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जिन स्त्रियों ने टपकती छत, आधे पेट भूख के बावजूद अपने पतियों को नहीं छोड़ा वो आज हमारी माताएँ हैं...!!!
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संबंधों में मैंने देखा है कि पुरुष ये मान लेता है कि वह ग़रीब हैं पर उसकी स्त्री को लगता है वो बस एक गलत पुरुष के साथ बंधी हुई है...!!!
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बहुत सोच-समझकर किसी को छोड़ने के बाद... तुम्हारी सबसे बड़ी जीत यह नहीं कि तुम कहाँ पहुँचे, तुम्हारी सबसे बड़ी जीत यह है कि अपने हिस्से की हर टूटन के बाद भी, तुमने, दोबारा कभी उसे मुड़कर नहीं देखा...
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बीता हुआ जीवन ठीक था मान लेता हूं पर अब जो जी रहा हूं वो सिर्फ बोझ है, पछतावा है, ग्लानि है और घिन है खुद के लिए और कुछ शेष नहीं...!!!
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आज नहीं तो कल, तुम्हें मुझसे दूर जाना ही था, अपने परिवार की खुशी के लिए, समाज की बातों के लिए, और शायद उन रिश्तों के लिए जो तुम कभी तोड़ ही नहीं सकती थीं,मैं ये सब समझता था... पर फिर भी दिल यही उम्मीद करता रहा कि शायद एक दिन तुम सबके खिलाफ जाकर सिर्फ मेरा हाथ पकड़ लोगी...!!!
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तुमसे प्रेम करने का मुझे कोई पछतावा नहीं, अपितु मैं आभारी हूं तुम्हारे उस अपनेपन का, समय का, साथ का विश्वास का, भले ही तुम अब साथ नहीं पर हृदय का बड़ा सा कोना तुम्हारी स्मृतियों को समेटे हुए है और जब भी प्रेम को मन करता है उन्हें कुरेदता हूं तो सुख मिलता है...!!!
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उसकी शादी तय हुई तो उसने मुझसे कहा कि जबरदस्ती है, मुझसे ये गम नही सहा जा रहा, मैं अब कुछ दिन फोन इस्तेमाल नही करूँगी और फिर पता चला कि वह अपनी पसंद का लहंगा लेने के लिए पूरे 3 दिन शहर में घूमती रही...
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शायद एक दिन मैं इतना थक जाऊं कि जीवन का बोझ उतार कर, सभी स्वप्नों को छोड़ कर और अपनी समस्त जिम्मेदारियों से मुंह मोड़ते हुए ईश्वर से जा मिलूंगा...!!!
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हर टूटे हुए खाली पुरुष के जीवन में एक पार्वती आनी चाहिए जो उनके भीतर के अकेलेपन को देख सके, समझ सकें उनके मौन को उसके पीछे का रुदन सुने, टूटे हृदय से लिप्त प्रेम को ओढ़ ले और हो जाए विलीन उसमें जैसे मां पार्वती हो जाती हैं शिव में...!!!
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उम्मीद से अधिक क्रूर कुछ और नहीं, हम ये उम्मीद करते हैं कि कल सुख आयेगा और आज उससे कहीं अधिक दुःख भोग रहे होते हैं...!!!
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Ones we were Us...
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मैं अब एकांतवास में हूँ सृष्टि के नियमों पर विश्वास है परन्तु अपने देह और आत्मा पर शंका है कि ये मेरी हैं भी या नहीं मेरा समर्पण किसे मिले मेरी देह को जो एक दिन भस्म हो जाएगी या मेरी आत्मा को जो मेरी देह के अस्थि बन जाने पर धारण कर लेगी नई देह को, मेरा प्रेम किसे प्राप्त होगा?
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प्रिये.. हम अलग नही हैं तुम और मैं एक ही हैं, हममें प्रेम भी है और एक दूसरे के साथ चल भी रहे हैं..हम दो किनारे हैं बस हमारे बीच आती है तुम्हारे अतीत के दुःख की नदी, जिसकी लहरें मुझमें उदासी भरती हैं.. और उन लहरों की ऊंचाई कभी इतनी हो आती है कि मैं उस बीच दिखता नहीं तुम्हें...!!!
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बीता हुआ जीवन किसी श्राप के समान व्यतीत हुआ है मेरा...!!!
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मेरा हृदय आज भी ये मानने को तैयार नहीं कि ये जीवन मुझे अकेले ही बिताना है क्योंकि मेरे साथ कोई भी खुश नहीं रह सकता, जबकि मेरा दिमाग ये बहुत पहले से जानता है कि मैं अकेले जीने के लिए ही बना हूं...!!!
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पहले मुझे लगता था मैं कभी थकूँगा नहीं बस चलता रहूंगा,करता रहूंगा पर अब थकने लगा हूं मन से, देह से,थक चुका हूं भाव से, अनुभव से,पीड़ा से, दुःख से,अपनेआप से भी.. और मेरा अकेलापन मुझे खोखला कर रहा है शायद यही थकान मुझे मृत्यु तक जल्दी पहुंचा देगी...!!!
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मन चिंताओं से घिरा हुआ है और देह जिम्मेदारियों तले दबी जा रही है, कुल मिलाकर जीवन उदासी से भरता जा रहा है और देह थकती जा रही है हर ढलती शाम के साथ...!!!
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30 हो गया हूं और अब इतना अकेले जीने के बाद सोच नहीं आती गृहस्थी की पर अकेलापन कटोचता है, पर जब आस पास देखता-सुनता हूं लोगों को विवाह बाद क्या झेलना पड़ रहा है तो मन घबरा जाता है पर प्रेम की चाह बनी रहती है करने की पाने की जीने की...!!!
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किसी व्यक्ति को खोने के जितने भी तरीकें हैं उनमें से मृत्यु सबसे दयालु तरीका है...!!!
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मैं हर रात भाग्य से हार सो जाता हूं और हर रात छत पर लटका पंखा मुझे निहारते रह जाता है...!!!
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तुम्हारे जाने के बाद से मेरी समस्त भावनाएं अनाथ हो गई हैं, तुम्हें थोड़ा और रुकना चाहिए था कि मैं बस भावों को संभालना सीख ही चुका था पर तुम्हारे जाते सब बिखर गया...!!!
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