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आधी नींद .. चाय का कुल्हड़ गंगा किनारा.. और तुम #assighat इश्क़-ए-बनारस
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Manisha Sharma retweeted
“मनसा” के लिए दिल से बधाई और बहुत सारी शुभकामनाएँ @____manisha__ ❤️ ऐसे ही लिखती रहें कुछ अपने और कुछ मेरे “मनसा”
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RT @Kavya_Ras: वो अकेला चाँद किस गली जाता? सबको उसके दीदार की आरज़ू थी! #मन_सा @____manisha__ #Deedar #Shair
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वो मन-सा है, जो पलटती है कि शायद कोई डोर उस तक आना चाहती हो उसे बचाने… लेकिन मायूस होकर डूबती जाती है किनारे पर खड़े तुम उसे विलय होते देखते हो सुनो..मैं वही हूँ जिसे तुम बस डूबते हुए देखते रहे… काश तुमने एक बार हाथ बढ़ाया होता… #मन_सा
"इस नदी को देखो.. तुम अक्सर कहते हो न कि कोई मन बह रहा हो जैसे.. शब्दों और भावनाओं से भरा मन" "हां! जब भी यहां कुछ क्षण बिताता हूं.. शब्दों से भर‌ जाता हूं। दूर पर्वतों के देस में बैठा कोई शब्द घोलता है इस नदी में। कल-कल बहती इसकी ध्वनि सुनो.. वो लेखक मुस्कुरा रहा है"। ❤️❤️#शुभई
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आपकी पुस्तक समीक्षा के लिए दिल से शुक्रिया। यह जानकर अच्छा लगा कि आपने इसे सिर्फ़ पढ़ा ही नहीं, महसूस भी किया आपकी बात बिल्कुल सही है- यह सिर्फ़ एक किताब नहीं, बल्कि एक जीवन यात्रा है, और यही पंक्तियाँ इसका आधार हैं।
वो जानता है,.. ये शब्द जो अंकुरित, पुष्पित और पल्लवित होते हैं उसके मन की मिट्टी पर.. ये केवल उसके नहीं.. उसमें एक स्पर्श की आत्मा बसती है.. तुम्हारे स्पर्श की। .. उसने लाल स्वप्न देखें हैं, फूलों से बातें की हैं.. समय की परतों के बीच मोती छुपाए हैं..।
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वो जानता है,.. ये शब्द जो अंकुरित, पुष्पित और पल्लवित होते हैं उसके मन की मिट्टी पर.. ये केवल उसके नहीं.. उसमें एक स्पर्श की आत्मा बसती है.. तुम्हारे स्पर्श की। .. उसने लाल स्वप्न देखें हैं, फूलों से बातें की हैं.. समय की परतों के बीच मोती छुपाए हैं..।
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इन पन्नों में एक पूरी यात्रा बसी है, कलकल बहती नदी जैसी भावनाएं और राह में साथ-साथ चलते मन के उत्सव, ..। आप भी साक्षी बनें.. प्रेम और जीवन की अनछुई बातों की.. रंगों सी बातें।... ❤️❤️❤️ @____manisha__ 'मनसा मैम' यूं ही लिखती रहिए। 😊
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समय की हलचल में थोड़ा ठहर कर , स्वयं को पढ़ने का अवसर है ये किताब.. "मनसा" सवालों से उलझे किसी मन को , जवाबों सा सुकून है ये किताब.. और कुछ मेरे भी "मन सा" 💌 @____manisha__ Truly loved it .. Thanks 🫶🏼
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#मनसा मनीषा शर्मा जी की ख़ूबसूरत कविताओं का संग्रह जिसमें उन्होंने भावनाओं का इंद्रधनुषी रंग उड़ेल दिया है। अभी तो सिर्फ मैंने एक सरसरी सी निगाहें दौड़ाईं हैं लेकिन पढ़ूंगी शांति से...😊 आपको ढेर सारी शुभकामनाएं, यूं हीं रंग बिखेरते रहिए 💖💐💐 @____manisha__
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इस प्यार और सम्मान के लिए दिल से शुक्रिया दी ♥️🤗
#मनसा मनीषा शर्मा जी की ख़ूबसूरत कविताओं का संग्रह जिसमें उन्होंने भावनाओं का इंद्रधनुषी रंग उड़ेल दिया है। अभी तो सिर्फ मैंने एक सरसरी सी निगाहें दौड़ाईं हैं लेकिन पढ़ूंगी शांति से...😊 आपको ढेर सारी शुभकामनाएं, यूं हीं रंग बिखेरते रहिए 💖💐💐 @____manisha__
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ये पन्ने सिर्फ़ काग़ज़ नहीं, “तुम्हारे “मन का विस्तार हैं, “मनसा के मन के सपनों की पहली उड़ान मुबारक हो… ये बस आरंभ हैं ; पूरा आसमाँ अभी बाकी है !♥️ … बहुत बहुत शुभकामनाएँ “प्यारी लड़की को 📘💐 @____manisha__ 🫂♥️
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शब्द जब “मन से निकलते हैं, तो किताब नहीं, इक दुनिया बनाते हैं, “तुमने अपनी दुनिया रची है, अपने पवित्र मन पर लगे घावों से, मन के छलनी हुए टुकड़ों से, टूटे मन के भीतर से जब कुछ नया आरंभ होता हैं तो वो हैं ये किताब… अब ये अनगिनत मन तक पहुँचेगी !📘♥️ … शुभकामनाएँ “मनु🫂
यह किताब नहीं, एक यात्रा है- अगर आप कुछ मन सा पढ़ना चाहते हैं तो “मनसा” पढ़िये। आपकी हर प्रतिक्रिया , हर भावना इस यात्रा को और अर्थ देगी । ये १४ जनवरी से आमेजन पर लाइव हो चुकी है । *AMAZON-* amazon.in/dp/9362889978 *BOOKSCAPE-* bookscape.com/product-detail…
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यह किताब नहीं, एक यात्रा है- अगर आप कुछ मन सा पढ़ना चाहते हैं तो “मनसा” पढ़िये। आपकी हर प्रतिक्रिया , हर भावना इस यात्रा को और अर्थ देगी । ये १४ जनवरी से आमेजन पर लाइव हो चुकी है । *AMAZON-* amazon.in/dp/9362889978 *BOOKSCAPE-* bookscape.com/product-detail…
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आज ही आई है मेरे पास.... पढ़ने में थोड़ी देरी है । 🤗🤗 आपका लिखा पढ़ने वाले जानते हैं कि आपकी लेखनी समीक्षा की मोहताज नहीं है ।❣️❣️ किताब प्रकाशित होने की बहुत-बहुत बधाई मैम 🥳🥳🍫🍫🌸🌸 @____manisha__ #मन_सा
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मैं नए ज़माने की स्त्री हूँ, मैंने अपनी स्थगित यात्राओं को अब प्राथमिकता देना सीख लिया है मेरी चाय सब्र से बनती है मैं अधपकेपन से समझौता नहीं करती मुझे खर्च करना पसंद है क्यूंकि मैं , कमाने का साहस रखती हूँ मेरी व्यस्तता बढ़ सकती है, पर अपनों के लिए समय मेरे लिए सबसे पहले है !
… मैं पुराने ज़माने की स्त्री हूँ ; मुझे तेज़ शोर नहीं, धीमी उबलती चाय की ख़ुशबू पसंद हैं, मैं चाय को ठंडा होने तक देख सकती हूँ, किताबों को बिना पढ़े भी समझ लेती हूँ, मैं इंतज़ार को वक़्त नहीं कहती, उसे आदत बना लेती हूँ, मैं ग़ज़लें पढ़ती हूँ, रदीफ़ से पहले सब्र सीखती हूँ,
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उमर की साँझ में… जब कोई मिलता है बिल्कुल अपना सा थका हुआ दिल फिर बच्चा हो जाता है न जाने कब, कहाँ, क्या खोया था ज़िंदगी में जो उसकी एक मुस्कान से लौट आता है छिपाते रहते हैं ख़ुद को दुनिया की नज़रों से मगर दिल कुछ हरकतों में पकड़ा ही जाता है.. #मन_सा
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#छोटा_दरवाज़ा #एक_कविता_रोज 📖 "पुरुष" 🙋🏼 ख़ुद बिखरकर भी किसी को समेट लेते हैं उसके टूटे पंखों में रंग भरकर उसकी उड़ान पर मुग्ध होते हैं फ़िल्टर कॉफ़ी हो या उसकी कविताएँ घूँट घूँट उसका ज़ायक़ा लेते हैं उसे याद दिलाकर उसकी अहमियत कि तुम कितनी अद्भुत हो एक दिन…सादगी से बिछड़ जाते हैं ! हाँ कुछ पुरुष ऐसे भी होते हैं ! 🦋 #मन_सा @____manisha__ चित्र साभार : Pinterest
#छोटा_दरवाज़ा #एक_कविता_रोज 📖 ---मन का समंदर---- मैं जब सोचती हूं ये समंदर खारा क्यों है? और आखिर ये समंदर इतना गहरा क्यों है? और क्यों है समंदर ही समंदर हर तरफ़? उतर जाती हूं फिर विचारों की दुनिया में यहां विज्ञान नहीं भावनाएं हैं जो कहती हैं— दुनिया भर के दुख और पीड़ाएं बहाकर लाती हैं ये नदियां मुझ तक। और फिर दर्द और पीड़ा के साथ ये समा जाती हैं मुझ में सूरज का ताप जो भी लेता है मुझसे उससे भी ज्यादा सहना पड़ता है मुझे उन बादलों के मन का भार जो बेवजह ही बरस जाता है मुझ पर। भर जाता हूं ऊपर तक लेकिन खोता चला जाता हूं एक अनंत में और होता जाता हूं बड़ा और गहरा और गहरा ! मन की तन्हाई कुछ कम हो सके लाता हूं शोर करती लहरें किनारों पर और फिर लौटता रहता हूं मैं नहीं थकता मैं अंदर ही अंदर उफनता रहता हूं इसलिए निरंतर गति में रहता हूं। इस गति में भी नहीं भूलता टटोलना खुद को और ढूंढ लाता हूं उन सीपियों को जिनमें चमकते मोती हों और उन्हें छोड़ देता हूं किनारों पर कितनों की मुस्कानें देखनें के लिए। 🦋 ~ शिखा सिंह @ShikhaS44365499 Pic credit : Pinterest
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तुम हर किसी को मेरा महबूब समझ लेती हो , मैंने तो बस हँसकर दो बातें की थीं उससे… #मन_सा
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गुलाबों से पटा पड़ा है शहर आजकल तुम चाहो तो मुझे मना भी सकते हो.. #मन_सा
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सादगी भी नियत ख़राब करती है, तुमसे मिला हूँ तो जान गया हूँ .. #मन_सा
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एक वो दिन था , तेरे शहर से जाएँ कैसे एक ये दिन है , तेरे शहर में दिल नहीं लगता #मन_सा
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