झारखंड की लोक संस्कृति की जीवंत धड़कनों को महसूस करने का समय आ गया है।
“ढोल माँदर” में आज प्रस्तुत है रंग, लय और परंपरा से भरपूर पंचपरगनिया लोकनृत्य। लोकजीवन की खुशियों, रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक विरासत को अपने अनूठे अंदाज़ में अभिव्यक्त करने वाला यह लोकनृत्य झारखंड की समृद्ध पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ढोल-माँदर की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और लोकधुनों के साथ देखिए संस्कृति का यह मनमोहक उत्सव, आज शाम 7:30 बजे डीडी झारखंड पर ।
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