Chairperson at Knowledge Lab,CEO @radiosangwari || Journalist @HamarAwaaz || RTs are not endorsements

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1986 में भारत में एक पाँच साल का छोटा लड़का अपने बड़े भाई का इंतज़ार करते हुए रेलवे स्टेशन की बेंच पर सो गया। उसका भाई वापस ही नहीं आया। वो लड़का उसे ढूंढने के लिए एक खाली ट्रेन के डिब्बे में चढ़ गया, यह सोचकर कि शायद उसका भाई अंदर हो। वहाँ भी वो सो गया। जब उसकी आँख खुली, दरवाज़े बंद थे और ट्रेन चल रही थी। ट्रेन करीब दो दिन तक नहीं रुकी। जब रुकी, तो वो कोलकाता पहुँच चुका था — अपने घर से लगभग 1500 किलोमीटर दूर। वो इतना छोटा था कि अपना पूरा नाम नहीं जानता था, पढ़ नहीं सकता था और अपने गाँव का नाम भी नहीं बता सकता था। वो कई हफ्तों तक अकेला सड़कों पर भटकता रहा। रेलवे स्टेशन की बेंचों के नीचे सोता और जो थोड़ा-बहुत खाना मिलता, उससे गुज़ारा करता। बाद में उसे एक अनाथालय ले जाया गया और “लापता बच्चा” घोषित कर दिया गया। कोई भी यह पता नहीं लगा पाया कि वो कहाँ से आया था। कुछ समय बाद ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया से एक दंपत्ति ने उसे गोद ले लिया। उन्होंने उसे प्यार भरा घर दिया और उसकी नई ज़िंदगी शुरू हुई। उसका नाम बन गया Saroo Brierley। वो दुनिया के दूसरे छोर पर बड़ा हुआ। लेकिन उसने अपना अतीत कभी नहीं भुलाया। उसे कुछ धुंधली यादें थीं — रेलवे स्टेशन के पास एक पुल, पानी की टंकी, मोहल्ले की बनावट और अपने परिवार के चेहरे। जब वो लगभग 25 साल का हुआ, तो उसने Google Earth के बारे में जाना। उसने अंदाज़ा लगाया कि ट्रेन कितनी दूरी तय कर सकती थी, और कोलकाता के आसपास एक दायरा बनाकर उस इलाके के रेलवे लाइनों के पास के शहरों को खोजना शुरू किया। कई हफ्तों तक वो हर हफ्ते 30 घंटे तक सैटेलाइट तस्वीरें देखता रहता, ताकि कोई पहचान वाली जगह मिल जाए। उसके ऑस्ट्रेलिया वाले परिवार को भी नहीं पता था कि वो क्या कर रहा है — उन्हें लगता था कि वो बस इंटरनेट चला रहा है। आखिरकार 2011 में, कई सालों की मेहनत के बाद, उसे वही जगह मिल गई — एक पानी की टंकी, एक पुल और स्टेशन के पास की खाई। यह जगह थी मध्य प्रदेश के खंडवा शहर का गणेश तलई इलाका। उसने ज़ूम करके उन गलियों को पहचाना, जहाँ वो बचपन में चला करता था। वो भारत आया और उस शहर की गलियों में घूमते-घूमते अपने घर तक पहुँच गया। घर का दरवाज़ा बंद था, तो उसे डर लगा कि शायद सब कुछ खत्म हो चुका है। तभी कुछ लोग बाहर आए और उसे एक औरत के पास ले गए। वो उसकी माँ थी। उसने 25 साल तक अपने बेटे की तलाश नहीं छोड़ी थी। इतने सालों बाद दोनों आमने-सामने खड़े थे। उसे तब पता चला कि उसका भाई, जिसका वो उस रात इंतज़ार कर रहा था, ट्रेन से टकराकर मर गया था। उसकी माँ ने दोनों बेटों को 25 साल तक ढूंढा — एक के बारे में सच्चाई पता चल गई, लेकिन दूसरे के लिए उसने उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। उसकी कहानी पर किताब A Long Way Home लिखी गई, और बाद में इस पर फिल्म Lion बनी, जिसे 6 ऑस्कर नॉमिनेशन मिले।✍️🙏
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1986 में भारत में एक पाँच साल का छोटा लड़का अपने बड़े भाई का इंतज़ार करते हुए रेलवे स्टेशन की बेंच पर सो गया। उसका भाई वापस ही नहीं आया। वो लड़का उसे ढूंढने के लिए एक खाली ट्रेन के डिब्बे में चढ़ गया, यह सोचकर कि शायद उसका भाई अंदर हो। वहाँ भी वो सो गया। जब उसकी आँख खुली, दरवाज़े बंद थे और ट्रेन चल रही थी। ट्रेन करीब दो दिन तक नहीं रुकी। जब रुकी, तो वो कोलकाता पहुँच चुका था — अपने घर से लगभग 1500 किलोमीटर दूर। वो इतना छोटा था कि अपना पूरा नाम नहीं जानता था, पढ़ नहीं सकता था और अपने गाँव का नाम भी नहीं बता सकता था। वो कई हफ्तों तक अकेला सड़कों पर भटकता रहा। रेलवे स्टेशन की बेंचों के नीचे सोता और जो थोड़ा-बहुत खाना मिलता, उससे गुज़ारा करता। बाद में उसे एक अनाथालय ले जाया गया और “लापता बच्चा” घोषित कर दिया गया। कोई भी यह पता नहीं लगा पाया कि वो कहाँ से आया था। कुछ समय बाद ऑस्ट्रेलिया के तस्मानिया से एक दंपत्ति ने उसे गोद ले लिया। उन्होंने उसे प्यार भरा घर दिया और उसकी नई ज़िंदगी शुरू हुई। उसका नाम बन गया Saroo Brierley। वो दुनिया के दूसरे छोर पर बड़ा हुआ। लेकिन उसने अपना अतीत कभी नहीं भुलाया। उसे कुछ धुंधली यादें थीं — रेलवे स्टेशन के पास एक पुल, पानी की टंकी, मोहल्ले की बनावट और अपने परिवार के चेहरे। जब वो लगभग 25 साल का हुआ, तो उसने Google Earth के बारे में जाना। उसने अंदाज़ा लगाया कि ट्रेन कितनी दूरी तय कर सकती थी, और कोलकाता के आसपास एक दायरा बनाकर उस इलाके के रेलवे लाइनों के पास के शहरों को खोजना शुरू किया। कई हफ्तों तक वो हर हफ्ते 30 घंटे तक सैटेलाइट तस्वीरें देखता रहता, ताकि कोई पहचान वाली जगह मिल जाए। उसके ऑस्ट्रेलिया वाले परिवार को भी नहीं पता था कि वो क्या कर रहा है — उन्हें लगता था कि वो बस इंटरनेट चला रहा है। आखिरकार 2011 में, कई सालों की मेहनत के बाद, उसे वही जगह मिल गई — एक पानी की टंकी, एक पुल और स्टेशन के पास की खाई। यह जगह थी मध्य प्रदेश के खंडवा शहर का गणेश तलई इलाका। उसने ज़ूम करके उन गलियों को पहचाना, जहाँ वो बचपन में चला करता था। वो भारत आया और उस शहर की गलियों में घूमते-घूमते अपने घर तक पहुँच गया। घर का दरवाज़ा बंद था, तो उसे डर लगा कि शायद सब कुछ खत्म हो चुका है। तभी कुछ लोग बाहर आए और उसे एक औरत के पास ले गए। वो उसकी माँ थी। उसने 25 साल तक अपने बेटे की तलाश नहीं छोड़ी थी। इतने सालों बाद दोनों आमने-सामने खड़े थे। उसे तब पता चला कि उसका भाई, जिसका वो उस रात इंतज़ार कर रहा था, ट्रेन से टकराकर मर गया था। उसकी माँ ने दोनों बेटों को 25 साल तक ढूंढा — एक के बारे में सच्चाई पता चल गई, लेकिन दूसरे के लिए उसने उम्मीद कभी नहीं छोड़ी। उसकी कहानी पर किताब A Long Way Home लिखी गई, और बाद में इस पर फिल्म Lion बनी, जिसे 6 ऑस्कर नॉमिनेशन मिले।✍️🙏
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एक बार की बात है, किसी जंगल में एक कौवा रहता था, वो बहुत ही खुश था, क्योंकि उसकी ज्यादा इच्छाएं नहीं थीं। वह अपनी जिंदगी से संतुष्ट था, लेकिन एक बार उसने जंगल में किसी हंस को देख लिया और उसे देखते ही सोचने लगा कि ये प्राणी कितना सुन्दर है, ऐसा प्राणी तो मैंने पहले कभी नहीं देखा! इतना साफ और सफेद। यह तो इस जंगल में औरों से बहुत सफेद और सुंदर है, इसलिए यह तो बहुत खुश रहता होगा। कोवा हंस के पास गया और पूछा, भाई तुम इतने सुंदर हो, इसलिए तुम बहुत खुश होगे? इस पर हंस ने जवाब दिया, हां मैं पहले बहुत खुश रहता था, जब तक मैंने तोते को नहीं देखा था। उसे देखने के बाद से लगता है कि तोता धरती का सबसे सुंदर प्राणी है। हम दोनों के शरीर का तो एक ही रंग है लेकिन तोते के शरीर पर दो-दो रंग है, उसके गले में लाल रंग का घेरा और वो सूर्ख हरे रंग का था, सच में वो बेहद खूबसूरत था। अब कौवे ने सोचा कि हंस तो तोते को सबसे सुंदर बता रहा है, तो फिर उसे देखना होगा। कौवा तोते के पास गया और पूछा, भाई तुम दो-दो रंग पाकर बड़े खुश होगे? इस पर तोते ने कहा, हां मैं तब तक खुश था जब तक मैंने मोर को नहीं देखा था। मेरे पास तो दो ही रंग हैं लेकिन मोर के शरीर पर तो कई तरह के रंग हैं। अब कौवे ने सोचा सबसे ज्यादा खुश कौन है, यह तो मैं पता करके ही रहूंगा। इसलिए अब मोर से मिलना ही पड़ेगा। कौए ने मोर को जंगल में ढूंढा लेकिन उसे पूरे जंगल में एक भी मोर नहीं मिला और मोर को ढूंढते-ढूंढते वह चिड़ियाघर में पहुंच गया, तो देखा मोर को देखने बहुत से लोग आए हुए हैं और उसके आसपास अच्छी खासी भीड़ है। सब लोगों के जाने के बाद कौवे ने मोर से पूछा, भाई तुम दुनिया के सबसे सुंदर जीव हो और रंगबिरंगे हो, तुम्हारे साथ लोग फोटो खिंचवा रहे थे। तुम्हें तो बहुत अच्छा लगता होगा और तुम तो दुनिया के सबसे खुश जीव होगे? इस पर मोर ने दुखी होते हुए कहा, भाई अगर सुंदर हूं तो भी क्या फर्क पड़ता है! मुझे लोग इस चिड़ियाघर में कैद करके रखते हैं, लेकिन तुम्हें तो कोई चिड़ियाघर में कैद करके नहीं रखता और तुम जहां चाहो अपनी मर्जी से घूम-फिर सकते हो। इसलिए दुनिया के सबसे संतुष्ट और खुश जीव तो तुम्हें होना चाहिए, क्योंकि तुम आज़ाद रहते हो। कौवा हैरान रह गया, क्‍योंकि उसके जीवन की अहमियत कोई दूसरा बता गया। दोस्तों, ऐसा ही हम लोग भी करते हैं। हम अपनी खुशियों और गुणों की तुलना दूसरों से करते हैं, ऐसे लोगों से जिनका रहन-सहन का माहौल हमसे बिलकुल अलग होता है। हमारी जिंदगी में बहुत सारी ऐसी चीज़ें होती हैं, जो केवल हमारे पास हैं, लेकिन हम उसकी अहमियत समझकर खुश नहीं होते। लेकिन दूसरों की छोटी ख़ुशी भी हमें बड़ी लगती है, जबकि हम अपनी बड़ी खुशियों को इग्नोर कर देते हैं।✍️🙏
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एक बार अकबर एक ब्राह्मण को दयनीय हालत में जब भिक्षाटन करते देखा तो बीरबल की ओर व्यंग्य कसकर बोला - 'बीरबल! ये हैं तुम्हारे ब्राह्मण! जिन्हें ब्रह्म देवता के रुप में जाना जाता है। ये तो भिखारी है'। बीरबल ने उस समय तो कुछ नहीं कहा। लेकिन जब अकबर महल में चला गया तो बीरबल वापिस आये और ब्राह्मण से पूछा कि वह भिक्षाटन क्यों करता है' ? ब्राह्मण ने कहा - 'मेरे पास धन, आभूषण, भूमि कुछ नहीं है और मैं ज्यादा शिक्षित भी नहीं हूँ। इसलिए परिवार के पोषण हेतू भिक्षाटन मेरी मजबूरी है'। बीरबल ने पूछा - 'भिक्षाटन से दिन में कितना प्राप्त हो जाता है'? ब्राह्मण ने जवाब दिया - 'छह से आठ अशर्फियाँ।' बीरबल ने कहा - 'आपको यदि कुछ काम मिले तो क्या आप भिक्षा मांगना छोड़ देंगे ?' ब्राह्मण ने पूछा - 'मुझे क्या करना होगा ?' बीरबल ने कहा - 'आपको ब्रह्ममुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करके प्रतिदिन 101 माला गायत्री मन्त्र का जाप करना होगा और इसके लिए आपको प्रतिदिन भेंटस्वरुप 10 अशर्फियाँ प्राप्त होंगी।' बीरबल का प्रस्ताव ब्राह्मण ने स्वीकार कर लिया। अगले दिन से ब्राह्मण ने भिक्षाटन करना बन्द कर दिया और बड़ी श्रद्धा भाव से गायत्री मन्त्र जाप करना प्रारम्भ कर दिया और शाम को 10 अशर्फियाँ भेंटस्वरुप लेकर अपने घर लौट आता। ब्राह्मण की सच्ची श्रद्धा व लग्न देखकर कुछ दिनों बाद बीरबल ने गायत्री मन्त्र जाप की संख्या और अशर्फियों की संख्या दोनों ही बढ़ा दी। गायत्री मन्त्र की शक्ति के प्रभाव से ब्राह्मण को भूख, प्यास व शारीरिक व्याधि की तनिक भी चिन्ता नहीं रही। गायत्री मन्त्र जाप के कारण उसके चेहरे पर तेज झलकने लगा। लोगों का ध्यान ब्राह्मण की ओर आकर्षित होने लगा। दर्शनाभिलाषी उनके दर्शन कर मिठाई, फल, पैसे, कपड़े चढाने लगे। अब उसे बीरबल से प्राप्त होने वाली अशर्फियों की भी आवश्यकता नहीं रही। यहाँ तक कि अब तो ब्राह्मण को श्रद्धा पूर्वक चढ़ाई गई वस्तुओं का भी कोई आकर्षण नहीं रहा। बस वह सदैव मन से गायत्री जाप में लीन रहने लगा। ब्राह्मण सन्त के नित्य गायत्री जप की खबर चारों ओर फैलने लगी। दूरदराज से श्रद्धालु दर्शन करने आने लगे। भक्तों ने ब्राह्मण की तपस्थली में मन्दिर व आश्रम का निर्माण करा दिया। ब्राह्मण के तप की प्रसिद्धि की खबर अकबर को भी मिली। बादशाह ने भी दर्शन हेतू जाने का फैंसला लिया और वह शाही तोहफे लेकर राजसी ठाठबाट में बीरबल के साथ सन्त से मिलने चल पड़ा। वहाँ पहुँचकर शाही भेंटे अर्पण कर ब्राह्मण को प्रणाम किया। ऐसे तेजोमय सन्त के दर्शनों से हर्षित हृदय सहित बादशाह बीरबल के साथ बाहर आ गए। तब बीरबल ने पूछा - 'क्या आप इस सन्त को जानतें हैं ?' अकबर ने कहा - 'नहीं, बीरबल मैं तो इससे आज पहली बार मिला हूँ।' फिर बीरबल ने कहा - 'महाराज ! आप इसे अच्छी तरह से जानते हो। यह वही भिखारी ब्राह्मण है, जिस पर आपने व्यंग्य कसकर एक दिन कहा था - 'ये हैं तुम्हारे ब्राह्मण ! जिन्हें ब्रह्म देवता कहा जाता है ?' आज आप स्वयं उसी ब्राह्मण के पैरों में शीश नवा कर आए हैं। अकबर के आश्चर्य की सीमा नहीं रही। बीरबल से पूछा - 'लेकिन यह इतना बड़ा बदलाव कैसे हुआ ?' बीरबल ने कहा - 'महाराज ! वह मूल रुप में ब्राह्मण ही है। परिस्थितिवश वह अपने धर्म की सच्चाई व शक्तियों से दूर था। धर्म के एक गायत्री मन्त्र ने ब्राह्मण को साक्षात् 'ब्रह्म' बना दिया और वह कैसे बादशाह को चरणों में गिरने के लिए विवश कर दिया। यही ब्राह्मण आधीन मन्त्रों का प्रभाव है। यह नियम सभी ब्राह्मणों पर सामान रुप से लागू होता है। क्योंकि ब्राह्मण आसन और तप से दूर रहकर जी रहे हैं, इसीलिए पीड़ित हैं।' वर्तमान में आवश्यकता है कि सभी ब्राह्मण पुनः अपने कर्म से जुड़ें, अपने संस्कारों को जानें और मानें। मूल ब्रह्मरुप में जो विलीन होने की क्षमता रखता है वही ब्राह्मण है। यदि ब्राह्मण अपने कर्मपथ पर दृढ़ता से चले तो देव शक्तियाँ उसके साथ चल पड़ती हैं। इसलिए अपनी पहचान के साथ सदैव प्रसन्न रहिये। जो प्राप्त है, वह पर्याप्त है और जिसका मन मस्त है उसके पास समस्त है।✍️🙏 जय श्री परशुराम🙏🚩 जय महाकाल🙏🌹
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एक पत्नी ने अचानक ही अपने पति का मोबाइल फोन चेक किया। उसे तीन अनोखे नाम से नंबर सेव दिखे। --मेरी हमदर्द-- --मेरी दुलारी-- --मेरे सपनों की रानी-- वह गुस्सा हो गई। --उसने पहला नंबर डायल किया, वह उसकी माँ ने उठाया। --दूसरा नंबर डायल किया, वहाँ पति की बहन से जवाब मिला। --तीसरा नंबर डायल किया, तो उसके स्वयं के मोबाइल की घंटी बजने लगी। वह रोने लगी, आँखों से आँसू बहने लगे, क्योंकि उसने अपने निर्दोष पति पर शक किया था। पश्चाताप करने के लिए उसने उस महीने की पूरी तनख्वाह पति को ही वापस सौंप दी। पति की सासू माँ को पता चला तो उसने अपने जवाई की ऐसी निष्ठा पर खुश होकर हजारों रुपए का शगुन दिया। पति ने सारा पैसा लिया और एक महंगा गिफ्ट खरीदा और उसे अपनी गर्लफ्रेंड पर लुटा दिया। वह गर्लफ्रेंड जिसका नाम उसने मोबाइल में "मुन्ना मैकेनिक" के नाम से सेव कर रखा था। ✍️🙏🤣
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एक पत्नी ने अचानक ही अपने पति का मोबाइल फोन चेक किया। उसे तीन अनोखे नाम से नंबर सेव दिखे। --मेरी हमदर्द-- --मेरी दुलारी-- --मेरे सपनों की रानी-- वह गुस्सा हो गई। --उसने पहला नंबर डायल किया, वह उसकी माँ ने उठाया। --दूसरा नंबर डायल किया, वहाँ पति की बहन से जवाब मिला। --तीसरा नंबर डायल किया, तो उसके स्वयं के मोबाइल की घंटी बजने लगी। वह रोने लगी, आँखों से आँसू बहने लगे, क्योंकि उसने अपने निर्दोष पति पर शक किया था। पश्चाताप करने के लिए उसने उस महीने की पूरी तनख्वाह पति को ही वापस सौंप दी। पति की सासू माँ को पता चला तो उसने अपने जवाई की ऐसी निष्ठा पर खुश होकर हजारों रुपए का शगुन दिया। पति ने सारा पैसा लिया और एक महंगा गिफ्ट खरीदा और उसे अपनी गर्लफ्रेंड पर लुटा दिया। वह गर्लफ्रेंड जिसका नाम उसने मोबाइल में "मुन्ना मैकेनिक" के नाम से सेव कर रखा था। ✍️🙏🤣
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नहेले पे दहेला 😘😘
एक पत्नी ने अचानक ही अपने पति का मोबाइल फोन चेक किया। उसे तीन अनोखे नाम से नंबर सेव दिखे। --मेरी हमदर्द-- --मेरी दुलारी-- --मेरे सपनों की रानी-- वह गुस्सा हो गई। --उसने पहला नंबर डायल किया, वह उसकी माँ ने उठाया। --दूसरा नंबर डायल किया, वहाँ पति की बहन से जवाब मिला। --तीसरा नंबर डायल किया, तो उसके स्वयं के मोबाइल की घंटी बजने लगी। वह रोने लगी, आँखों से आँसू बहने लगे, क्योंकि उसने अपने निर्दोष पति पर शक किया था। पश्चाताप करने के लिए उसने उस महीने की पूरी तनख्वाह पति को ही वापस सौंप दी। पति की सासू माँ को पता चला तो उसने अपने जवाई की ऐसी निष्ठा पर खुश होकर हजारों रुपए का शगुन दिया। पति ने सारा पैसा लिया और एक महंगा गिफ्ट खरीदा और उसे अपनी गर्लफ्रेंड पर लुटा दिया। वह गर्लफ्रेंड जिसका नाम उसने मोबाइल में "मुन्ना मैकेनिक" के नाम से सेव कर रखा था। ✍️🙏🤣
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असम से इस वक्त की एक बड़ी खबर सामने आ रही है. असम के जोरहाट में वायुसेना का एक विमान क्रैश हो गया है. बताया जा रहा है कि मिलिट्री बेस के अंदर लैंडिंग के बाद विमान में आग लग गई. आग लगने से पहले ही विमान लैंड कर चुका था, जिसके बाद एयरबेस में तुरंत इमरजेंसी कार्रवाई शुरू की गई, राहत और बचाव कार्य जारी है. इस हादसे में भारतीय वायु सेना के पांच जवानों की मौत हो गई है. को-पायलट बच गया है और उसका इलाज किया जा रहा है. भारतीय वायु सेना ने क्रैश की वजह का पता लगाने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश दिए हैं. #Assam #Jorhat #IAF #PlaneCrash
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क्या आपने कभी किसी भगवान को चप्पल पहनते हुए देखा है? ज़्यादातर लोगों का जवाब होगा — नहीं। क्योंकि भगवान कभी चप्पल नहीं पहनते। और इसके पीछे का कारण जानकर आप हैरान हो जाएंगे। हिंदू धर्म में माना जाता है कि पृथ्वी माता से सीधा स्पर्श होना अत्यंत पवित्र होता है। इसीलिए भगवानों को हमेशा नंगे पाँव दर्शाया गया है, ताकि धरती की ऊर्जा सीधे उन तक पहुँचे और वे पूरी सृष्टि से जुड़े रहें। नंगे पाँव रहना त्याग और वैराग्य का प्रतीक भी माना जाता है। इसी कारण शिवजी, रामजी और कृष्णजी — सभी को नंगे पाँव ही दिखाया गया है। यह तपस्या और सहनशीलता को भी दर्शाता है। नंगे पाँव चलने का अर्थ है — दुख-कष्ट को स्वीकार करना और हर परिस्थिति में स्थिर रहना। भगवान चप्पल नहीं पहनते क्योंकि वे धरती, जीवन और चेतना से बिना किसी रुकावट के सीधे जुड़े होते हैं। नंगे पाँव रहने से आपको क्या फायदे होते हैं? साफ़ सतह पर नंगे पाँव चलना सिर्फ़ धार्मिक ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य के लिए भी बहुत लाभकारी है: पैरों की मांसपेशियाँ मज़बूत होती हैं बैलेंस और पोस्चर बेहतर होता है रक्त संचार सुधरता है तनाव कम होता है (Earthing) एड़ी और पैरों के दर्द में राहत मिलती है बॉडी अवेयरनेस बढ़ती है और चलना अधिक प्राकृतिक होता है धूप से Vitamin D प्राप्त होता है आप क्या सोचते हैं—क्या आज के समय में हमें भी रोज़ कुछ देर नंगे पाँव चलना चाहिए? कमेंट में अपनी राय ज़रूर बताएं 👇🙏
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मिट्टी की गोद एक छोटे से गाँव में अर्जुन नाम का किसान रहता था। वह हमेशा कहता था -"इंसान चाहे कितना भी बड़ा क्यों न बन जाए, अंत में उसे मिट्टी में ही मिलना है।" अर्जुन ने पूरी जिंदगी मेहनत की, लोगों की मदद की और प्रकृति से प्यार किया। समय बीता... और एक दिन उसकी मृत्यु हो गई। गाँव वालों ने उसे उसी खेत के पास दफना दिया, जहाँ उसने पूरी जिंदगी पसीना बहाया था। पहले 3 दिन तक सब रोते रहे। 7 दिन बाद लोग अपनी जिंदगी में लौटने लगे। 30 दिन बाद शरीर बदलने लगा। 90 दिन बाद पहचान मिटने लगी। साल गुजरते गए... जिस शरीर पर कभी इंसान को घमंड था, वह धीरे-धीरे मिट्टी में बदलने लगा। हड्डियाँ भी टूटकर धरती में मिल गईं। लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई... उसी मिट्टी से नई घास उगी, पेड़ बड़े हुए, फसलें लहलहाईं, और जीवन फिर से जन्म लेने लगा। प्रकृति मानो धीरे से कह रही थी- "मृत्यु अंत नहीं, परिवर्तन है।" इसलिए इंसान को अपने रूप, पैसे और घमंड पर नहीं, अपने कर्मों पर गर्व करना चाहिए। क्योंकि अंत में शरीर मिट्टी में मिलता है, लेकिन अच्छे कर्म लोगों के दिलों में जीवित रहते हैं। ✍️🙏
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एक विशाल राज्य का राजा अत्यंत प्रतापी और धन-संपत्ति से सम्पन्न था। उसके पास विशाल सेना, भव्य महल और सुख-सुविधाओं की कोई कमी नहीं थी। उसकी सबसे बड़ी चिंता उसका इकलौता पुत्र था, जो रूपवान और साहसी तो था, लेकिन विद्या और बुद्धि में कमजोर था। वृद्धावस्था के निकट पहुँच चुके राजा को चिंता सताने लगी कि ऐसा पुत्र राज्य का भार कैसे संभालेगा। एक दिन राजा ने राजकुमार को शिक्षा प्राप्त करने की सलाह दी। यह बात राजकुमार के हृदय में लग गई। उसने निश्चय किया कि जब तक वह जीवन का अनुभव और ज्ञान प्राप्त नहीं कर लेगा, तब तक अपने राज्य में वापस नहीं लौटेगा। एक रात वह घोड़े पर सवार होकर राज्य छोड़कर निकल पड़ा। यात्रा करते हुए वह दूसरे राज्य पहुँचा और वहाँ के राजा से मिलकर स्वयं को एक राजपुत्र बताते हुए अनुभव प्राप्त करने के लिए नौकरी माँगी। राजा उसकी विनम्रता और तेजस्विता से प्रभावित हुआ और उसे द्वारपाल नियुक्त कर दिया। उस राज्य की राजकुमारी अत्यंत सुंदर थी। संयोग से उसकी दृष्टि राजकुमार पर पड़ी और दोनों एक-दूसरे को देखकर आकर्षित हो गए। परिचारिकाओं के माध्यम से राजकुमारी को पता चला कि वह वास्तव में एक राजपुत्र है। धीरे-धीरे दोनों के मन में प्रेम अंकुरित हो गया। लेकिन राजकुमार अपने पद और परिस्थितियों के कारण स्वयं को उसके योग्य नहीं समझता था। उधर राजा ने राजकुमारी के स्वयंवर की घोषणा कर दी। तभी एक विचित्र घटना घटी। जंगल के हाथियों ने आपस में निर्णय किया कि इतनी सुंदर राजकुमारी का विवाह हाथी-राज से होना चाहिए। एक योजना बनाकर उन्होंने तालाब में स्नान करने आई राजकुमारी का अपहरण कर लिया और उसे जंगल के एक विशाल बरगद के नीचे ले गए। जब यह समाचार राजमहल पहुँचा तो शोक की लहर दौड़ गई। राजकुमार भी व्याकुल हो उठा। उसने राजकुमारी को बचाने का संकल्प लिया और राजा से अनुमति लेकर जंगल की ओर निकल पड़ा। रास्ते में उसे एक विशाल साँप, एक भयंकर बाघ और एक राक्षस मिले। अपनी बुद्धिमानी और साहस से उसने तीनों को भयभीत कर दिया। प्राणों की भीख माँगते हुए उन्होंने उसे तीन अद्भुत वस्तुएँ दीं—साँप ने जल फैलाने वाली मणि, बाघ ने बाँस का जंगल उत्पन्न करने वाली बाँस-नली और राक्षस ने अग्नि फैलाने वाली मणि। उनसे उसे राजकुमारी का ठिकाना भी पता चल गया। आखिरकार वह बरगद के पेड़ तक पहुँच गया जहाँ हाथियों ने राजकुमारी को कैद कर रखा था। वहाँ उसने वनदुर्गा की आराधना की। देवी ने प्रसन्न होकर उसे वरदान दिया कि आधी रात को हाथी गहरी नींद में सो जाएँगे और उसे कोई देख नहीं सकेगा। रात होने पर राजकुमार ने राजकुमारी से भेंट की। दोनों ने अपने प्रेम का इज़हार किया और भागने की योजना बनाई। आधी रात को जब सारे हाथी सो गए, तब दोनों चुपचाप वहाँ से निकल गए। कुछ देर बाद हाथियों को पता चल गया और वे उनका पीछा करने लगे। तब राजकुमार ने पहले जल वाली मणि से चारों ओर पानी फैला दिया। हाथियों ने कठिनाई से उसे पार किया। फिर उसने बाँस की नली का प्रयोग किया, जिससे विशाल काँटेदार बाँस का जंगल खड़ा हो गया। हाथी उसे भी पार कर गए। अंत में राजकुमार ने अग्नि वाली मणि का प्रयोग किया। चारों ओर भयंकर आग फैल गई और हाथी आगे नहीं बढ़ सके। इस प्रकार राजकुमार सफलतापूर्वक राजकुमारी को लेकर राजमहल लौट आया। उसकी वीरता, बुद्धिमानी और निष्ठा देखकर राजा अत्यंत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह उससे कर दिया और राज्य का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया। बाद में राजा वानप्रस्थ को चले गए और राजकुमार अपनी प्रिय पत्नी के साथ न्यायपूर्वक राज्य का पालन करते हुए सुखपूर्वक जीवन बिताने लगा।.... ✍️🙏
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बड़े बुजुर्गो से कभी पंगे नही लेना चाहिए... एक बुजुर्ग ट्रेन में सफर कर रहा थे,संयोग से वह कोच खाली था। तभी 8-10 लड़के उस कोच में आये और बैठ कर मस्ती करने लगे। एक ने कहा - " चलो, जंजीर खीचते है.... दूसरे ने कहा - यहां लिखा है 500 रु जुर्माना ओर 6 माह की कैद तीसरे ने कहा - "इतने लोग है चंदा कर के 500 रु जमा कर देंगे... चन्दा इकट्ठा किया गया तो 500 की जगह 1200 जमा हो गए, जिसमे 200 के तीन नोट,2 नोट पचास के बांकी सब 100 के.... चंदा पहले लड़के के जेब मे रख दिया गया। तीसरे ने कहा, "जंजीर खीचते है, अगर कोई पूछता है,तो कह देंगे बूढ़े ने खीचा है। पैसे भी नही देने पड़ेंगे तब.... बुजुर्ग ने हाथ जोड़ के कहा,बेटे मैने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है,मुझे क्यो फंसा रहे हो ? लेकिन लङके नही माने।जंजीर खीची गई। टीटीई आया सिपाही के साथ, लड़कों ने कहा- "इस बूढे ने जंजीर खीची है। टीटी बूढ़े से बोला, "शर्म नही आती इस उम्र में ऐसी हरकत करते हुए ? बुजुर्ग हाथ जोड़ कर कहा, " साहब" मैंने जंजीर खींची है, लेकिन मेरी बहुत मजबूरी थी। टीटी ने पूछा, "क्या मजबूरी थी ? बूढ़े ने कहा, " मेरे पास केवल 1200 रु थे, जिसे इन लड़को ने छीन लिया और इस पहले लड़के ने अपनी जेब मे रखे है। जिसमे 200 के तीन नोट,2 नोट पचास के बांकी सब 100 के हैं.... अब टीटी ने सिपाही से कहा, "इसकी तलाशी लो" जैसा बुजुर्ग ने बताया वैसे ही नोट मिलाये गए लड़के के जेब से 1200 रुपये बरामद हुए, जिनको टी टी ने बुजुर्ग को वापस कर दिये गये और लड़कों को पुलिस के हवाले कर दिया..... पुलिस के साथ जाते हुए लड़को ने बुजुर्ग की ओर घूर के देखा तो बुजुर्ग ने कहा - बेटा, ये बाल यूँ ही सफेद नही हुए है !✍️🙏😏
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