राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की सौ वर्षों की यात्रा, चरित्र निर्माण से राष्ट्र निर्माण तक का एक अनूठा उदाहरण है। हर आपदा और संकट में सबसे पहले पहुँचने वाले स्वयंसेवक 'राष्ट्राय स्वाहा, इदं राष्ट्राय, इदं न मम' के पावन मंत्र को सजीव करते हैं - यही संघ की आत्मा है।
संघ ने सिखाया कि राष्ट्र निर्माण चरित्रवान व्यक्तियों, संगठित समाज और सुदृढ़ सांस्कृतिक आधार से ही संभव होता है। यह वैचारिक यात्रा आज भारत को विश्वबंधुत्व की नई ऊँचाइयों की ओर ले जा रही है।
आज के समाचार पत्र में प्रकाशित मेरा आलेख-