चीन की ‘String of Pearls’ बनाम भारत की ‘Necklace of Diamonds’
विश्व राजनीति में जहां ज़मीन के टुकड़ों के लिए लड़ाइयाँ लड़ी जाती थीं, आज समुद्री गलियारे (Sea Lanes) और नौसैनिक प्रभुत्व ही शक्ति का नया चेहरा हैं।
भारत और चीन — दो एशियाई शक्तियां — अब एक निर्णायक समुद्री प्रतिस्पर्धा में आमने-सामने हैं।
अक्सर लोग चीन की ‘String of Pearls’ नीति के बारे में सुनते हैं -परंतु कम लोग जानते हैं कि भारत ने इसके जवाब में एक गहन, सूक्ष्म लेकिन प्रभावी रणनीति शुरू की है:
“Necklace of Diamonds” – एक समुद्री संतुलन की योजना, जो न केवल सुरक्षा बल्कि प्रभुत्व की भी नींव रखती है।
🔴 चीन की ‘String of Pearls’: एक विस्तारवादी दृष्टिकोण 2005 में अमेरिकी थिंक टैंक ‘CSBA’ (Center for Strategic and Budgetary Assessments) ने यह शब्द गढ़ा
जिसका तात्पर्य था:
भारत को समुद्र के चारों ओर बंदरगाहों, आधारों और आर्थिक प्रभाव के माध्यम से घेरना
प्रमुख बिंदु:
1. Gwadar Port (पाकिस्तान): चीन-पाक आर्थिक गलियारे (CPEC) का समुद्री छोर।
2. Hambantota Port (श्रीलंका): ऋण न चुका पाने के कारण चीन को 99 वर्षों के लिए लीज पर।
3. Chittagong Port (बांग्लादेश): चीन द्वारा विकसित, व्यापार और लॉजिस्टिक्स में गहरी घुसपैठ।
4. Kyaukpyu Port (म्यांमार): तेल व गैस पाइपलाइन का समुद्री टर्मिनल।
5. Djibouti (अफ्रीका): चीन का पहला विदेशी सैन्य अड्डा, अफ्रीका-हिंद महासागर के संगम पर।
इस रणनीति के पीछे चीन का उद्देश्य स्पष्ट है —
भारतीय नौसैनिक गतिविधियों की निगरानी, क्षेत्रीय दबदबा और ऊर्जा मार्गों की सुरक्षा।
🔵 भारत की प्रतिक्रिया: 'Necklace of Diamonds' — एक संतुलित घेरा
भारत की रणनीति त्वरित, आक्रामक या प्रचार आधारित नहीं रही इसके बजाय, “संपर्क आधारित प्रभुत्व” (Connectivity-based Dominance) की नीति अपनाई गई —
जहां रणनीतिक साझेदारियाँ, लॉजिस्टिक समझौते और भरोसेमंद पहुंच प्राथमिकता में रहे।
भारत के प्रमुख “हीरे”:
लोकेशनरणनीतिक महत्व
Chabahar Port (ईरान)पाकिस्तान के Gwadar का जवाब; मध्य एशिया तक सीधी पहुंच
Duqm Port (ओमान)IOR में भारत की नौसैनिक लॉजिस्टिक उपस्थिति
Sabang Port (इंडोनेशिया)मलक्का जलडमरूमध्य के समीप, चीन की नाजुक सप्लाई लाइन पर निगरानी
Agalega (मॉरिशस)हवाई पट्टी और रडार; दक्षिणी IOR में उपस्थिति
Assumption Island (सेशेल्स)समुद्री निगरानी और एसेट बेस
Reunion Island (फ्रांस के साथ)बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास और क्षेत्रीय पहुँच
Diego Garcia (US partnership)रणनीतिक सामरिक तालमेल और Indo-Pacific सहयोगी
🌐 बहुस्तरीय रणनीति: केवल भौगोलिक नहीं, राजनीतिक भी
भारत की “Necklace of Diamonds” नीति केवल भौगोलिक उपस्थिति तक सीमित नहीं है।
यह राजनयिक, सैन्य, तकनीकी और खुफिया – चारों स्तरों पर सक्रिय है:
1. IORA (Indian Ocean Rim Association): 23 देशों के साथ सामूहिक सहयोग और विकास
2. IFC-IOR (Information Fusion Centre): रियल टाइम मरीटाइम इंटेलिजेंस साझेदारी (गुरुग्राम आधारित)
3. QUAD और Indo-Pacific Strategy: भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ क्षेत्रीय संतुलन
भारत की रणनीति क्यों ज़्यादा स्थायी और स्वीकार्य है।
पहुँच का तरीकाकर्ज
और निर्माणसाझेदारी और भरोसा,छविआक्रामक विस्तारवादीसंतुलित क्षेत्रीय सहयोगी,स्थानीय समर्थनसीमित, संदेहास्पदअपेक्षाकृत अधिक,भारत की नीति में स्थायित्व (sustainability) है, क्योंकि यह स्थानीय सरकारों की भागीदारी और समन्वय के साथ आगे बढ़ती है — न कि उन्हें आर्थिक जाल में फंसा कर।
21वीं सदी की शक्ति का केंद्र एशिया है, और एशिया की शक्ति का केंद्र — हिंद महासागर।
भारत, अब इस महासागर का एक मूक दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय शिल्पकार बन चुका है।
"String of Pearls" को जवाब देना सिर्फ एक रणनीति नहीं, भारत की समुद्री आत्मनिर्भरता और भविष्य की शक्ति संरचना का हिस्सा है।
चीन की मोतियों की माला अगर नियंत्रण की कहानी है,तो भारत की हीरों की माला — संतुलन और सहयोग की कहानी है।
“युद्ध अब बंदूक से नहीं, पहुँच और भरोसे से लड़ा जाता है।
और भारत इस युद्ध में न पीछे है, न चुप है —
वो बस रणनीति से बोल रहा है।
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