Journalist, Columnist, 22 yr Exp, EX CFJ Fellow, Ex state head Swaraj Express, Rajasthan patrika, Dainik jagran, Nai Dunia, Hindustan, DNA

Joined November 2009
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रिटायर सैन्य अफसर बहुत हैं लेकिन मेजर जनरल जी डी बख़्शी जो इलाज इस बेशर्म , बेगैरत सरकार का कर रहे हैं कोई नहीं करता। जिस वक्त लाल आंख और ,56 इंची का सीना दिखाने की जरूरत थी देश का पीएम ठंडी मनाने फ्रांस चला गया। विदेश मंत्री ने ट्वीट करके अपने कर्तव्यों की इतिश्री कर ली। ऐसे थोड़े न चलेगा। सैल्यूट मेजर जनरल
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आपको लग रहा होगा कि फ्रांस में रहने वाले भारतीय पीएम मोदी का भव्य स्वागत कर रहे हैं। दरअसल यह जानकारी फिर से ले लीजिए इस यात्रा की तैयारी दो महीने से हो रही है। देश से 13 तारीख को शिक्षा विभाग के 200 अधिकारी बहुतों को लेकर फ्रांस के शहर नीस पहुंचे हैं। इन सबकी तैयारी के लिए भी एक दौरा हुआ था और कथित रोड शो हुआ था। शिक्षा मंत्रालय ने इस दौरे का नाम दिया है "इंडिया इनोवेट्स", देखिए इनोवेशन
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यह बदतमीज़ अमेरिकी विदेश मंत्री हमें धमका रहा है और हमारे विदेश मंत्री से कह रहा है कि जो हॉर्मूज में अमेरिकन ब्लॉकेड का उल्लंघन करेगा उसके खिलाफ अमेरिकी सेना सख्त कार्रवाई करेगी। मिस्टर रूबियो @marcorubio यह गलतफहमी दिमाग से निकाल दो कि भारत सरकार का मतलब भारत है। भारत का मतलब 150 करोड़ की जनसंख्या है। अगर ऊपर चढ़ गई तो सांस नहीं निकलेगी। वो तो हम सब थोड़े मजबूर है नहीं तो जो तुमने हमारे तीन निर्दोष नागरिकों को मारा है और अब धमका रहे हो अमेरिका को उसकी कीमत जरूर चुकानी पड़ती।
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जुलूस निकल रहा है विदेश नीति का। नंगे हो रहे हैं हम सब। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने जो कहा है वो राष्ट्रीय शर्म का विषय होना चाहिए मगर अफ़सोस कुर्सी कुर्सी कुर्सी करते हुए पगलाई भाजपा सरकार से एक करारा जवाब देते नहीं बन रहा। पवन जी @Pawankhera को पढ़िए और उनके शब्दों में छिपे क्रोध को भी। "अमेरिकी सैन्य हमले में तीन युवा भारतीय नाविकों की हत्या के लिए माफ़ी की मांग करनी चाहिए थी – और यह मांग बिना शर्त के स्वीकार भी होनी चाहिए थी। इसके बजाय, सेक्रेटरी रुबियो ने एक चेतावनी देना उचित समझा और कहा कि अमेरिकी सेना के आदेशों का पालन न करना "बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।" यह पश्चाताप की नहीं, हुक्म चलाने की भाषा है। न जान गंवाने वालों के प्रति कोई संवेदना व्यक्त की गई, न ज़िम्मेदारी स्वीकार की गई, और न ही कोई माफ़ी मांगी गई। इस पूरे प्रकरण को और भी शर्मनाक नई दिल्ली की प्रतिक्रिया ने बना दिया। हमले को उसके असली रूप में प्रस्तुत करने के बजाय, विदेश मंत्री ने सिर्फ इतना कहा कि व्यावसायिक जहाज़ों के ख़िलाफ़ जानलेवा कार्रवाइयाँ "न्यायोचित नहीं हैं।" "न्यायोचित नहीं हैं"? यह आप किसी हवाई अड्डे पर हद से ज़्यादा महंगे सैंडविच के लिए कहते हैं, न कि उस सैन्य हमले के लिए जो निर्दोष नागरिकों की जान ले लेता है। अमेरिका की कार्रवाई के लिए सही शब्द हैं: ग़ैर-क़ानूनी, लापरवाह और अस्वीकार्य। लेकिन इसके बजाय हमें ऐसी सावधानी से गढ़ी गई साफ़-सुथरी शब्दावली सुनने को मिली जो किसी को नाराज़ नहीं करती — सिवाय उन परिवारों के जिन्होंने अपने प्यारों को खो दिया"
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राहुल गांधी जो अब तक कहते आए हैं वही बात बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी कह रहे हैं।यह बात ऐसे ही कहे जाने की जरूरत है जो वाम दलों के अलावा न तो ममता दीदी कह रही हैं न अखिलेश यादव न उद्धव ठाकरे। ओवैसी कह रहे हैं कि दुनिया में मौजूदा वक्त की आर्थिक बदहाली के जिम्मेदार नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप हैं। लेकिन ओवैसी को एक बात और जोड़नी चाहिए कि भारत में जो हो रहा है उसके लिए पहले मोदी जिम्मेदार हैं उसके बाद ट्रंप और नेतन्याहू क्योंकि मोदी दोस्ती निभाकर कुर्सी बचा रहे हैं।
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यूपी सरकार को भी अब लगने लगा है कि राम मंदिर के चढ़ावे में गड़बड़ी तो हुई है। भारी दबाव के बाद अब SIT का गठन कर दिया गया है। जो यह बताता है मामला गंभीर है। यूपी सरकार ने लखनऊ की आईजी किरण एस, IAS विजय विश्वास पंत और स्पेशल फाइनेंस सेक्रेटरी की तीन सदस्यीय कमेटी बनाई गई है। देखना यह है कि यह कमेटी सच को सामने लाती है या फिर केवल फर्ज अदायगी। यह तो तय है कि राम मंदिर के चंदे में भ्रष्टाचार तो हुआ है।
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विहिप के चंपत राय का चेला टुन्नू यादव जो ड्राइवरी करता था पांच साल में करोड़पति हो गया। जो घर बनवाया है उसमें लिफ्ट लगवाया है। आरएसएस और बीजेपी की लूट की ग़ज़ब कहानी बता रहा है यह भगवाधारी।
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गिरिराज जी "भूमिहार झटका मटन क्लब" का अध्यक्ष बनकर बकरा का युद्ध कराना चाहते हैं। इनके बारे में सुनना है तो कीर्ति आजाद से सुनिए।
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पत्रकार साथी और सांसद संजय राउत @rautsanjay61 ने मोदी की तुलना औरंगजेब जी से कर दी है। लेकिन संजय भाई को जानकारी दे दें कि कृष्ण उपासक औरंगजेब आतताई नहीं था। इसके बारे में कई अफवाहें हैं। मोदी जी तो अवतरित हुए हैं। कम लोग जानते हैं कि चित्रकूट के बालाजी मंदिर का निर्माण मुगल शासक औरंगज़ेब ने करवाया था और वहां के पुजारी महंत बालक दास के नाम एक फरमान जारी किया। इस फरमान के तहत मंदिर को औरंगज़ेब का शाही संरक्षण मिला।रख-रखाव के लिए पास के आठ गांव मंदिर की जागीर में लिख दिए गए, जहां से महंत लगान ले सकते थे। बकौल हिंदुस्तान टाइम्स ये गांव आज के इलाहाबाद ज़िले के हमुठा, चित्रकूट, रोदरा, सरया, मदरी, जारवा और दोहरिया हैं. फरमान के हिसाब से मंदिर को 330 बीघे ज़मीन हमेशा के लिए लिए मिल गई, वो भी टैक्स फ्री।
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मैंने क्या कहा था? कल्याण बनर्जी अभिषेक, ममता दीदी को लेकर कुछ भी बोलें न पार्टी छोड़ेंगे न ममता दीदी को। कल्याण साफ कह रहें कि अभिषेक मेरे बच्चे की तरह है। पिता का काम है हर हाल में बच्चों को माफ करना। कल्याण बनर्जी भाजपा के खिलाफ लड़ाई के लिए प्रतिबद्ध हैं।
कल्याण बनर्जी अपनी पार्टी पर चाहे जितना भी हमला बोलें, बीजेपी में शामिल नहीं होंगे। नहीं होंगे तो नहीं होंगे। उनकी अभिषेक बनर्जी से नाराजगी को ममता दीदी या टीएमसी से नाराजगी नहीं माना जाना चाहिए। तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने गुरुवार को अभिषेक बनर्जी पर तीखा हमला करते हुए आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के भतीजे ने हस्ताक्षर जालसाजी मामले और उससे जुड़े सीआईडी ​​तलाशी अभियान मामले में अंतिम समय में उन्हें अपने वकील के रूप में हटा दिया, जिसे उन्होंने अपमानजनक कृत्य बताया। हाल के दिनों में कई विधायकों के ममता का साथ छोड़ने के बावजूद, कल्याण ममता के साथ खड़े रहे और उन्होंने टीएमसी प्रमुख को अल्टीमेटम देते हुए कहा, "हमें चुनो या अभिषेक को।"
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भगवान राम ने भी नहीं सोचा होगा कि कलयुग में कुछ लोग उनके नाम पर सरकार खड़ी कर लेंगे। फिर उन्हीं के नाम पर चंदा बटोरकर फिर उसमें भी भ्रष्टाचार करके गच्च गुरु हो जायेंगे। फिर रामनवमी पर मस्जिद के सामने नाच कर कहेंगे "हिंदुत्व खतरे में हैं जबकि असल में चंदा खतरे में हैं।" आदरणीय तुलसीदास जी कह गए हैं- "कलि कुचाल सब कीन्ह कुकाजू। सूझ न बिधि न निषेध न लाजू॥" अर्थात भ्रष्ट लोगों को न तो सही-गलत का ज्ञान रहता है और न ही लोक-लाज की परवाह होती है।
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यह ख़बर गजब है। जिस मामले को लेकर मीनाक्षी नटराजन को राज्यसभा चुनाव लड़ने से वंचित कर दिया गया कोर्ट ने उस मामले को सुनवाई के योग्य न मानकर वापस कर दिया है। गजब की बेशर्मी दिखाई है बीजेपी ने। सुनिए साथी आदित्य सिंह को
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अभी कल्याण बनर्जी से बात हुई है पूरे जोश में हैं और नफरती बिग्रेड के खिलाफ जोर शोर से लड़ने को तैयार खड़े हैं। ममता दीदी को भी अपने लोगों के मान सम्मान का ध्यान रखना होगा। भाजपा भयभीत है और बेवजह की छापेमारी कर उस भय को प्रदर्शित कर रही है।
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कभी ये साहब जो ग्रे कलर का सफारी पहने खड़े हैं कांग्रेस में हुआ करते थे। इनका नाम है अजय कपूर। दो बार विधायक बने फिर कांग्रेस ने इन्हें राष्ट्रीय सचिव बनाकर बिहार का प्रभारी बना दिया। इनका कद ऐसा था कि कानपुर तो छोड़िये उत्तर प्रदेश के तमाम दिग्गज कांग्रेसी इन्हें बहुत सम्मान देते थे। लेकिन अकड़ ऐसी थी कि कानपुर कांग्रेस के किसी कार्यक्रम में आना अपनी तौहीन समझते थे और कानपुर के तीन बार सांसद रहे केंद्रीय मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल को हराने के लिये एडी चोटी का जोर लगाते रहते थे। नगर निगम के चुनावों में कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशियों के खिलाफ अपने प्रत्याशी खड़े कर देते थे फिर कांग्रेस इन्हें ढो रही थी। फिर एक दिन ये भाजपा में शामिल हो गये। उसके बाद से इनकी अकड़ और इनका कद दोनों ही नेस्तनाबूद हो गये। अब ये भाजपा के विधायक के साथ गाड़ी के शोरूम जाकर उसकी खरीदी गाड़ी को खुद चलाकर उसके घर लाते हैं। भाजपा के वार्ड स्तर तक के कार्यक्रम से समय से पहले पहुंचकर व्यवस्था करवाते हैं। भाजपा के हर छोटे बड़े नेता कार्यकर्ता को झोला भर भरकर सलाम ठोंकते हैं। फिर इस बात की सौ प्रतिशत संभावना है कि इन्हें किसी भी विधानसभा से टिकट नहीं देगी भाजपा। कहां वो समय था कि ये खुद टिकट तय किया करते थे।आज इनकी हैसियत नहीं है कि वर्तमान भाजपा सांसद के खिलाफ एक शब्द बोल सकें जैसे श्रीप्रकाश जायसवाल जी के खिलाफ बोला करते थे। वक्त का पहिया ऐसे ही चलता है जिसके सामने हाथ जोड़े लोग खड़े रहते थे वो आज भाजपाईयों के सामने हाथ जोड़े चेहरे पर जबरदस्ती वाली मुस्कान लिये खड़ा रहता है। समझ में नहीं आ रहा है कि मोहन भागवत किसी के बेबसी पर क्यों हंस रहे हैं। -हमारा धवल
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राहुल कहते हैं कि सपा, राजद और तृणमूल कांग्रेस सोचते हैं कि चुनाव जीतने के लिए जो औजार अब तक काम आते रहे हैं आगे भी करेंगे। बिल्कुल ठीक कहते हैं। सपा जातीय कैलकुलेशन से चुनाव लड़ रही है यही गलती राजद ने की थी जबकि पैरों के नीचे की पूरी जमीन SIR और फिर हिंदुत्व की आंधी उड़ा कर ले गयी है। प्रतिरोध के अलावा और कोई रास्ता नहीं है वापस उस जमीन को हासिल करने का। लेकिन नहीं, अखिलेश को लग रहा है जीत चल कर आएगी और उनका वरण करेगी। टीएमसी को भी लग रहा था। ग्राउंड की स्थिति देखिए यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोंडा और देवरिया सहित विभिन्न सरकारी व संगठनात्मक कार्यक्रमों, समीक्षा बैठकों और जनसभाओं में शामिल हुए हैं। वहीं, अखिलेश यादव मुख्य रूप से लखनऊ में प्रेस कॉन्फ्रेंस, पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ संगठनात्मक बैठकों से जुड़े कार्यक्रमों तक सीमित हैं।
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मैं DMK की गारंटी ले सकता हूं कि आइडिया ऑफ इंडिया की रक्षा के लिए उस पार्टी का हर कोई हमारे साथ खड़ा होगा। -राहुल गांधी
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हाल में हुई इंडिया गठबंधन की बैठक में राहुल गाँधी ने एक अद्भुत भाषण दिया। राहुल सिर्फ राहुल जानते हैं कि आइडिया ऑफ इंडिया क्या है और उसे RSS, बीजेपी और मोदी चोटिल कैसे कर रहे हैं। यह भाषण ऐतिहासिक है। कल मध्य प्रदेश में एक गरीब मजदूर को उसकी पत्नी के सामने पीटते देख यह भाषण मैंने बार बार पढ़ा। आप भी पढ़िए-- "मैं आज यहां आये सभी लोगों का स्वागत करता हूंँ। आने के लिए धन्यवाद। कई साल पहले मेरे एक बहुत अच्छे दोस्त से बहस हुई थी। मैंने उससे कहा, "जो तुम कर रहे हो वो बिल्कुल अनफेयर है।" उसका जवाब था — "दुनिया अनफेयर है। अब इसकी आदत डाल लो।" आज यहां कांग्रेस पार्टी के बारे में जो कुछ भी कहा गया, उसका जवाब देना मेरा काम नहीं है। मेरा काम शिव परंपरा को अपनाना है — सब कुछ निगल जाना। नीले कंठ वाले शिव की तरह, जो सारा जहर पी जाते हैं। आप चाहे जितना कहें, मुझ पर या कांग्रेस पर जितनी भी आलोचना करनी हो, हम उसे खुशी-खुशी स्वीकार करेंगे। हम आपको खुश करने की कोशिश करेंगे, क्योंकि हमारी भूमिका आपकी भूमिका से बुनियादी तौर पर अलग है। और यह मैं अहंकार से नहीं कह रहा हूं। मेरी भूमिका आप सबको प्यार और स्नेह से जोड़ने की है। मैं 2004 से कांग्रेस पार्टी का सांसद हूं, जब मैंने अपना पहली चुनाव लड़ा था। हमारी पार्टी भारत की दूसरी सभी पार्टियों से बुनियादी तौर पर अलग तरीके से संगठित है। और मैं यह विनम्रता से कह रहा हूं। क्यों? क्योंकि यह पार्टी एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में शुरू हुई थी, जब आधुनिक भारत अस्तित्व में भी नहीं था। अन्य सभी पार्टियों के विपरीत, इसे भारतीय राज्य की इंफ्रास्ट्रक्चर और सुरक्षा पर खड़ा नहीं किया गया था। कांग्रेस पार्टी एक प्रतिरोध आंदोलन है, जो इस विचार की रक्षा करती है कि सभी भारतीय बराबर हैं। हम RSS की सोच के बिल्कुल खिलाफ हैं। हम मर जाएंगे, कांग्रेस पार्टी में मर जाएंगे, लेकिन BJP या RSS के साथ कभी समझौता नहीं करेंगे। इसके लिए हमें हमारे सिर काटने पड़ेंगे। मुझे पता है कि इस देश में लाखों-लाखों कांग्रेस कार्यकर्ता हैं जो कहेंगे — "हमारे सिर काट दो, हम RSS के सामने झुकेंगे नहीं।" मुझे अफसोस है कि इस समूह में कुछ भ्रम है। भ्रम यह है कि आप — SP, TMC, RJD — यह मानते हैं कि अब तक जो राजनीतिक औजार आप इस्तेमाल करते आए हैं, वे आगे भी काम करेंगे। दरअसल वे तभी काम करते थे जब देश का सिस्टम उन्हें निष्पक्ष मैदान उपलब्ध कराता था। वो मैदान अब नहीं बचा है। BJP देश के संस्थानों पर कब्जा कर चुकी है। BJP कानूनी व्यवस्था को कंट्रोल करती है। BJP नौकरशाही को कंट्रोल करती है। खुफिया एजेंसियों को कंट्रोल करती है। BJP चुनाव आयोग को भी कंट्रोल करती है। मेरे TMC में कई दोस्त हैं। वे मानते थे कि बंगाल में वे चुनाव जीत रहे हैं। मैं उन्हें बार-बार कहता रहा — तुम सपनों की दुनिया में हो। मैंने गुजरात में देखा है, मध्य प्रदेश में देखा है, छत्तीसगढ़ में देखा है, हरियाणा और महाराष्ट्र में देखा है। फिर भी आपमें से कई अभी भी आश्वस्त नहीं हैं। कांग्रेस पार्टी प्रतिरोध की पार्टी है। इसे भारतीय राज्य की तटस्थता की जरूरत नहीं है। बल्कि, जितना ज्यादा भारतीय राज्य के संस्थान दबाए जाएंगे, कब्जाए जाएंगे, कांग्रेस पार्टी उतनी ही आक्रामकता से भारत के संविधान की रक्षा के लिए लड़ेगी। हम सभी कांग्रेस पार्टी के आदर्शों को साझा करते हैं। वे आदर्श क्या हैं? सत्य, अहिंसा और करुणा। मुख्य मुद्दा क्या है? मुझे आपसे लड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं है। मुझे पागल होना पड़ेगा कि अचानक उठकर कहूं — "मैं तुमसे लड़ूंगा क्योंकि तुम हमारे सहयोगी हो, हमारे दोस्त हो, हम जिनसे प्यार करते हैं। कृपया समझिए, हमने 2024 का चुनाव जीता था। हमने हारा नहीं था। आप पूछते हैं कि नीतीश जी क्यों चले गये? वह मेरी वजह से नहीं, कांग्रेस की वजह से नहीं गये। और मैं आपको बताता हूं कि निकट भविष्य में वे कुछ औजार भी काम करना बंद कर देंगे, क्योंकि BJP और RSS भारतीय राज्य पर अपनी पकड़ और मजबूत कर रहे हैं। कांग्रेस पार्टी ने 100 साल से ज्यादा पहले यही फैसला लिया था। 1927 से पहले हम एक राजनीतिक संगठन थे। गांधी जी ने जब स्वराज की मांग की, हम प्रतिरोध आंदोलन बन गए। अगर राजनीतिक पार्टियां काम नहीं कर सकतीं, तो क्या काम कर सकता है? प्रतिरोध काम करता है। Resistance works। जहां हम प्रतिरोध करते हैं, वहां काम करता है। मैंने अपनी आंखों से देखा है। मैंने इस देश में 4000 किलोमीटर पैदल चला है। Resistance works।आपको राजनीतिक आर्किटेक्चर की जरूरत नहीं। नौकरशाही की जरूरत नहीं। खुफिया एजेंसियों की जरूरत नहीं। आपको सिर्फ प्रतिरोध आगे.....
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यह एक भावना है, संगठन नहीं। यह सोचने का तरीका है। और चाहे हम पसंद करें या नहीं, हमें वहीं जाना होगा। माइंडसेट बदलना होगा। माइंडसेट अब यह होना चाहिए कि हम एक-दूसरे से नहीं लड़ेंगे। हम प्रेस को हम पर हमला करने का मौका नहीं देंगे। हम प्रतिरोध करेंगे। आप सोच रहे हैं कि चुनौती अगला चुनाव जीतने की है। अगला चुनाव तो पहले ही जीत लिया गया है। कृपया समझिए, भारत की जनता में इतना गुस्सा है कि अगला चुनाव पहले ही खत्म हो चुका है। समस्या RSS द्वारा भारतीय राज्य के औजारों पर कब्जा है। समस्या यह है कि आपको जीतने के लिए निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव नहीं मिलेगा। इसलिए हमें प्रतिरोध मोड में जाना होगा। Resistance works। Resistance CBSE है। Resistance NEET है। Resistance पदयात्रा है। सुबह उठकर पूछो — मैं आज प्रतिरोध कैसे करूं? और प्रतिरोध करो। मैं आपको गारंटी देता हूंँ, यह काम करेगा। मेरी नजर में, किसी भी तरफ से कोई भी आलोचना मैं खुशी से झेलने को तैयार हूं, क्योंकि मेरे लिए यह धार्मिक कर्तव्य है, आध्यात्मिक कर्तव्य है। यह अब राजनीति नहीं रही। इसलिए मैं आपको वादा करता हूं कि इस समूह को जोड़ने और सफल बनाने के लिए जितना भी अपमान सहने पड़ेंगे, मैं सहूंगा। आगे कैसे बढ़ें, यह बहुत सरल है। हमें एक खास विचार से दूर होना होगा। ममता दी 100% तो नहीं, लेकिन 90% यकीन से कहती हैं कि उनका चुनाव चुराया गया। उद्धव जी 40% यकीन रखते हैं। मेरे भाई तेजस्वी 40%... सुनिए, 100% यकीन रखिए — चुनाव चुराये जा रहे हैं। अपने मन से सारे संदेह हटा दीजिए। समझिए कि सोशल मीडिया पर उपस्थिति बनाने में सालों लगते हैं। यह एक हफ्ते में ऑर्गेनिक नहीं होता। मेरे 1 करोड़ YouTube फॉलोअर्स हैं, लेकिन मेरा अकाउंट पूरी तरह दबाया गया है। अगर आप यह सोच रहे हैं कि सोशल मीडिया निष्पक्ष है और विपक्ष को सपोर्ट मिल रहा है, तो आप दूसरी दुनिया में जी रहे हैं। पूरा आर्किटेक्चर — मीडिया, सोशल मीडिया, कानूनी व्यवस्था, नौकरशाही, खुफिया एजेंसियां — सब इस सरकार को सत्ता में बनाए रखने के लिए संरेखित हैं। लेकिन यह सरकार टिक नहीं पाएगी। यह टिक नहीं पाएगी क्योंकि इसने हमारे लोकतंत्र को नष्ट कर दिया है। इसने भारतीय लोगों के भविष्य को नष्ट कर दिया है। अब जो आने वाला है (ईरान के बाद), वह अनियंत्रित है। और यह हमें जनता को संगठित करने का अवसर देगा। यह भी समझ लीजिए कि हम समन्वित नहीं हैं, साथ नहीं काम करते — ये सब BJP और उनके मीडिया दोस्त फैला रहे हैं। यह सच नहीं है। मैं DMK की गारंटी ले सकता हूंँ कि भारत के विचार की रक्षा में हर कोई इस कमरे में खड़ा होगा। हमारे बीच झगड़े हैं, लेकिन अगर आप मुझसे कहें कि मैं केरल के पूर्व मुख्यमंत्री को गले लगाऊं, तो मैं नहीं कर सकता और नहीं करूंगा, क्योंकि मेरी उनसे राजनीतिक लड़ाई चल रही है। हमें लचीला होना होगा और समझना होगा कि हम पर पूरा हमला है — यह साबित करने के लिए कि विपक्ष कमजोर है, disorganized है। अंत में, मुझे लगता है कि हमारी चर्चाओं में अक्सर उदासी छाई रहती है। लोग सोचते हैं — "ओह भगवान, हम BJP को कभी हरा पाएंगे?" मैं आपको बताता हूं, अगर हम साथ खड़े होकर प्रतिरोध करें तो उन्हें हराना आसान है। पिछले चुनाव में इस कमरे में मेरे अलावा किसी को यकीन नहीं था कि हम BJP को हरा सकते हैं। अब इस कमरे में हर कोई यह विश्वास करना शुरू करे कि हम उन्हें हरा देंगे।इस विश्वास से शुरू कीजिए, और मैं गारंटी देता हूं — राज्य दर राज्य, चुनाव दर चुनाव, चाहे वे धांधली करें या न करें, वे गिरेंगे।" ( यह भाषण अंग्रेज़ी में दिया गया जिसका अनुवाद Saurabh Yadav ने किया है। इस ज़रूरी काम के लिए उनकी जितनी प्रशंसा की जाये कम है।
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मध्य प्रदेश सरकार केवल राज्यसभा सीट जीतने के लिए जुगाड़बंदी कर रही है। प्रदेश की कानून व्यवस्था भगवान भरोसे हैं।इस औरत की आवाज से कलेजा कांप रहा है या नहीं @CMMadhyaPradesh , मेरा तो कलेजा फट रहा है। मुझे मनुष्य होने पर शर्म आ रही है। सतना के नागौद बस स्टैंड के पास मजदूर से मारपीट का यह वीडियो है। मजदूर की पत्नी छोड़ देने की मिन्नते कर रही है। गरीबों, मजलूमों के लिए अपराध प्रदेश में बदलते जा रहे एमपी में पुलिस सो रही है क्या? अगर थोड़ी सी भी संवेदना शेष है तो जो मार रहा है उसका कल जुलूस निकाल कर दिखाइयेगा। यह वीडियो में पिछले कई घंटों से अलग अलग जगहों पर देख रहा हूं और मर रहा हूं। यह मुर्दों का देश, कोई बचा लो न इसको
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