस्त बोला कि अगर एक जरूरी कागज भी गलत निकला। तो ₹27 लाख का निवेश फंस सकता है। फिर एक और बात सामने आई। जिस आदमी से वह प्लॉट खरीद रहा था, वह असली मालिक नहीं था। वह मालिक का रिश्तेदार था। तब दोस्त ने तुरंत Power of Attorney (POA) मांगी। क्योंकि बिना POA के वह जमीन बेच ही नहीं सकता था। फिर सर्वे विभाग से Survey Sketch निकलवाया गया। क्योंकि सेलर 100 गज बता रहा था। लेकिन रिकॉर्ड में जमीन सिर्फ 92 गज निकली। यानी 8 गज कम। अगर उस इलाके में जमीन ₹25,000 प्रति गज थी। तो नुकसान होता - 8 × ₹25,000 = ₹2,00,000 यानी सिर्फ एक सर्वे ने ₹2 लाख बचा दिए। तब आदमी को समझ आया कि प्लॉट खरीदते समय सिर्फ लोकेशन और कीमत नहीं देखनी चाहिए। कागजों की जांच कई बार लाखों रुपये के नुकसान से बचा सकती है। अगर आपको प्लॉट खरीदना हो तो पहले एडवांस देंगे या पहले सारे दस्तावेज चेक करेंगे?
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12 जून से ग्रामीण सेवा शिविर , 22 विभागों के काम एक छत के नीचे होंगे प्रदेश की ग्राम पंचायतों में 12 जून से 15 जुलाई तक ग्रामीण सेवा शिविर आयोजित किए जाएंगे। शिविरों में राजस्व विभाग सहित 22 विभागों की सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी। आमजन को नामांतरण, प्रमाण-पत्र, पेंशन, आयुष्मान कार्ड, पीएम आवास योजना, बिजली-पानी संबंधी शिकायतों और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ मौके पर मिलेगा। सरकार ने अधिकारियों को लंबित प्रकरणों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। पूरा आदेश यहां देखें facebook.com/share/p/18izrbq… #ग्रामीणसेवाशिविर
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CM @BhajanlalBjp जी, स्वास्थ्य मंत्री अस्पताल प्रशासन से पूछ रहे हैं कि क्या गर्भवती महिला नाचते हुए आई थी? CM साहब, आप ग्राम चौपाल से कितना ही सकारात्मक माहौल क्यों न बना दें, मगर मंत्रिमंडल के महोदय हर दूसरे दिन सरकार की छवि को ख़ाक में मिलाकर सब किए-कराए पर मिट्टी डाल रहे हैं।
राजस्थान के चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर द्वारा गर्भवती महिलाओं के संदर्भ में दिया गया बयान बेहद निंदनीय, असंवेदनशील और उनके पद की गरिमा के विपरीत है। जिस व्यक्ति के कंधों पर प्रदेश की माताओं, बहनों और मरीजों के स्वास्थ्य की जिम्मेदारी हो, उससे ऐसी टिप्पणी की अपेक्षा नहीं की जा सकती। यह बयान केवल एक महिला का अपमान नहीं है, बल्कि मातृत्व और नारी सम्मान के प्रति भाजपा सरकार की सोच को भी उजागर करता है। सत्ता के मद में चूर मंत्री यदि जनता की पीड़ा को समझने के बजाय उसका उपहास उड़ाने लगें, तो यह लोकतंत्र के लिए गंभीर चिंता का विषय है। मुख्यमंत्री को इस मामले पर चुप्पी तोड़ते हुए स्वास्थ्य मंत्री को सार्वजनिक रूप से जनता से माफी मांगने हेतु निर्देशित करना चाहिए | @PMOIndia @BhajanlalBjp @RajCMO
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मेरे पिता, स्व. श्री राजेश पायलट जी की 26वीं पुण्यतिथि पर मैं उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूँ। देशसेवा उनके जीवन का उद्देश्य और संकल्प था, जिसे उन्होंने पूरी शिद्दत और मेहनत के साथ निभाया। गांव, गरीब, किसान एवं युवा वर्ग के कल्याण के प्रति उनकी प्रगतिशील सोच और संघर्ष सदैव मार्गदर्शन प्रदान करते रहेंगे। #राजेश_पायलट_अमर_रहे
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सुंदरकांड पढ़ने से ऐसे बदल जाता है आपका जीवन... सुंदरकांड यहां उपलब्ध है : amzn.to/4g9hkQN
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