अदानी सेठ जब लाखों पेड़ काट कर बदले में नर्सरी के पौधे लगा दोगे तो पुन उन जंगल को विकसित होने में कितना समय लगेगा ये अगली पीढ़ी ही देख पाएगी। इस पीढ़ी के लोग तो प्रकोप झेल नहीं पावेंगे।
सोचिए सोनभद्र के घने जंगल में 100 साल पुराने पेड़ हैं, वे 2 लाख पौधे 100 साल में भी वो ऑक्सीजन नहीं दे पाएंगे, जिन्हें अदानी चाचा रोपेंगे।
सबसे दुखदायी मंजर ये है कि कैमूर वन्यजीव अभयारण्य के पास जानवरों का घर उजड़ेगा, जमीन का पानी सूखेगा, आदिवासी विस्थापित होंगे। इसकी भरपायी कैसे होगी?
ये विकास नहीं, विनाश है। बिजली के लिए जंगल बेच दोगे, तो अगली पीढ़ी सांस किससे लेगी?
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