आज कॉन्सिट्यूशन क्लब में आयोजित जाट महिला शक्ति संगम कार्यक्रम में शामिल हुई।
मैंने महसूस किया है कि महिलाओं को पुरुषों के मुक़ाबले 3 गुना मेहनत करनी पड़ती है, तब जाकर उन्हें राजनीति में स्थान मिलता है। आजादी के समय भारत में महिलाओं की साक्षरता दर 9 प्रतिशत थी, आज 65 प्रतिशत है। देश के आम चुनावों में चुनाव लड़ने वाली महिलाओं की संख्या 10 प्रतिशत है, जबकि 1957 में सिर्फ 3 प्रतिशत ही थी। महिला सांसदों की संख्या पहली लोकसभा में 22 थी, आज 74 है। राज्यसभा में 1952 में महिला सदस्यों की संख्या 15 थी, आज 42 हो गई।
लेकिन यह संख्या अब भी पर्याप्त नहीं है। बेटियों और महिलाओं को और आगे बढ़ाना होगा। हमें इस संख्या को पुरुषों के बराबर करना होगा – और इस पहल के लिए शिक्षा ज़रूरी है। जैसा कि श्रीमती प्रतिभा पाटिल और श्रीमती द्रौपदी मुर्मू सहित अनेकों महिलाओं ने सिद्ध कर दिया है कि शिक्षा ही सफलता की कुंजी है।
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