ये आदमी एकदम जड़ बुद्धि है क्या, कल भी इसे जबाब दिया था , उसका उत्तर देते न बना , आज फिर वही व्हाट्सएप्प, फेसबुक यूनिवर्सिटी का ज्ञान लेकर भौंक रहा ......।
प्रमाण लेते जा, जहां समस्या होगी बताना, ऐतिहासिक तथ्य से उत्तर दूंगा ......।
वासुदेव का सबसे प्राचीन साहित्यिक उल्लेख व्याकरणाचार्य पाणिनि (6th शताब्दी ईसापूर्व) की अष्टाध्यायी में मिलता है।पाणिनि ने अष्टाध्यायी के श्लोक 6.2.34 में वृष्णि नायकों और वासुदेव का उल्लेख किया है। जोड़ ले 1000 साल पहले की बात है या नहीं।
मेगस्थनीज़ ,जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत था , ने "सौरसेनोई" (सुरसेन/यादव) जनजाति का उल्लेख किया जो "हेराक्लेस" (कृष्ण) की पूजा करती थी। उनके दो प्रमुख नगर थे, मेथोरा (मथुरा) और क्लेइसोबोरा (कृष्णपुर), नदी योबारेस (यमुना) के किनारे।
यानी 4थी शताब्दी ईसापूर्व में एक विदेशी यूनानी राजदूत ने कृष्ण-उपासना को एक स्थापित परंपरा के रूप में दर्ज किया। बौद्ध धर्म उस समय अभी नया-नया उभरा था और मुख्यतः पूर्वी भारत (मगध) में सीमित था।
घोसुंडी-हाथीबाड़ा शिलालेख (चित्तौड़गढ़, राजस्थान) , ब्राह्मी लिपि में संस्कृत में लिखे : पहली-2री शताब्दी ईसापूर्व के हैं। यह हिंदू परंपरा के सबसे प्राचीन ज्ञात संस्कृत शिलालेखों में से एक है।
इसमें लिखा है: "संकर्षण-वासुदेव, जो अपराजित और सर्वेश्वर हैं, उनकी पूजा के लिए नारायण-वाटिका (प्रांगण) की यह दीवार बनवाई गई , राजा सर्वतत द्वारा, जो भागवत हैं और जिन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया।"
113 ईसापूर्व हेलियोडोरस स्तंभ, बेसनगर , व 180-165 ईसापूर्व अगाथोक्लीज़ के सिक्के और पहली शताब्दी ईसापूर्व मोरा-कूप शिलालेख , यह सब प्रमाण हैं ।
बाकी कल भी तुम इन शिलालेखों को बौद्ध से जोड़ रहे थे जिसका जबाब मैंने दिया था ऐतिहासिक आधार पर , उसका जबाब नहीं दे पाए फिर ...... फिर वही राग अलापना होगा तो उसको पढ़ लेना जाकर एक बार ...... नहीं तो बताना लिंक भेज दूंगा ......।
@ScienceJourney2