पूर्वी दिल्ली के शाहदरा में 14 साल के मुसलमान बच्चे साहिल को एक CISF जवान ने सिर्फ इसलिए गोली मार दी क्योंकि वह बारात में उड़ाए जा रहे नोट उठा रहा था। पिता के पैरालाइज होने के बाद साहिल स्कूल छोड़कर 11 घंटे की मेहनत में 6,000 रुपये कमाकर घर चलाने में मदद करता था। बारात के दौरान दूल्हे का रिश्तेदार और CISF हेड कांस्टेबल मदन गोपाल तिवारी उसे कॉलर पकड़कर थप्पड़ मारता रहा, और जब साहिल ने पूछा “मैंने क्या गलती की?”, तो उसने पिस्टल निकालकर उसके सिर में गोली मार दी। साहिल अस्पताल पहुँचते ही मृत घोषित हुआ। परिवार टूट चुका है, और सवाल उठ रहा है क्या एक गरीब मुसलमान बच्चे की ज़िंदगी की कोई कीमत नहीं? क्या इस देश में गुस्से और नफ़रत के नाम पर बच्चों की जान यूँ ही ली जाती रहेगी?
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