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ब्राह्मण संप्रदाय में शास्त्र ही प्रमाण है जबकी बुद्ध धम्म में शास्त्र तब तक प्रमाण नहीं माना जाता जबतक की वो तर्क बुद्धि विवेक पर खरी न उतरे। यानी कोई किताब खोल कर सबूत दिखाए तो ब्राह्मण संप्रदाय में सबूत मान लिया जाएगा लेकिन बुद्ध धम्म में तब तक उसे सबूत नहीं माना जाता जब तक कि वो मानवता की भलाई के लिए न हो। रेफ़्रेंस संलग्न है ख़ुद पढ़ लेवे।
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संलग्न इमेज मरीचि वज्रयान मूर्ति बताया जा रहा है। इसे अच्छी तरह डिस्क्राइब करो इसे बनाने का उद्देश्य, तथा मोरल शिक्षा इत्यादि। @grok
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बुद्ध धम्म में पाए जाने वाले 10 प्रमुख देवियों के नाम बताओ तथा उनके कितने हाथ पैर सर होते है और वो किन किन शस्त्रों के साथ होती है तथा उनका क्या महत्व है ? @grok
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भारत में स्वघोषित भूदेवों में जिसकी सत्ता उसके हम दरबारी की दल बदल जाति नीति की सुरुवात किस शासक के दौर से शुरू हुई थी ?
6% मुहम्मद बिन क़ासिम
16% ग्यासुदिन बलवन
22% अकबर
56% उपरोक्त सभी
32 votes • Final results
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सभी कमेंटवीर विरोधियों को खुला डिबेट इनविटेशन। Live : 8pm, 11June 2026 in Rational World Youtube Channel.
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आर्य यूरेशिया/मधेशिया/ग्रीक, इजरायल इत्यादि देशों से जम्बूदीप में घुसा लेकिन कैसे और कब?
7% सिकन्दर पहला आर्य था
7% मुस्लिम शासन तक आता रहा
45% बुद्ध धम्म में शामिल होकर
41% उपरोक्त चारों
44 votes • Final results
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सरदार पटेल की सोच कितनी रैशनल थी? सोमनाथ मंदिर बनवाये जबकि उसके नीव की नीचे बुद्धिस्ट विहार था । ऐसे में क्या वह भारतीय कल्चर को सहेज पाते?
गांधी ने नेहरू को पीएम बनाने की जिद न की होती तो ये होता. सरदार पटेल प्रधानमंत्री और उस दौर के सबसे बड़े अर्थशास्त्री बाबा साहब आंबेडकर वित्त मंत्री. दोनों गैर-वामपंथी. मार्क्सवाद विरोधी. दोनों विकासवादी. नेहरू को बहुमत नहीं था. 1947 में उनको बागडोर नहीं सौंपना था.
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विष्णु, इंसानों की हत्या करने हेतु एक नहीं कई अवतार लिए। फिर वो शेषनाग पर दूध के सागर पर लेटते है ये अति वैज्ञानिक बात किस ऋषि वैज्ञानिक ने अपने शोध में पाया था फिर उसे कलमबद्ध किया जिससे की ये वैज्ञानिक सच सभी हिंदू जान सके। फिर इस उपलब्धि पर मेडल के रूप में पूजा पाठ सुरु किए। @grok
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जवाब दो @grok शर्मा गए क्या?
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बताए घोक बच्चा क्या चुनौती देगा ह्यूमन इंटेलिजेंस को 😂 बोल रहा है दूसरी तीसरी सदी में वैष्णव में बुद्धिस्ट नागार्जुन कोंडा में विष्णु की स्थापना की थी 🤡🤡 और सबसे ख़ास बात की ये बात ब्राह्मणों ने 1959 की खुदाई में बुद्धिस्ट लिपि से पता चली।🤡🤡🤡 ये है टोपी इतिहास की
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बताओ ये शंख किस धम्म से संबंधित है ? @grok
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ये मूर्ति शंख और चक्क गदा लिए हुए है इकॉनोग्राफ़ी क्या बता रहा है @grok
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अंधभक🤡 कह रहे की AI, Human रिसर्च से आगे निकल चुका है । घोक बता रहा की रामायण का लिखित कोई सबूत नहीं न ही पुराण का न ही वेद का सम्राट असोक के वैराथ इंस्क्रिप्शन से पहले का। लेकिन फिर भी मान लो की भागवत विष्णु को कहा जाता है और वो सम्राट असोक से पहले था।🤡🤡
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बांग्लादेश में मिली इस पालवंशीय मूर्ति को लोकेश्वर अथवा अवलिकेतेश्वर बुद्ध का बताया जा रहा है जबकि भारत केआर कुछ भ्रमण इसे विष्णु प्रचारित कर रहे है । फैक्ट चेकिंग कर असलियत सामने लाओ @grok
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एक नेरेटिव खड़ा किया गया है की आर्य यूरेशिया से आये तो केवल मर्द ही आए औरते साथ नहीं लाए थे। तो सवाल यह है की आर्यों ने अपनी बहू बेटियो बहनो माताओ को यूरेशिया में किसके सहारे हमेशा के लिए छोड़ दिया ? अथवा क्या किसी ने आर्यों की बहू बेटियों माओं बहनो पर कब्जा कर लिया था और आर्यों को वहाँ से खदेड़ दिया जिस कारण वो अपनी बचाते जम्बूदीप में माइग्रेट हुए? नेरेटिव को डीएनए आधारित बताया जा रहा है। तो बताए इस नेरेटिव में कौन सा सवाल ज़्यादा सटीक है?
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सभी कमेंटवीरो को खुला चैलेंज है आज 7:30pm Rational World Youtube Live में जुड़कर डिबेट कर लो। सबूत दिखाकर ख़ुद को सही साबित करो और हाथो हाथ इनाम ले जाओ। अन्यथा यही कमेंटवीर बनकर कायरो की तरह भौकते रहना।
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ब्राह्मण पीढ़ी दर पीढ़ी वेद मौखिक ढो कर ला रहा था लेकिन कमाल की बात यह है की ऋग्वेद के सबसे प्रमुख देवता इंद्र, अग्नि, मित्र, वरुण, अश्वनी इत्यादि देवतावो के लिए न मंदिर बनाया न ही मूर्ति। फ़िलहाल भारत के सभी मंदिरों के देवी देवता वही क्यो है जो बुद्ध धम्म में पाए जाते है?
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उपाध्याय नीच ब्राह्मण बता रहा है ब्राह्मण और ये उपाध्याय जो बुद्धिज्म का शब्द है उसमे पिताजी खोज रहा।🤡 अपना ख़ुद का कोई इतिहास नहीं और बुद्धिज्म के शब्द को सरनेम बनाना पड़ रहा है । अब कोई ये मत पूछ देना कब से उपाध्याय सरनेम लगाना शुरू किया तब ये 🤡 फिर से रो देगा । अभी लाइव डिबेट का नाम सुन भागता फिर रहा है।
उपाध्याय" कोई विशुद्ध बौद्ध शब्द नहीं था ...... जो शिक्षकों के लिए प्रयोग होता था , इसका उल्लेख शास्त्रों में भी है और बौद्धों के भी ग्रंथों में, यह प्राचीन भारतीय शिक्षण परंपरा का सामान्य पद था। बौद्धों ने इसका पाली रूप "उपज्ज्हाय" अपनाया। धर्मशास्त्र, स्मृतियाँ, महाभारत और संस्कृत कोश,सभी में इसका प्रयोग मिलता है। इसलिए "उपाध्याय सरनेम बौद्धों से लिया गया है" कहना ऐतिहासिक साक्ष्यों से समर्थित नहीं है; अधिक सही यह है कि दोनों परंपराएँ एक व्यापक भारतीय शैक्षिक शब्दावली का उपयोग कर रही थीं। क्योंकि दोनों का भू क्षेत्र एक था तो शब्द तो मिलेंगे न , अब तुम बौद्ध बन जाओ , मूर्ख बन जाओ, ईसाई बन जाओ , मुस्लिम बन जाओ ....... उत्तर भारत में हो तो पिता को , पिता, पापा , आदि ही व्यापक रूप से प्रयोग करते हो न ..... अब कोई जड़ बुद्धि आकर दावा करे कि वो ईसाई बन गया है , चूंकि ईसाई भी पापा बोलते हैं तो पापा शब्द पर उनका एकाधिकार है , वह ईसाई लोग " पापा" शब्द लेकर पैदा हुए थे , उससे पहले "पापा" हो ही न सकता ........ और इस अखंड चूतियापे को ही इतिहास बनाकर पेश करें तो क्या कहा जाएगा ........ 🙂
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उपाध्याय, बुद्धिस्ट मोंक जो बच्चों को सुरुवात में पढ़ाते थे उन्हें कहा जाता है । ये व्यक्ति को अपना सरनेम तक बुद्धिस्ट से लेना पड़ रहा है वो इतिहास में ज्ञान देने चला है।🤡🤡 अब आते है इस फ़ासबुकिया के ज्ञान पर। ये पालि पाक़ित में लिखे हेलोडेरियस जो की बुद्धिस्ट बन चुका था उसके अभिलेख में अपना पिताजी खोज रहा है। ख़ास बात क्या है की पाणिनी का लिखित आज तक कोई पुरातत्व सबूत नहीं मिला उसमे ये मुंह खोला और शब्द गपोड़ा, वासुदेव का सबूत दे रहा है 🤡🤡 अब आते है इसके संस्कृत क्लेम पर तो जिस हाथगूफ़ा अभिलेख को संस्कृत बता रहा है वो भी क्लासिकल संस्कृत न होकर बुद्धिस्ट हाइब्रिड पालि अथवा संस्कृत है जिसमे बुद्धिस्ट शब्दावली है। खैर जिसका सरनेम ख़ुद बुद्धिस्ट से लेना पड़ रहा हो वो भला अपना ख़ुद का इतिहास अलग से कहाँ देगा। सबकुछ बुद्धिस्ट का बस मान लो इनकी गप्प यूरेशिया का।🤡🤡
ये आदमी एकदम जड़ बुद्धि है क्या, कल भी इसे जबाब दिया था , उसका उत्तर देते न बना , आज फिर वही व्हाट्सएप्प, फेसबुक यूनिवर्सिटी का ज्ञान लेकर भौंक रहा ......। प्रमाण लेते जा, जहां समस्या होगी बताना, ऐतिहासिक तथ्य से उत्तर दूंगा ......। वासुदेव का सबसे प्राचीन साहित्यिक उल्लेख व्याकरणाचार्य पाणिनि (6th शताब्दी ईसापूर्व) की अष्टाध्यायी में मिलता है।पाणिनि ने अष्टाध्यायी के श्लोक 6.2.34 में वृष्णि नायकों और वासुदेव का उल्लेख किया है। जोड़ ले 1000 साल पहले की बात है या नहीं। मेगस्थनीज़ ,जो चंद्रगुप्त मौर्य के दरबार में यूनानी राजदूत था , ने "सौरसेनोई" (सुरसेन/यादव) जनजाति का उल्लेख किया जो "हेराक्लेस" (कृष्ण) की पूजा करती थी। उनके दो प्रमुख नगर थे, मेथोरा (मथुरा) और क्लेइसोबोरा (कृष्णपुर), नदी योबारेस (यमुना) के किनारे। यानी 4थी शताब्दी ईसापूर्व में एक विदेशी यूनानी राजदूत ने कृष्ण-उपासना को एक स्थापित परंपरा के रूप में दर्ज किया। बौद्ध धर्म उस समय अभी नया-नया उभरा था और मुख्यतः पूर्वी भारत (मगध) में सीमित था। घोसुंडी-हाथीबाड़ा शिलालेख (चित्तौड़गढ़, राजस्थान) , ब्राह्मी लिपि में संस्कृत में लिखे : पहली-2री शताब्दी ईसापूर्व के हैं। यह हिंदू परंपरा के सबसे प्राचीन ज्ञात संस्कृत शिलालेखों में से एक है। इसमें लिखा है: "संकर्षण-वासुदेव, जो अपराजित और सर्वेश्वर हैं, उनकी पूजा के लिए नारायण-वाटिका (प्रांगण) की यह दीवार बनवाई गई , राजा सर्वतत द्वारा, जो भागवत हैं और जिन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया।" 113 ईसापूर्व हेलियोडोरस स्तंभ, बेसनगर , व 180-165 ईसापूर्व अगाथोक्लीज़ के सिक्के और पहली शताब्दी ईसापूर्व मोरा-कूप शिलालेख , यह सब प्रमाण हैं । बाकी कल भी तुम इन शिलालेखों को बौद्ध से जोड़ रहे थे जिसका जबाब मैंने दिया था ऐतिहासिक आधार पर , उसका जबाब नहीं दे पाए फिर ...... फिर वही राग अलापना होगा तो उसको पढ़ लेना जाकर एक बार ...... नहीं तो बताना लिंक भेज दूंगा ......। @ScienceJourney2
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संलग्न इमेज को बुद्धिस्ट देशों में बोधिसत्व बताया जाता है जबकी भारत में विष्णु प्रचारित कहते हुए कुछ भ्रमण पाए जाते है । फैक्ट चेक करो @grok
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कृष्ण को पुरखे मानने वाले आभीरो से कुछ शोध प्रश्न: 1. किसी भी आभीर राजा ने न तो किसी राधा का मंदिर बनवाया था न कृष्ण का उल्टे उनके सारे सबूत उन्हें बुद्धिस्ट शिल्पकलाओ में प्रतिबिंबित है ऐसा क्यो? 2. आज जो कृष्ण बताया जा रहा है उसके कोई पुराना सबूत क्यो नहीं है क्यो बुद्धिस्ट अभिलेखों जातको की पालि पक्कीत को ही संस्कृत में नाम बदल कर प्रचारित करना पड़ रहा है? 3. ग्रीक शासक जो बुद्धिस्म से इन्फ़्लुएंस्ड थे उन्हें कृष्ण और बलराम क्यो बताया जा रहा है जैसे अगठक्लिश का कॉइन।जिसमें ग्रीक राजा अगठकलिस जो धम्मचक्क लिए हुए है तलवार लिए है उसे कृष्ण बताना क्या आभीरो को विदेशी घोषित करने का ये ट्रैप है? 4. ग्रीक हेलोडेरियस के पालि पक्कित अभिलेख को काल्पनिक कृष्ण से जोड़ना जिसमे कृष्ण या महाभारत जैसा कोई शब्द हो नहीं है वहाँ के शब्द मिटे हुए है जहाँ "वदेवस है वा.. वस" शब्द है। क्या पुनः आभीरो को विदेशी घोषित करने का यह ट्रैप है? 5. जब किसी भी आभीर राजा ने ख़ुद को यादव नहीं कहा तो पिछले 150 सालो में आभीरो को यवन के समनार्थी यादव देना क्या उन्हें विदेशी घोषित करने का ट्रैप है? 6. हज़ार साल पहले तक कृष्ण नाम तक नहीं पाया गया तो आज कृष्ण पुराना पुरखा कैसे हो गया जबकि कृष्ण का मतलब संस्कृत में काला होता है। 7. महाभारत में आभीरो अहीरों के लिए अपशब्द क्यो इस्तेमाल किया गया? व्यासस्मृति सहित वाल्मीकि रामायण में भी। मनुस्मृति में वर्णशंकर बता दिया (10/15) तो सवाल यह है की क्या आप भी इस काल्पनिकता के किरदार ट्रैप में फंसे है? या सही शोध से सच्चा इतिहास खोजने की कोशिश करेंगे?
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