उद्धव ठाकरे को गंभीरता से आत्ममंथन करने की जरूरत है। राजनीति सिर्फ विरासत से नहीं चलती, संगठन को संभालने और नेताओं को साथ लेकर चलने की क्षमता भी चाहिए।
अगर पार्टी के सांसदों और नेताओं को लगातार तोड़ने की कोशिशें हो रही हैं और नेतृत्व समय रहते see more...
उसे रोक नहीं पा रहा, तो यह संगठनात्मक कमजोरी का संकेत है।
बालासाहेब ठाकरे ने जिस मजबूती से संगठन खड़ा किया था, उसी विरासत को संभालना आसान नहीं है। पिता का नाम और विरासत मिल सकती है, लेकिन उनके जैसा नेतृत्व अपने काम और फैसलों से साबित करना पड़ता है।
अमेरिका में एक महिला ट्रक ड्राइवर की लाइफस्टाइल देखकर लगता है कि वहां ड्राइविंग सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि सम्मानजनक पेशा भी है।
वीडियो देखकर यकीन करना मुश्किल है कि भारत में आज किसी ट्रक ड्राइवर की ऐसी जीवनशैली हो। see more....
कभी-कभी तो लगता है कि अगले 100 साल में भी हमारे अधिकांश ड्राइवरों को वह सुविधाएं, सम्मान और जीवन स्तर नहीं मिल पाएगा जो वे आज जी रहे हैं।
हमारे यहां अर्थव्यवस्था की रीढ़ माने जाने वाले ड्राइवरों को जितना सम्मान और सुविधाएं मिलनी चाहिए, उतनी आज भी नहीं मिलतीं।
टीएमसी में बगावत की खबरों के बीच सायोनी घोष का नाम भी चर्चा में है।
राजनीति बड़ा दिलचस्प खेल है—कल तक जो एक-दूसरे पर लोकतंत्र बचाने का भाषण देते थे, आज साथ बैठने की संभावनाएं तलाश रहे हैं।
कुर्सी स्थायी नहीं होती, लेकिन राजनीतिक लचीलापन ज़रूर स्थायी होता है।
#TMC
भारतीय राजनीति में कभी बंगाल की सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिनी जाने वाली ममता बनर्जी आज कठिन राजनीतिक दौर से गुजरती दिखाई दे रही हैं। पार्टी के कई सांसद, विधायक और स्थानीय नेता लगातार टीएमसी का साथ छोड़ रहे हैं, जिससे संगठन की स्थिति पर सवाल उठ रहे हैं। see more....
ऐसे माहौल में राजनीतिक अटकलें भी तेज हैं कि भविष्य में नए समीकरण बन सकते हैं। यदि टीएमसी का जनाधार और संगठनात्मक ताकत कमजोर होती है, तो ममता बनर्जी को अपने राजनीतिक अस्तित्व को बनाए रखने के लिए बड़े फैसले लेने पड़ सकते हैं।see more...
भाजपा और कांग्रेस, दोनों एक जैसी ही लगती हैं। इन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि NEET का पेपर लीक हुआ या कोई और परीक्षा। ये सब एक ही थाली के चट्टे-बट्टे हैं। see more ... #NEET#ExamLeak#StudentsVoice#EducationReform#cjp_पार्टी
छात्रों की समस्याओं से इन्हें कोई खास मतलब नहीं है, क्योंकि इनके बच्चे तो विदेशों में पढ़ते हैं, जबकि हम इसी शिक्षा व्यवस्था पर निर्भर हैं। इसलिए यदि शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहिए, तो आवाज़ हमें ही उठानी होगी और विरोध भी हमें ही करना होगा।"
यह कॉक्रोच पार्टी, गधा पार्टी, पिग पार्टी, डॉग पार्टी से देश का कुछ लाभ नहीं होना है ! यह सब भारत को गुमराह करने के तत्व हैं युवाओं को अपने मुद्दे बुद्धिमानी से उठाने की आवश्यकता है पढ़ने लिखने वाले लोग कभी अनावश्यक विवाद में नहीं पड़ते !
Ye protest kyo kiya ja rha hai is gawar ko ye pta hota to ye iska.majak nhi bna rha hota
Hindu ka sabse bda Hitashi banta hai ise dikhayi nhi de rha hai ki kitane bachho ne neet ke exam ki wajah se suicide kra hai