2023 में ये लोग प्रधानमंत्री बनने की लिए ऐसे ही इकट्ठा हुए थे।
भाजपा को उखाड़ देंगे, झंडे गाड़ देंगे, कुर्ते फाड़ देंगे।
फिर चुनाव आते आते इनमें आपस मे जूतमपैजार, पटका-पटकी हो गई।
इन सभी को प्रधानमंत्री बनना है।
सब अपने से आगे किसी को जाने नही देना चाहते।
- पहले महाराष्ट्र वाले उद्धव, पवार का इलाज हुआ।
- फिर बिहार के ललुआ के लाल का इलाज हुआ।
- अब हाल ही में मोमता बानो का इलाज हुआ, इलाज क्या पूरी सर्जरी ही हो गई। सारी पार्टी इधर उधर भाग रही है।
- सपाई तो 2014 से पेले जा रहे हैं।
- कांग्रेस तो कटहा कुकुर हो चुकी है जो पा रहा है दौड़ा ले रहा है।
जब ये सारे पिट गये तो फिर एक दूसरे के साथ आकर प्रधानमंत्री बनने के सपने बुन रहे हैं।
इन सबको इस बार इकट्ठा करने वाले अलीशेख हैं…क्योंकि सबकी दुर्गति देखकर उन्ही की सिट्टी पिट्टी गुम है।
बिना सत्ता के रहने की कसक उससे और नही सही जा रही।
बेचारे......