President, All Rajasthan In Service Doctors Association (ARISDA) Rajasthan

Joined June 2016
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सीधी बात ! खरी बात ! नो बकवास 🙏
I believe that over the next 10 years, technology will bring drastic changes to the way we work and earn. Your degree may have little or no value on its own. People may no longer ask about your qualifications; instead, they will focus on your Skills only. Instead of chasing for best college for your Children, teach them to create Values instead of focussing much on marks !! #DARVAS🥸
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हार्दिक शुभकामनाएँ 🎉
राजस्थान से राज्यसभा हेतु भारतीय जनता पार्टी का प्रत्याशी बनाए जाने पर मैं माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी, केंद्रीय गृहमंत्री श्री अमित शाह जी तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री नितिन जी सहित भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व का हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ; पार्टी ने मुझ पर जो विश्वास जताया है, मैं पूर्ण निष्ठा के साथ इस विश्वास पर खरा उतरने का प्रयास करूँगा। भारतीय जनता पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं, कार्यकर्ताओं और समर्थकों का भी हार्दिक साधुवाद करता हूँ, जिनके स्नेह, मार्गदर्शन एवं सहयोग ने मुझे इस जिम्मेदारी के योग्य बनाया; आप सभी का यह विश्वास मुझे राष्ट्रसेवा के लिए और अधिक ऊर्जा एवं प्रेरणा प्रदान करता रहेगा। @narendramodi @AmitShah @NitinNabin
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साथियों ! उदयपुर प्रकरण पर राज्य अरिसदा कोर कमेटी की आज मीटिंग हुई ! हम राज्य भर के सेवारत चिकित्सक उदयपुर में हमारे साथी चिकित्सकों के साथ हुए अमानवीय कृत्य की घोर निंदा करते हैं ! कोर कमिटी की मीटिंग में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया है कि इस प्रकरण में उदयपुर के चिकित्सकों द्वारा जो भी निर्णय किया जाता है हम उनके साथ रहेंगे ! जय अरिस्दा 😡👍✌🏻 डॉ अजय चौधरी अध्यक्ष,अरिस्दा @arvindchotia @ml_vikas @Zinda_Avdhesh @ima_sikar @sarkari_doctor @drajaychuru
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ये क्रिकेटर राहुल द्रविड़ जी है इन्हें बैंगलोर विश्वविद्यालय द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया, राहुल द्रविड़ ने इसे वापस कर दिया। न केवल वापस दिया, बल्कि एक अद्भुत भाषण भी दिया, उन्होंने कहा - मेरी पत्नी एक डॉक्टर है, उसने इस उपाधि को पाने के लिए अनगिनत दिन बिताए हैं। मेरी मां आर्किटेक्चर की प्रोफेसर हैं, उन्होंने इस डिग्री के लिए पचास साल लंबा इंतजार किया, उन्होंने मेहनत की। मैंने क्रिकेट खेलने के लिए बहुत मेहनत की, लेकिन मैंने उतनी पढ़ाई नहीं की, तो मेरे पास यह डिग्री कैसे हो सकती है ? "मनुष्य सबके घर जन्म लेता है, लेकिन इंसानियत हर किसी के घर में पैदा नहीं होती (मनुष्य का धर्म)....Read News
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चूरू जिला एलएचवी और एएनएम संघ की अध्यक्षा सम्माननीय श्रीमती बाला बाई राठौड़ के चूरू में आयोजित सेवानिवृत्ति समारोह में उपस्थित हो कर बधाइयाँ सम्प्रेषित की और इस मौके पर चूरू जिले के सभी ब्लॉक से आयी सैंकड़ो महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से बड़े दिनों बाद मिलकर और उनका मेरे प्रति आदर सम्मान देख कर मन आह्लादित हुआ। आभार आप सभी मेरे चूरू के स्नेहिल जनों का ! साथ ही इस अवसर पर चूरू जिले में एएनएम एलएचवी संघ की नयी कार्यकारिणी का गठन भी किया गया। जिसमें नव नियुक्त जिला अध्यक्ष श्रीमती शारदा चौधरी और उनकी कार्यकारिणी को खूब सारी बधाई और शुभकामनाएँ। इस मुबारक मौके पर चूरू के सीएमएचओ डॉ मनोज शर्मा, एडी. सीएमएचओ डॉ एहसान गौरी, आरसीएचओ डॉ शशांक चौधरी, बीसीएमओ डॉ जगदीश सिंह भाटी, बीपीएम ओमप्रकाश, वरिष्ठ मुकारब जी, प्रिय नौरंग जी गुसाई, यूडीसी सुरेन्द्र, डीओ मधुसूदन, डीए हेमराज सहित चूरू जिले के अन्य स्वास्थ्य कर्मियों की बड़ी संख्या में उपस्थिति रही। 😍🎉❤️
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गृह नगर सुजानगढ़ के राजकीय बगड़िया अस्पताल में सुजानगढ़ नागरिक परिषद, कोलकत्ता के अध्यक्ष सुशील कुमार डोसी और सचिव आदित्य कोठारी के सार्थक प्रयासों से भामाशाह श्री कमलेश डूंगरवाल जी के आर्थिक सहयोग से बेहतरीन आधुनिक तरीके से नवीनीकृत किए गए कॉटेज वॉर्ड्स के उद्घाटन समारोह में शिरकत की। इस अवसर पर पीएमओ डॉ पुरुषोत्तम करवा, वरिष्ठ चिकित्सक डॉ दिलीप सोनी, डॉ नरेंद्र सिंह राठौड़, डॉ रवींद्र कड़ेल, डॉ सुनील मीणा, डॉ विजय बगड़िया, डॉ महीपाल सिंह, डॉ नाथूराम कुमावत और नर्सिंग अधिकारी मदन राव, रामप्रताप बाँसुडा, विकास ढाका, सुरेंद्र मोहन जांगिड, बजरंग वर्मा, राजकुमार, विजय कस्वा, मनीष सारण सहित सुजानगढ़ के गणमान्य नागरिक मौजूद रहे। इस अवसर पर मैंने अपने शहर के हॉस्पिटल का निरीक्षण भी काफ़ी लंबे समय बाद किया और पाया कि चिकित्सालय की सुविधाओं में बहुत अधिक सुधार हुआ है ! इसके लिए पीएमओ डॉ पुरुषोत्तम करवा सहित चिकित्सालय में कार्यरत हमारे सभी चिकित्सकों और चिकित्सा कर्मियों को बहुत बहुत बधाई 😍 अपने गृह नगर के राजकीय हॉस्पिटल में यह आमूल चूल परिवर्तन निसंदेह अच्छा लगा। कार्यक्रम का संचालन मारवाड़ी भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार कवि घनश्याम जी कच्छावा ने किया। 🙏❤️👍
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घोर अत्याचार 😡
₹19,000 crore. That is what Banks collected in last 3 years just for not maintaining ‘Minimum Account Balance.’ Not from the rich. Not from big borrowers. From the poorest accounts in the system. Their crime? They didn’t have enough money. A farmer misses the minimum balance - Penalty. A pensioner withdraws money for medicine - Penalty. A daily wage worker falls short by a few hundred rupees - Penalty. The poor keep money in banks for safety. Not to be quietly fined for being poor. Financial inclusion should protect small savings, not punish small balances. In Parliament today I proposed ending minimum balance penalties so the banking system stops charging people for their poverty.
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क्या यह मांग सुनी जाएगी? भारत में बैंकिंग का एक अलग ही कॉमेडी शो चलता है—आपके खाते में पैसे कम हों, तो बैंक ऐसे नाराज़ होते हैं जैसे आपने उनकी शादी में लिफाफा खाली दे दिया हो। संसद में रखे गए आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन वित्तीय वर्षों (FY 2022-23 से FY 2024-25) में minimum balance न रखने पर सबसे ज़्यादा कमाई HDFC Bank ने की: ₹3,871.77 करोड़। उसके बाद Axis Bank ने ₹2,705.97 करोड़, Punjab National Bank ने ₹1,577.87 करोड़, Bank of Baroda ने ₹1,272.17 करोड़, और ICICI Bank ने ₹1,224.79 करोड़ वसूले। मतलब गरीब आदमी बैंक में पैसा रखने जाए, और अगर पैसा कम निकला तो बैंक बोले—“बधाई हो, आपने हमारी कमाई में योगदान दिया है!” सबसे मज़ेदार बात यह है कि जिसके पास minimum balance रखने लायक पैसा ही नहीं, वही penalty देकर बैंक का balance मजबूत कर रहा है। बैंकिंग का यह rule कभी-कभी service कम और surprise test ज़्यादा लगता है।
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“मुन्ना भाई एमबीबीएस“ देखी होगी ना अरविंद भाई @arvindchotia आपने ! वैसी ही प्यारी सी झप्पी दी है शासन प्रशासन ने राज्य के सेवारत चिकित्सकों को तो हम चिकित्सकों ने भी उस झप्पी को दिल से स्वीकार किया है ❤️ उम्मीद करते हैं इससे राज्य में एक नजीर क़ायम होगी और सभी प्रशासनिक/नियंत्रण अधिकारी इसको ध्यान में रखते हुए इसी प्यार से सामने बैठे अधिकारी/कर्मचारी का मान सम्मान क़ायम रखते हुए अपने कर्तव्यों का निर्वहन करेंगे । आभार आपका कि आपने मेरी ही नहीं राज्य भर के सेवारत चिकित्सकों के हमारे संघ अरिसदा की अंतरंग भावनावों को इतनी कद्र बख्शी ! 🙏 🥰🤗 @sarkari_doctor @svoruganti1466 @8PMnoCM @RajCMO @nhm_rajasthan @MoHFW_INDIA @hea
छोटी-छोटी बातें कितनी नोटिस की जाती हैं इसका हम कई बार अंदाजा नहीं लगा सकते... राजस्थान के मुख्य सचिव, चिकित्सा विभाग की प्रमुख सचिव और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक एक अस्पताल की विजिट पर गए थे। तस्वीर में अस्पताल की इंचार्ज डॉक्टर अपनी कुर्सी पर बैठी हैं और उनके सामने वाली कुर्सियों पर तीनों वरिष्ठ अधिकारी बैठे हुए हैं। बस, इतना सा करके ही इन सीनियर अफसरों ने डॉक्टरों का दिल जीत लिया है। संबंधित अस्पताल के लिए ये अफसर क्या घोषणा करके आए, सरकारी डॉक्टरों को ये अफसर क्या भरोसा देखकर आए इसके बारे में कोई बात नहीं कर रहा लेकिन इस छोटे से एक्ट से ही सरकारी डॉक्टरों ने खुशी और सम्मान महसूस किया है। निश्चित ही यह इनीशिएटिव मुख्य सचिव महोदय का है क्योंकि तीनों में सबसे सीनियर वे ही हैं। चूरू मेरे मित्र और वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अजय चौधरी ने फेसबुक पर लिखा- आज संपूर्ण राजस्थान राज्य के सेवारत चिकित्सकों को बहूत अरसे बाद कोई शासन उनके प्रति संवेदनशील सा लगा। आदरणीय मुख्य सचिव, चिकित्सा विभाग की प्रिंसिपल सेक्रेटरी मैम और चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के निदेशक आज एक अस्पताल की विजिट पर गये थे। इनकी संवेदनशीलता है कि इन्होंने चिकित्सक को उसकी कुर्सी से नहीं उठाया बल्कि उसके सामने लगी कुर्सियों पर बैठे। 🙏 आप राज्य के वरिष्ठतम जनों का एक सामान्य चिकित्सक के प्रति यह सम्मान। आज राज्य के चिकिसको का दिल जीत लिया आपने ! अब सोचिए जरा। जो सीनियर अफसर या नेता किसी के दफ्तर में जाते हैं तो उन्हें संबंधित अधिकारी की कुर्सी पर बैठकर ऐसा क्या आनंद आता है कि वह सामने वाली कुर्सी पर नहीं बैठना चाहते? असल में जब आप किसी को उसकी कुर्सी से उठाकर उसकी कुर्सी पर बैठ रहे होते हैं तो आप उसका मान मर्दन कर रहे होते हैं। ऐसी घटनाएं आए दिन पब्लिक डोमेन में आती रहती हैं और किसी की कुर्सी पर बेवजह बैठने वालों की आलोचना भी होती है लेकिन इसके बावजूद पता नहीं यह क्या मानसिकता है कि आप जाकर उसकी कुर्सी पर ही बैठेंगे। तभी बड़े अफसर या बड़े नेता माने जाएंगे। मैं तो कहता हूं, जब मुख्य सचिव महोदय ने इतनी संवेदनशीलता दिखाई ही है तो क्यों नहीं वे एक स्थाई आदेश ही जारी कर दें कि जो भी सीनियर अफसर कहीं भी विजिट पर जाएगा तो वह संबंधित विभाग के अधिकारी के सामने वाली कुर्सी पर ही बैठेगा। उसके कुर्सी पर बैठकर उसे अपमानित नहीं करेगा। हम सिर्फ उम्मीद कर सकते हैं। बाकी मुख्य सचिव महोदय ने अपने व्यवहार से जो संदेश दिया है, वही संदेश अगर बड़े अफसरों में चला जाए तो काफी अच्छा होगा। @svoruganti1466 @8PMnoCM @Sarkaridoctor12 @BhajanlalBjp
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ऐसे भी अधिकारी होते है 🙏😀🙏
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विधायक मुकेश भाकर और न्यायाधीश सुश्री कोमल मीणा को विवाह की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह केवल दो युवा हृदयों का मिलन नहीं है; यह हमारे समाज की पुरानी, धूल-धूसरित अलमारियों में बंद उन कुंडियों पर एक उजला प्रहार भी है, जिनमें जाति, धर्म और कुल-गौरव के नाम पर मनुष्य की सहजता को बरसों से कैद रखा गया है। इस शादी की धूमधाम की ख़बरें और छवियाँ इसलिए सुंदर लगी, क्योंकि कभी-कभी समाज की जमी हुई बर्फ़ को पिघलाने के लिए प्रेम का सिर्फ होना काफी नहीं होता, उसका सार्वजनिक, निडर और उत्सवधर्मी होना भी ज़रूरी होता है। राजस्थान का समाज अपनी समृद्ध परंपराओं के साथ-साथ अनेक अदृश्य गांठों से भी बुना हुआ समाज है। ये गांठें रिश्तों की नहीं, पूर्वग्रहों की हैं; ये मर्यादा की नहीं, भय की हैं; ये संस्कृति की नहीं, संकीर्णता की हैं। मुकेश और कोमल ने इन गांठों को केवल छुआ नहीं, उन्हें खोलने का साहस भी दिखाया है। और यह साहस निजी होते हुए भी सार्वजनिक महत्व रखता है, क्योंकि हर ऐसी शादी आने वाली पीढ़ियों के लिए एक खिड़की खोलती है, जहाँ से हवा थोड़ा मनुष्यता में भीगकर भीतर आती है। मैं एक दिन एक ज़मीनी रिपोर्टर के साथ मुकेश की माँ की बातें सुन रहा था। मुझे मेरी भी माँ याद आईं। मुझे लगा कि असली प्रज्ञा हमेशा विश्वविद्यालयों की ऊँची इमारतों में नहीं रहती; वह कई बार घर के आँगन में, चूल्हे की राख के पास, अनुभव की धीमी आँच पर पकती है। मुकेश माँ ने कितने सुलझे जवाब दिए। वे उन असंख्य तथाकथित शिक्षित लोगों से कहीं अधिक समझदार लगीं, जो डिग्रियों के बोझ तले दबे हुए भी मनुष्यता की पहली पाठशाला तक नहीं पहुँच पाते। कई बार मन में इतनी वितृष्णा होती है कि इस देश के प्रति अपार मुहब्बत दिखाने का दम भरने वाले इसी दिन भर कितना ज़हर उगलते हैं जातियों और धर्मों को लेकर। हमारे समय की एक त्रासदी यह है कि हमने शिक्षा को प्रमाणपत्र समझ लिया है और संकीर्णता को संस्कार। जबकि सच्चे संस्कार वे हैं, जो मनुष्य को बड़ा बनाते हैं, उसका हृदय खोलते हैं, उसकी दृष्टि विस्तृत करते हैं। अब समय सचमुच आ गया है कि जाति और धर्म की दीवारें विवाह के रास्ते में खड़ी प्रहरी न बनी रहें। प्रेम, सम्मान और समानता यही वे तीन दीप हैं जिनसे भविष्य का समाज रोशन होगा। हमारे मौजूदा वरिष्ठ नेताओं में बहुत सारे ऐसे हैं, जिन्होंने अपने समय में इन वर्जनाओं को तोड़ा और जाति धर्म की दीवारें लांघकर शादियाँ कीं। लेकिन जाति और धर्म की कंटीली और जड़तावादी संकीर्ण दीवारों को गिराने के लिए चेतना की लौ ज़रूरी है और मुकेश और कोमल ने इन दीपों में अपनी लौ जोड़ दी है। इसके लिए उन्हें बधाई नहीं, कृतज्ञता भी मिलनी चाहिए। @MukeshBhakar_
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लाडनूं के लोकप्रिय विधायक प्रिय अनुज मुकेश भाकर के विवाह समारोह में शामिल होकर नव दंपति को सुखमय वैवाहिक जीवन और उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दी ! 🎉😍❤️
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नव वर्ष 2026 की आपको एवं आपके परिवार को कोटिश: शुभकामनाएँ एवं हार्दिक बधाइयाँ। यह नया वर्ष आपके जीवन में सुख, स्वास्थ्य, समृद्धि और सफलता के नए आयाम लेकर आए। 🙏🌹🙏🌹🙏🌹
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अशोक पाण्डे. हम चटोरों के देश का असली बादशाह था यह सींकिया बूढ़ा. सुनहरी मूठ वाली नफीस छड़ी और राजस्थानी साफे को उसने अपने कॉस्टयूम का जरूरी हिस्सा बना लिया था. वह इंटरव्यू लेने आने वालों को बार-बार बताता था कि वह पांचवीं फेल है. उसके काम ऐसे थे कि सरकार ने उसे पद्मभूषण से नवाजा. जब लोग उसके मरने की अफवाह उड़ाया करते वह अपनी कंपनी से 21 करोड़ की तनख्वाह ले रहा होता था. वह अपने प्रोडक्ट्स के विज्ञापनों में खुद एक्टिंग करता था और भारतीय संस्कारों को बेचता था. इन विज्ञापनों में उसके सामने पड़ने पर जीन्सधारी बहू-बेटियां सर पर दुपट्टा डाल लेतीं और उसके पैर छुआ करतीं. बहुत कम टीवी देखने वाले मेरे पिताजी की बांछें उसे टीवी पर देखते ही खिल जाया करतीं और वे खुश होकर बुदबुदाते - "बड़ा जबरदस्त बुढ्ढा है यार!" 27 मार्च 1923 को चानन देवी और महाशय चुन्नीलाल के जिस आर्यसमाजी घर में महाशय धर्मपाल गुलाटी पैदा हुए वह बेहद धार्मिक था. गुलाटी परिवार मनुष्यता की सेवा करने को अपना मूलधर्म मानता था. इस आदर्शवादी परिवार का गहरा यकीन था कि अगर आदमी समाज को अपना सर्वश्रेष्ठ देता है तो संसार का सर्वश्रेष्ठ खुद उस तक वापस लौटता है. पांचवीं जमात के बाद स्कूल छूट गया और महाशय धर्मपाल गुलाटी ने फेरी लगाकर आईने बेचने का काम शुरू किया. उसमें फायदा नहीं हुआ तो घर-घर जाकर एक स्थानीय फैक्ट्री में बनने वाला साबुन बेचना शुरू किया. उसमें मन न लगा तो बढ़ईगिरी शुरू कर दी. बहुत छोटी उम्र में ही उनके भीतर आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो जाने का जज़्बा था. बढ़ईगिरी रास न आई तो चावल की तिजारत की. कपड़े और गुसलखानों की फिटिंग्स बेचने का धंधा भी किया. उनके खानदान को सियालकोट में देगी मिर्च वाले कहा जाता था और उनके पिता ने महाशियाँ दी हट्टी के नाम से मसालों की छोटी-मोटी दुकान खोल रखी थी. किशोर धर्मपाल ने अंततः पिता के धंधे में साथ देने का फैसला किया. इस समय तक घाट-घाट का पानी पी चुकने के बाद उन्हें व्यापार और ग्राहक की जबरदस्त पहचान हो चुकी थी. फिर 1947 आया. विभाजन हुआ और परिवार दिल्ली आ पहुंचा. धर्मपाल गुलाटी के पास कुल डेढ़ हज़ार रुपये थे. मन में तो मसालों का व्यापार करने की इच्छा थी लेकिन नई जगह में अजनबी को कौन पूछता. साढ़े छः सौ रूपये में तांगा खरीदा और दो आना फ़ी सवारी की दर से दिल्ली रेलवे स्टेशन से करोल बाग़ और बाड़ा हिंदूराव के बीच सवारियां ढोने लगे. थोड़ी रकम बची तो किसी नए बने परिचित की सिफारिश पर करोल बाग़ की अजमल खान रोड पर चौदह बाई नौ का एक खोखा मिल गया. मंडी से थोक में साबुत मसाले खरीदे गए और परिवार के सारे सदस्यों को उन्हें कूटने-बाँधने में लगाया गया. इस काम को करने में उन्हें खानदानी महारत हासिल थी. पर्याप्त माल बन गया तो दुकान पर सियालकोट के देगी मिर्च वालों की महाशियाँ दी हट्टी का बोर्ड टांग दिया गया. महाशियाँ दी हट्टी से एमडीएच बनने की कहानी लम्बी है लेकिन उसके भीतर वही तत्व हैं जो सफलता की हर कहानी में पाए जाते हैं – मेहनत, विश्वास, परोपकार और इंसानियत. आज इस कंपनी की मार्केट वैल्यू दस से पंद्रह हजार करोड़ आंकी जाती है. महाशय धर्मपाल गुलाटी ने गरीबों के लिए अस्पताल बनाए, बीस से अधिक स्कूल खोले और अनगिनत बेसहारा लड़कियों की शादियाँ कराईं. आज इस जबरदस्त बूढ़े की पाँचवीं बरसी है. वह देवताओं की रसोई में स्वाद पैदा कर रहा है. #DharmpalGulati #MDH #SuccessMindset #Siyalkot @citymediasial #AryaSamaj @Arya
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ये स्कीम कम लोगों को पता होगी। नेशनल हाईवे पर अगर कोई एक्सीडेंट होता है और आप पीड़ित को हॉस्पिटल पहुंचाते हैं तब इनाम के रूप में आपको 25 हजार रुपए मिलेंगे। नेशनल हाईवे पर एक्सीडेंट में दूसरा नियम यह है कि पीड़ित व्यक्ति का इलाज 7 दिनों तक, डेढ़ लाख रुपए तक खुद NHAI करवाता है। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी जी को सुन लीजिए।
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राजस्थान की ब्यूरोक्रेसी से दिल्ली में कार्यरत डॉ केके पाठक ऐसे आईएएस हैं जिनके लिए शायद ही कोई नकारात्मक बोले..न आईएएस होने की ठसक न कोई बनावटीपन न ही चेहरे पर कोई चिंता...न ही कुछ पाने की खुशी और न ही पाने की प्रसन्नता न खोने का दुःख ..हिंदी संस्कृत का जो शब्दकोश का उदाहरण इनके लेख दे देते हैं। #बस_यूँ_ही
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पहली बार जब यह एड देखा था तो हंसी आई थी, आज मालूम हुआ इसमें कितना बड़ा मैसेज छुपा है कभी कभी हम किसी की गलती सुधारने की कोशिश में इतने डूब जाते हैं कि भूल जाते हैं, हमारी अच्छी नीयत ही कभी उसकी पूरी जिंदगी बदल सकती है. कई बार हमारी ठीक करने की कोशिश उसे सिखाने के बजाय चोट पहुंचा सकती है, इंसान की मदद करना अच्छी बात है, लेकिन जरूरी है कि हमारी कोशिश उसे नुकसान पहुचाने के बजाय उसे सीखने और आगे बढ़ने का मौका दे. अगली बार किसी की गलती दिखे तो रुकिए सोचिए फिर कदम बढ़ाएं
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सटीक विश्लेषण ❤️
‘अग्निपथ नहीं जनपथ’ पुस्तक के विमोचन एवं कृति चर्चा कार्यक्रम में पूर्व नेता प्रतिपक्ष श्री राजेंद्र राठौड़ जी का संबोधन . . . @Rajendra4BJP
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