सारे सितारे शिक्षक आए,लेकिन आए भी तो ज़मीन पर छात्रों के साथ नहीं बल्कि चैनलों पर आए। आए भी नहीं,हंगामा देख आना पड़ा। लेकिन उनके लिजलिजे तर्कों और भाषा से संवेदना गायब है। वे किसी कारखाने के मालिक की भांति बोल रहे हैं। छात्र जैसे उनके कामगार हों जिनका वो आगे से खयाल रखेंगे।