उत्तराखंड में BJP नेता को मार डाला गया, वो भी दिन-दहाड़े। वो भी OBC नेता। कहीं से कोई आउटरेज नहीं होता, क्योंकि हत्यारों के नाम हैं - रज्जाक, सलमान, जावेद और शाहबाज।
सहारनपुर और मुज़फ्फरनगर जैसे संवेदनशील जिले उत्तराखंड से लगते हैं। आपको क्या लगता है, जो उत्तराखंड में हुआ है वैसा यूपी में करने की कोशिश नहीं हुई होगी? कई बार साज़िश रची गई होगी, लेकिन इन्हें पता है कि लखनऊ में ऐसा मुख्यमंत्री बैठा है जिससे इस्लामी कट्टरपंथियों की आने वाली नस्लें तक काँपती हैं।
संभल में जो किया गया और उसके बाद जो कार्रवाई हुई, उसे दुनिया ने देखा। रामपुर की सीमा भी उत्तराखंड से लगती है, वहाँ माफिया आज़म ख़ान के साम्राज्य का अंत किया गया। बरेली भी उत्तराखंड से सटा हुआ है, वहाँ मौलाना तौक़ीर रज़ा पर पहली बार किसी सरकार ने कार्रवाई करने की हिम्मत की।
उत्तराखंड में हाल के दिनों में जिस तरह से डेमोग्राफी बदली है, उसके बाद से विशेषकर पश्चिमी यूपी में विशेष सतर्कता बरतने की आवश्यकता है। यही कारण है कि इन इलाक़ों में पुलिस-प्रशासन को चुस्त-दुरुस्त रखा गया है। कल्पना कीजिए, अगर योगी न होते तो उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में जो हुआ है यूपी में उससे बड़ी-बड़ी घटनाएँ लोगों की रूह कँपा रही होतीं।
ईश्वर का धन्यवाद कीजिए, जिन्हें उत्तर प्रदेश में बदली हुई क़ानून व्यवस्था नहीं नज़र आ रही वो बगल में देखें लें बस।