1400 साल पहले लिखी गई एक सच्चाई...
आज भी पत्थरों पर ज़िंदा है।
सऊदी अरब में मिले इस शिलालेख पर दूसरे ख़लीफ़ा हज़रत उमर (रज़ि.) का नाम दर्ज होने की खबर सामने आई है।
वक़्त बदल गया,
सल्तनतें बदल गईं,
हुकूमतें बदल गईं...
लेकिन इस्लाम की तारीख़ के निशान आज भी ज़मीन के सीने पर मौजूद हैं।
यह सिर्फ़ एक पत्थर नहीं...
यह उन लोगों की याद है जिन्होंने इंसाफ़, सादगी और अल्लाह की इबादत को अपनी ज़िंदगी का मक़सद बनाया।
अल्हम्दुलिल्लाह ❤️
जिस दीन को मिटाने की कोशिशें सदियों से होती रहीं,
उसकी गवाही आज भी इतिहास खुद दे रहा है।