राजभाषा हिन्दी के कार्यान्वयन तथा हिन्दी के कार्यालयीन प्रयोग में अनुवाद का महत्व" विषय पर कार्यशाला आयोजित
गुजरात केंद्रीय विश्वविद्यालय में राजभाषा हिन्दी के प्रभावी क्रियान्वयन एवं कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के प्रयोग को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कार्यशाला का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर कुलपति (प्रभारी) प्रो. अतनु भट्टाचार्य ने कहा कि "भाषा को जीवित रखने का सबसे प्रभावी माध्यम उसका व्यवहार और प्रयोग है। प्रशासनिक कार्य भी हिन्दी में प्रतिफलित होने चाहिए तथा अनुवाद हमारी भाषाई धरोहर है, जिसका निरंतर उपयोग आवश्यक है।"
स्वागत वक्तव्य में प्रो. जनक सिंह मीना ने कार्यशाला की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए राजभाषा नीति के अनुरूप हिन्दी के क्रियान्वयन की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्य वक्ता श्री प्रणव जे. उपाध्याय, सहायक निदेशक (राजभाषा) एवं सचिव, नराकास, आयकर भवन, अहमदाबाद ने कार्यालयीन हिन्दी, अनुवाद, प्रशासनिक शब्दावली, नोटिंग-ड्राफ्टिंग, हिन्दी टंकण, इनस्क्रिप्ट कुंजीपटल तथा राजभाषा के प्रभावी कार्यान्वयन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की और प्रतिभागियों को कार्यालयीन कार्यों में हिन्दी के अधिकाधिक प्रयोग हेतु प्रेरित किया।
ग्रुप-ए एवं ग्रुप-बी के दो सत्रों में आयोजित इस कार्यशाला में अवर श्रेणी लिपिक से लेकर सहायक कुलसचिव स्तर तक के 76 प्रतिभागियों ने सहभागिता की। कार्यक्रम का संचालन सुश्री कोमल मीणा ने किया तथा श्री त्र्यंबक भट्ट, हिंदी अधिकारी (प्रभारी) ने धन्यवाद ज्ञापित किया।
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