रमज़ान में अफ़ग़ानिस्तान में बमबारी और उम्मत की दुहाई: पाकिस्तान की दोहरी नीति
अफ़ग़ानिस्तान के नंगरहार और पक्तीका में पाकिस्तानी हवाई हमलों से हुई नागरिक मौतों ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। संयुक्त राष्ट्र मिशन यूएनएएमए द्वारा आम नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि यह साबित करती है कि ये हमले सिर्फ़ सैन्य लक्ष्य तक सीमित नहीं थे। रिहायशी इलाकों, मस्जिदों और मदरसों को नुकसान पहुँचना अफ़ग़ान संप्रभुता के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय मानवीय क़ानूनों का भी उल्लंघन है।
सबसे बड़ा विरोधाभास यह है कि पाकिस्तान खुद को मुस्लिम उम्मत का रहनुमा और रक्षक बताता है, लेकिन उसी समय रमज़ान के पवित्र महीने में निर्दोष मुसलमानों पर बम गिराए जाते हैं। उम्मत की हिफ़ाज़त का दावा भाषणों से नहीं, बल्कि इंसाफ़ और रहम के अमल से साबित होता है। कूटनीति और संवाद के रास्ते खुले होने के बावजूद सैन्य कार्रवाई चुनना पाकिस्तान की दोहरी नीति और नैतिक दिवालियापन को उजागर करता है।