दिल्ली हाईकोर्ट ने बाबा रामदेव द्वारा दिए गए "शरबत जिहाद" बयान पर कड़ी नाराज़गी ज़ाहिर करते हुए कहा कि यह टिप्पणी समाज में घृणा और विभाजन फैलाने जैसी है, और इसकी कोई माफ़ी नहीं हो सकती।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक मंच से दिए गए ऐसे ज़हरीले बयान देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को नुकसान पहुँचाते हैं,और यह किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं हैं।
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