Bihari! Simple, ordinary, and rural life is my favorite. Literature-Culture | Spiritual | Photography | Songs-Ghazals | Nature | Reader | Writing...

Joined June 2018
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यह फूल आप सभी मित्रों के लिए है। मुझे समझने के लिए प्यार सम्मान और किताबें भेजने के लिए। मुझे आपके किताब का हमेशा इंतजार रहता है... मैं इधर एक वक़्त काफ़ी अकेला था, पर अब नहीं। आप सभी का बहुत-बहुत आभार। 🥹❤️ 🙏 हो सके तो विनम्र रहिए! सरल बनिए और सुंदर जीवन जीने का कोशिश कीजिए।
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कुछ तो है.. जो जोड़ता है, घरों को, लोगों को.. कुछ डोरें हैं, बहुत नाज़ुक-सी, एक दूसरे से अलग तो दिखती हैं, मगर ख़ुद में उलझी रहती हैं.. क्या मैं कभी इन डोरों को सुलझा पाउँगा? क्या मैं कभी ख़ुद की डोर को किसी से जोड़ पाउँगा? क्या मैं कभी किसी को घर कह पाउँगा? - कर्ण
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किसी को इश्क़ में भी अब जुनूँ से वास्ता नहीं ये क्या हुआ कि सारे दिल दिमाग़ बन के रह गए - आलम ख़ुर्शीद
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इस दुनिया में लोग इतनी चालाकी से काम करते हैं अपने घरों, समाज, ईश्वर की भक्ति और प्रेम में धोखा देते हैं मानो उन्हें कभी अपने कामों का नतीजा भुगतना ही न पड़े। याद रखें, जब समय का पहिया आपकी ओर घूमेगा, तो दुःख के आँसू ज़रूर बहेंगे। - @chastemonk
जब सृष्टि अभी उतनी शोर से भरी नहीं हुई थी जितनी आज दिखाई देती है, तब हिमगिरि के पार, सप्तसिंधुओं के मध्य और देवमार्गों की छाया में एक राज्य था रत्नपुरी। वह राज्य अपनी संपत्ति, वैभव और चमत्कारों के लिए नहीं, बल्कि अपने धर्म के लिए प्रसिद्ध था। कहा जाता था कि वहाँ किसी मनुष्य के घर का ताला टूट जाए तो पूरा नगर उसकी वस्तु खोजने निकल पड़ता था। किसी की गाय खो जाए तो राजा स्वयं उसकी खोज का आदेश देता था। सत्य वहाँ केवल उपदेश नहीं था, जीवन का आधार था। उस राज्य के मध्य एक प्राचीन मंदिर था। मंदिर में किसी स्वर्णमूर्ति की नहीं, बल्कि एक दिव्य शिला की पूजा होती थी। उस शिला को "सत्यप्रभा" कहा जाता था। मान्यता थी कि स्वयं ईश्वर ने उसे धरती पर स्थापित किया था, उसके सामने झूठ बोलना असंभव था। जो झूठ बोलता, उसकी वाणी लड़खड़ा जाती, जो छल करता, उसका मन अशांत हो जाता। वर्षों तक सब कुछ शांत रहा। लेकिन समय के साथ एक व्यक्ति के मन में लालच का बीज अंकुरित हुआ। उसका नाम था शंखधर। बाहर से वह धर्मात्मा प्रतीत होता था। माथे पर तिलक, हाथ में माला, मुख पर मधुर वचन। लोग उसे आदर देते थे परंतु भीतर उसका मन लोभ से भरा था। एक दिन उसने देखा कि मंदिर में आने वाले श्रद्धालु बहुमूल्य रत्न, स्वर्ण और दान अर्पित करते हैं। उसके मन में विचार आया "ईश्वर को इन वस्तुओं की क्या आवश्यकता? यदि मैं इनमें से थोड़ा सा ले लूँ तो कौन देखेगा?" यही वह क्षण था जब उसका पतन प्रारंभ हुआ। पहली बार उसने एक छोटा रत्न चुराया। कोई नहीं जान पाया। उसका साहस बढ़ा। फिर उसने कई स्वर्ण मुद्राएँ गायब कर दीं, धीरे-धीरे चोरी उसका स्वभाव बन गई। परंतु केवल चोरी ही नहीं, उसने उससे भी बड़ा अपराध किया। वह लोगों को धर्म का उपदेश देता और पीछे से उनके दान में हेराफेरी करता। गरीबों के लिए आए अन्न को बेच देता, विधवाओं के लिए आए वस्त्र अपने व्यापारियों को दे देता। वह सोचता था कि उसने सबको धोखा दे दिया है। एक रात पूर्णिमा थी। आकाश में चंद्रमा दूधिया प्रकाश बिखेर रहा था, मंदिर के गर्भगृह में गहन शांति थी, शंखधर अकेला भीतर गया। उस दिन उसकी दृष्टि सत्यप्रभा शिला के नीचे जड़े एक अद्भुत मणि पर पड़ी। कहा जाता था कि वह मणि देवताओं के यज्ञ से उत्पन्न हुई थी। उसके मन ने कहा "यदि यह मिल जाए तो मैं संसार का सबसे धनी मनुष्य बन जाऊँगा।" उसने चारों ओर देखा, कोई नहीं था, वह हँसा। "ईश्वर भी कितने सरल हैं, इतने वर्षों से सब कुछ सामने रख छोड़ा है।" उसने जैसे ही मणि को छूने के लिए हाथ बढ़ाया, मंदिर के दीपक एक-एक करके बुझने लगे। अचानक गर्भगृह में अंधकार छा गया, फिर उस अंधकार के भीतर एक प्रकाश प्रकट हुआ। न सूर्य जैसा, न अग्नि जैसा। वह प्रकाश ऐसा था जिसे देखकर आँखें बंद नहीं होतीं, बल्कि मन झुक जाता है। शंखधर का शरीर काँप उठा। प्रकाश के मध्य एक स्वर गूँजा "मनुष्यों को धोखा देना सरल है। स्वयं को धोखा देना भी संभव है। पर क्या तुमने सोचा कि ईश्वर को भी छल सकते हो?" शंखधर भयभीत हो गया। उसने भागने का प्रयास किया पर उसके चरण जैसे भूमि से चिपक गए। स्वर पुनः गूँजा "तुमने सोचा था कि कोई देख नहीं रहा, पर कर्मों का लेखा रखने के लिए आँखों की आवश्यकता नहीं होती।" तभी उसके सामने दृश्य प्रकट होने लगे। उसने देखा वह वृद्धा, जिसका अन्न उसने चुराया था, वह अनाथ बालक, जिसकी सहायता का धन उसने हड़प लिया था, वह किसान, जिसने अपनी अंतिम मुद्रा मंदिर में चढ़ाई थी, सभी दृश्य उसके सामने जीवित हो उठे। हर आह, हर आँसू, हर पीड़ा। जो दर्द उसने दूसरों को दिया था, वही अब उसके भीतर उतरने लगा। कहते हैं उस रात उसे कोई बाहरी दंड नहीं मिला। न बिजली गिरी न शाप मिला बल्कि उससे कहीं कठोर दंड मिला। उसे हर उस व्यक्ति का दुःख स्वयं अनुभव करना पड़ा जिसे उसने छल से पीड़ा पहुँचाई थी। वृद्धा की भूख उसके पेट में जलने लगी, अनाथ का अकेलापन उसके हृदय में उतर आया, किसान की निराशा उसकी साँसों में भर गई। वह चीखने लगा, गिड़गिड़ाने लगा, पर कर्मों का दर्पण एक बार खुल जाए तो उससे मुँह नहीं मोड़ा जा सकता। सात दिन और सात रातें वह उसी अवस्था में पड़ा रहा। जब मंदिर के पुजारियों ने उसे पाया तो उसके बाल श्वेत हो चुके थे। आँखों की चमक बुझ चुकी थी। वह बार-बार केवल एक ही वाक्य कह रहा था "ईश्वर से मत छिपो...ईश्वर से मत छिपो..." उसने अपना समस्त धन लौटा दिया, संपूर्ण जीवन प्रायश्चित्त में बिताया परंतु उसके जीवन की सबसे बड़ी शिक्षा धन लौटाना नहीं थी। वह ये थी कि ईश्वर को सोने-चाँदी की चोरी से उतना दुःख नहीं होता जितना मनुष्य के छल से होता है। क्योंकि स्वर्ण तो फिर मिल सकता है, पर विश्वास टूट जाए तो उसे जोड़ना कठिन होता है। १/२
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तेरी साँस की लय पर धड़कने लगी है मेरी धड़कन, तेरे नाम के बिना अब अधूरा लगता है ये तन-मन। - @RadhaSwara
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… इस दुनिया में जो खो गया हो उसे ढूँढा जा सकता हैं ; जो खुद ही अपनी मर्ज़ी से दूर हो गया हो उसे कोई कैसे ढूँढे ! - @_Kohraa_ 📍 Ahmedabad
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मुझे पूरी जिंदगी लगा मैं चाहता था दूर हर किसी से बस खो जाना तुमसे मिलकर मालूम हुआ कि मैं बस चाहता था ढूंढ लिया जाना। - @Kitabganj1
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चाहे ईश्वर की आराधना हो या किसी से किया गया प्रेम, यदि उसमें पवित्रता और गहराई है, तो वह कभी अधूरा नहीं रहता। श्रद्धा और स्नेह जब सच्चे मन से अर्पित किए जाएँ, तो वो सीधे आत्मा को छू लेते हैं। - @chastemonk
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उदास शहरों में थोड़ी उम्मीद रहे प्रेम आयेगा बचाने सबको ये अफवाह कम-से-कम गर्म रहे।। @Kitabganj1
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बस इंतज़ार करो!! 🌻🤍
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कहीं नहीं तो कविताओं में ही सही- कुछ असंभव पर घटता रहे।। - @Kitabganj1
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Waseem Barelvi
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तेरी हँसी के किनारे पे निशान छोड़ जाऊँ, तेरी साँसों में उतर कर कहानी बन जाऊँ। साँस थम जाए तो भी तुझे यूँ ही पढ़ते रहूँ, तेरे एक स्पर्श से फिर से मुकम्मल हो जाऊँ। - @RadhaSwara
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महसूस तो कर तू मेरी ख़ामोशी को भी, लफ्ज़ों की मोहताज नहीं होती मोहब्बत। - @RadhaSwara
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Waseem Barelvi
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हमारी कहानी लिखी हुई है।
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Dr. Bashir Badr
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जिन्हें कोई ढूंढने न आएगा ऐसे लोगों को खोया हुआ भला कौन ही मानेगा। - @Kitabganj1
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तुम्हें किसी ने छोड़ दिया अकेला। तुम किसी को छोड़ दोगे अकेले। दुनिया में जिसे छुओ ख्याल रखो अकेली पड़ी चीजें टूट जाती हैं अक्सर छूते ही। - @Kitabganj1
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Ja ab nahi aata, Ab tu hi dhoondh mujhe.
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मैं हिस्सों में नहीं पहचानता तुम्हें, मुझे पूरा का पूरा इंसान चाहिए। - @Kitabganj1
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