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#TruthWithoutApology
आज मैंने Truth Without Apology के Introduction Chapter को सीखा।
सिर्फ कुछ पन्ने पढ़ते ही यह समझ में आने लगा कि यह कोई साधारण book नहीं है —
यह एक दर्पण है, जो मुझे मुझसे मिलाने आया है।
इस में मैंने बहुत गहराई से यह समझने की कोशिश की —
कि मैं अपने जीवन में निर्णय understanding से लेती हूं या केवल belief (विश्वास) से?
कितनी बार मैं किसी बात को समझे बिना ही,
केवल विश्वास या सुनी-सुनाई बातों के आधार पर निर्णय ले लेती हूं?
आचार्य जी ने इस book में स्पष्ट कहा है —
यह पुस्तक entertainment के लिए नहीं है।
यह आपको कोई क्षणिक प्रसन्नता नहीं देगी,
बल्कि यह आपको आप तक,
आपके भीतर के सत्य तक ले जाएगी।
यह पुस्तक हमें आत्म-अवलोकन (self-observation) सिखाती है —
जहाँ हम यह देख पाते हैं कि
हमने अपने आप को कहाँ-कहाँ धोखा दिया है,
और उन धोखों के पीछे कौन-सी गलत समझ या conditioning छिपी है।
मेरे भीतर के कुछ प्रश्न जो पुस्तक सिखाते सिखाते आए हैं—
👉 मैं अपने जीवन में कहाँ-कहाँ स्वयं को धोखा देती हूं?
क्या मैं जानती हूं कि मैं किन बातों को देखकर भी अनदेखा करती हूं?
👉 मैं अपने जीवन में कहाँ-कहाँ खुद से झूठ बोलती हूं?
क्या मैं अपने मन की सच्चाई जानती हूं,
या सिर्फ वही मानती हूं जो सुनने में अच्छा लगता है?
👉 मैंने ऐसे कौन-कौन से निर्णय लिए हैं जो केवल beliefs या मान्यताओं पर आधारित हैं,
न कि सच्ची understanding पर?
क्या मैं परंपरा, समाज, या अहंकार की आवाज़ से चलती हूं,
या अपने भीतर के सच्चे विवेक से?
👉 मेरे जीवन में ऐसी कौन-सी बातें हैं जिन्हें मैं समझ चुकी हूं,
पर अब तक जी नहीं पा रही हूं?
क्या मैं वही जी रही हूं जो जान चुकी हूं,
या सिर्फ मान्यताओं पर जी रही हूं?
👉 मैं अपने जीवन में कहाँ-कहाँ अच्छी, सार्थक बातों को avoid (दुर्लक्षित) कर रही हूं?
कहाँ मैं अपना समय उन बातों में खर्च कर रही हूं
जो मेरे जीवन की गहराई से कोई संबंध ही नहीं रखतीं?
यह सब प्रश्न मैंने अपनी डायरी में लिखे,
उनके उत्तर खोजने की कोशिश की —
क्योंकि यह book केवल उत्तर नहीं देती,
बल्कि हमें सही प्रश्न पूछना सिखाती है।
और मेरे सर (teacher) मुझे बहुत ही सुंदर ढंग से यह book सिखा रहे हैं।
अब मैं केवल पढ़ नहीं रही —
मैं सीख रही हूं, समझ रही हूं, और स्वयं को देख रही हूं।
✨ अब मेरा daily routine यही है —
पढ़ना नहीं, सीखना।
क्योंकि पढ़ने से जानकारी मिलती है,
पर सीखने से परिवर्तन आता है।
यह पुस्तक मुझे हर दिन थोड़ा-थोड़ा सत्य के निकट ले जा रही है।
और हर प्रश्न, मेरे भीतर एक नई जागृति पैदा कर रहा है।
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Posted by Shreya laxman sontakke on Acharya Prashant's Gita Mission App.
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