जब प्रक्रिया के तहत रिज़ल्ट पूरी तरह तैयार हो चुका था, बायोमेट्रिक अटेंडेंस क्लियर थी, सिक्योरिटी ऑडिट पूरा हो चुका था, सिक्रेसी ब्रांच की मंज़ूरी थी और 3 सर्टिफ़ाइड एजेंसियों ने पूरी प्रक्रिया को सही ठहराया था तो फिर रिज़ल्ट को “रिकॉल” करने की ज़रूरत क्यों पड़ी? क्या यह फैसला पारदर्शिता के तहत लिया गया था या किसी दबाव में? या फिर रिज़ल्ट जारी होने के बाद किसी को “एडजस्ट” करने की ज़रूरत पड़ गई थी? सरकार साफ़ करे कि रिकॉल का आदेश किसने दिया, किस कारण से दिया गया और इसका लाभ किसे पहुँचाने के लिए लिया गया।
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