भारत अपनी पूरी हिमालयी एयर डिफेंस व्यवस्था को नए सिरे से बना रहा है 🇮🇳
Akash-NG और VL-SRSAM को जोड़कर एक ऐसा डिजिटल “किल-वेब” तैयार किया जा रहा है, जो Army, Air Force और Navy को रियल टाइम में एक साथ जोड़ेगा।
और हिमालय जैसा कठिन इलाका इसे दुनिया की सबसे मुश्किल चुनौतियों में बदल देता है। 👇
• Akash-NG की मारक क्षमता लगभग 50 किमी, साथ में dual-pulse solid rocket motor
• Active RF seeker दुश्मन की जामिंग के बीच भी लक्ष्य को खुद ट्रैक कर सकता है
• VL-SRSAM अचानक कम ऊँचाई पर आने वाले खतरों को high-angle interception से रोक सकता है
• सेना का Akashteer सिस्टम रडार, सेंसर और MANPADS को एक डिजिटल नेटवर्क में जोड़ता है
• वायुसेना का IACCS सुरक्षित AFNET लिंक के जरिए राष्ट्रीय एयर डिफेंस की रीढ़ बना हुआ है
• नौसेना का Trigun नेटवर्क भी अब इससे जुड़ चुका है, जिससे एक Unified Common Operating Picture बन रही है
• यह पूरा सिस्टम stealth aircraft, swarm drones और terrain-hugging cruise missiles से निपटने के लिए बनाया गया है
पहाड़ी घाटियों में रडार की “अंधी जगहें” भारत की सबसे बड़ी कमजोरी थीं।
लेकिन Akash-NG और VL-SRSAM को एक डिजिटल नेटवर्क में जोड़कर भारत ने इस समस्या का बड़ा समाधान निकाल लिया है।
भारत सिर्फ एक एयर डिफेंस सिस्टम नहीं बना रहा।
भारत एक पूरा एयर डिफेंस इकोसिस्टम तैयार कर रहा है। 🇮🇳