जब जातियां ब्राह्मणों ने बनाई हैं, तो तुम उसी जाति का फायदा उठाकर मुफ्त की सुविधाएं क्यों लेते हो?
तुम्हें तो कहना चाहिए "पंडित जी, पाय लागूं"
या फिर उस जाति प्रमाण पत्र को फाड़ दो और उसका लाभ लेना छोड़ दो।
और हां ,सम्मान के लायक जो होगा, उसे सम्मान मिलेगा।
भीख में सम्मान नहीं मिलता।
क्या कभी किसी ब्राह्मण ने कभी कहा
पाय लागु "कुशवाहा जी मौर्या जी" ??
पाय लागू यादव जी ??
पाय लागू जाटव जी ??
पाय लागू पटेल जी, ??
पाय लागू निषाद जी ,??
पाय लागू पाल जी ??
एक तरफा सम्मान नहीं,* *समान सम्मान चाहिए !*