यह सब प्रशिक्षण क्यों चल रहा है? इसलिए चल रहा है क्योंकि भारत माता की जय सारे विश्व में करानी है। क्यों करानी है? हम विश्व विजेता बनना चाहते हैं क्या? नहीं, हम विजेता बनने की आकांक्षा नहीं रखते हैं। हमें किसी को जीतना नहीं है। हमें सबको जोड़ना है।
#RSSNagpurVarg2026
संघ का कार्य भी किसी को जीतने के लिए नहीं चलता, जोड़ने के लिए चलता है। भारतवर्ष भी दुनिया में आदिकाल से जीता रहा है तो किसी को जीतने के लिए नहीं, सबको जोड़ने के लिए।“
डा मोहन भागवत, सरसंघचालक, (नागपुर, तृतीय वर्ष, 6 जून 2022)
कार्यकर्ता निर्माण की साधना स्थली है, नागपुर रेशम बाग की तपस्थली जहां लाखों कार्यकर्ताओं ने बीते 100 वर्षों में अपने जीवन को नई दिशा दी है, स्वयं को राष्ट्र सेवा में समर्पित करने के लिए संकल्पबद्ध हुए हैं।
कार्यकर्ता विकास वर्ग द्वितीय के समापन कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अतिथि :
पद्मभूषण श्री कुमार मंगलम बिड़ला जी, श्री गोपालभाई मावजी गोरासिया (भुज-कच्छ, गुजरात), श्री दिव्यम जी त्रिपाठी (दिल्ली), पद्मश्री भारतभूषण जी त्यागी (बुलंदशहर उत्तर प्रदेश), महामहिम महाराजा गज सिंह जी (जोधपुर), पूजनीय श्री योगी भावनाथ जी महाराज (श्री रविकुंज आश्रम, हरमाड़ा (जयपुर)
#RSSNagpurVarg2026#rss100years
मातृ समान रुक्मिणी अक्का के देहावसान ने हमारे भाव विश्व में एक शून्य का निर्माण कर दिया है। वृद्धावस्था में शरीर शांत होना स्वाभाविक ही है किंतु दशकों के परिचय, आत्मीय संबंध के कारण मन को असहनीय वेदना होती है। रुक्मिणी जी का ज्ञानानुभव संपन्न जीवन एवं व्यक्तित्व एक राष्ट्र समर्पित सार्थक जीवन का प्राज्ज्वल्यमान उदाहरण थे।
आप राष्ट्र सेविका समिति द्वारा हिन्दू समाज का संगठन एवं महिलाओं को संस्कार देना इस उदात्त कार्य में सदैव सक्रिय रहीं। उनकी सहज मातृवत् आत्मीयता और निरंतर सक्रियता सभी को प्रभावित करती थीं। उनके निधन से सेविकाएँ समेत सभी एक मातृ समान अभिभावक से वंचित हुए हैं। संघादर्श के मेरु सदृश सूर्यनारायण राव परिवार के उस पीढ़ी की आखरी कड़ी भी अब नहीं रही।
रुक्मिणी अक्का अब स्मृतिशेष हैं। उनके परिवार तथा समिति की समस्त बहनों को मेरी गहरी संवेदनाएँ व्यक्त करता हूँ। ईश्वर उस पुण्यात्मा को सद्गति दे यही प्रार्थना है। ॐ शान्तिः।
मोहन भागवत
सरसंघचालक
दत्तात्रेय होसबाले
सरकार्यवाह
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा (1994) स्वयंसेवकों से आग्रह करती है कि वे पूर्व के समान अपने बंधुओं को सब प्रकार की सहायता देने, उनका मनोबल बनाये रखने के लिए सिद्ध रहें। पाक प्रेरित आतंकवाद घृणित मनसूबों को नाकाम करने केलिए प्रशासन को यथावश्यक सहयोग प्रदान करते रहें#pojk
#SankalpDiwas
हिंदुओं का पवित्र स्थल शारदा पीठ, देवी गली, बाणगंगा, रघुनाथ, सीताराम सहित अनेक मंदिर व मीरपुर में उत्तर की ओर स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब #pojk के इन आक्रमणकारियों के हाथों में चले गयें। आज अली बेग गुरुद्वारा में याकूब हाई स्कूल चलता है।
#संकल्प_दिवस के कार्यक्रम
कुटुंब मिलन कार्यक्रम में सरसंघचालक जी ने कहा कि बच्चों को बताएं कि ज्यादा कमाना व उपभोग करना ही करियर नहीं है। उन्हें शिक्षा दें कि दूसरों के लिए जीना सीखें। अमीर होकर दान करें। देश उनके लिए पहले हो। मातृ भाषा के प्रति प्रेरित करें। बच्चों को स्क्रीन टाइम का अनुशासन भी सिखाएं
लोग कहते हैं संघ में महिलाएं नहीं आती।
संघ स्वयंसेवकों ने जिन संस्थाओं को खड़ा किया उनमें से एक भारतीय मजदूर संघ #BMS का राष्ट्रीय अधिवेशन
मातृशक्ति की उपस्थिति का विहंगम दृश्य
ये है #RSS100Years यात्रा का परिणाम।
जिसका उद्घोष है
"देश के हित में करेंगे काम
काम का लेंगे पूरा दाम"
यह संगठन सिर्फ मांग रखने वाला मंच नहीं, बल्कि श्रमिकों को जागरूक करने और राष्ट्रहित से जोड़ने का भी कार्य करता है। श्रमिक आंदोलन को टकराव नहीं, सहयोग और संतुलन के रास्ते पर चलना चाहिए,तभी औद्योगिक विकास और सामाजिक न्याय साथ-साथ आगे बढ़ सकते हैं।
#RSS100
#रामविलास_वेदांती जी का पूरा जीवन धार्मिक कार्यों और रामकथा प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित रहा. वे बचपन से ही धार्मिक ग्रंथों में रुचि रखते थे. साथ ही रामकथा आयोजन में सक्रिय रहे. बाबरी ढांचे के विध्वंस का जिन नेताओं पर आरोप लगे थे, उनमें वेदांती का नाम का भी शामिल था.
श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन में प्रमुख भूमिका निभाने वाले पूज्य संत डॉ. राम विलास वेदांती जी के ब्रम्हलीन होने से आध्यात्मिक क्षेत्र को अपूरणीय क्षति हुई है। देश के सांस्कृतिक जागरण में उनका योगदान हमेशा स्मरणीय रहेगा। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता है। ईश्वर उन्हें मोक्ष प्रदान करे यह प्रार्थना है।
ॐ शांति।
सुनील आंबेकर
अखिल भारतीय प्रचार प्रमुख
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ
दोनों योद्धा बंधुओं की बहनजी से अयोध्या में उस समय भेंट हुई जब इस मंदिर के भूमि पूजन के लिए अयोध्या में बड़ा आयोजन हुआ था। धर्म रक्षा हेतु भाइयों के बलिदान पर उनका मस्तक गौरवान्वित दिखाई देता था। स्मृतियों के आंसू से भी बहन की नम हो जाती थी।
#RamMandirAyodhya#DharmDhwaja
"राम मंदिर" 🛕 के शिखर पर धर्म ध्वजारोहण
अयोध्या धाम में गुम्बद पर सबसे पहले भगवा झंडा फहराने वाले बंधु रामकुमार कोठारी एवं शरद कोठारी जी जहां अपने झंडा लहराया था,
वही रामजन्म भूमि आज फिर गौरव गढ़ने को तैयार है।
#Ayodhya
यह झंडा सिर्फ सजावट नहीं, बल्कि एक गहरी सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है. इसमें उकेरा गया तेजस्वी सूर्य न सिर्फ साहस का प्रतीक है, बल्कि भगवान राम के उस तेज को भी दर्शाता है जिसने सदियों से लोगों को प्रेरित किया है. ‘ॐ’ का चिन्ह और कोविदार पेड़ की आकृति इस झंडे को और खास बनाती है.
राम मंदिर का पूरा परिसर 70.5 एकड़ में फैला हुआ है और इसमें कुल 44 द्वार बनाए गए हैं. इन द्वार में 18 द्वार ऐसे हैं, जिनमें असल में दरवाजे लगे हैं. वहीं बाकी द्वार बिना दरवाजाें के हैं. राम मंदिर में दर्शन के लिए आने वाले भक्तों को सुग्रीव किला की ओर से प्रवेश मिलता है.
“Rashtriya Swayamsevak Sangh works in Bharat and has not engaged any lobbying firm in United States of America”
- Sunil Ambekar
Akhil Bharatiya Prachar Pramukh , RSS
@editorvskbharat
VIDEO | Delhi: RSS general secretary Dattatreya Hosabale offers prayers at Gurdwara Nanak Piao on the occasion of Guru 'Prakash Parv'.
(Full video available on PTI Videos - ptivideos.com)
आरएसएस पवित्र, विशाल वट वृक्ष की तरह है जो भारत के लोगों को एक साथ लाता है।
राष्ट्रीय-निर्माताओं में ऐसे दो डॉक्टर हैं, जिनका मेरे जीवन-निर्माण में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान रहा है। वे दो हैं-
डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार
डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर
- रामनाथ कोविंद
#RSS100Years
#RSS100Years में संघ ने लोगों में अखिल भारतीय दृष्टि विकसित की है
"मैं मेरा परिवार से उठकर सारे देश की चिंता करते हुए स्वयंसेवक सदा सक्रिय रहे। फिर वे दैविक आपदाएं हों या बाढ़ तूफान आदि। देश की सुरक्षा का विषय हो या देश के विकास की योजनाएं, संघ की सदा बड़ी भूमिका रही है।