22 फरवरी, 2026
बरेली।
माह दिसम्बर-2025 में आयोजित वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के सम्मेलन - पुलिस मंथन की संस्तुतियों के क्रम में पुलिस महानिदेशक, उ०प्र० महोदय के निर्देशानुसार पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय, उत्तर प्रदेश द्वारा थाना पैरोकारों एवं कोर्ट मोहर्रिरों हेतु एक रिफ्रेशर कोर्स तैयार किया गया है। बरेली जोन के सभी नौ जनपदों के 181 थानों के पैरोकारों एवं समस्त कोर्ट मोहर्रिर के लिए इस नवीन एक दिवसीय रिफ्रेशर कोर्स का आयोजन रुहेलखण्ड विश्वविद्यालय, जनपद बरेली ऑडिटोरियम में किया गया।
कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि प्रोफेसर श्री कृष्ण पाल सिंह, वी. सी. रुहेलखंड विश्वविद्यालय द्वारा दीप प्रज्वलित कर किया गया।
प्रथम सत्र में आपराधिक न्याय प्रणाली में पैरोकारों एवं कोर्ट मोहर्रिरों की भूमिका एवं तीन नये कानूनों पर संयुक्त निदेशक (अभियोजन) श्री अच्छेलाल यादव द्वारा विस्तार पूर्वक व्याख्यान दिया गया। द्वितीय एवं तृतीय सत्र में उच्चतम न्यायालय एवं उत्तर प्रदेश उच्च न्यायालय के महत्वपूर्ण आदेशों से अवगत कराया गया। साथ ही तीन नये कानूनों के परिप्रेक्ष्य में उत्तरदायित्व, महत्वपूर्ण अभिलेखों का रख-रखाव तथा रिमाण्ड, साक्ष्य प्रस्तुतिकरण, Chain of Custody, e- सम्मन, ICJS, CCTNS, e-मालखाना, NSTEP (National Service and Tracking of Electronic Processes) जैसे तकनीकी विषयों पर संयुक्त निदेशक (प्रशिक्षण) श्री के.के. शुक्ल द्वारा विस्तृत चर्चा की गई। हर सत्र के उपरान्त प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर दिये गये एवं उनके फीडबैक/सुझाव लिये गए।
कार्यक्रम में अपर पुलिस महानिदेशक बरेली जोन, श्री रमित शर्मा, पुलिस उपमहानिरीक्षक बरेली परिक्षेत्र, श्री अजय कुमार साहनी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक जनपद बरेली, श्री अनुराग आर्य, अपर पुलिस अधीक्षक पुलिस प्रशिक्षण निदेशालय, श्री रिजुल एवं बरेली जोन के समस्त जनपदों के राजपत्रित नोडल अधिकारीगण, एवं बरेली जोन के समस्त जनपदों से लगभग 709 थाना पैरोकारों, कोर्ट मोहर्रिर, मानिटरिंग सेल प्रभारी एवं सहयोगी पुलिस कर्मी और जनपद बरेली पुलिस कार्यालयों में कार्यरत 71 पुलिस कर्मियों कुल 780 प्रतिभागी भौतिक रूप से उपस्थित रहे।
पुलिस उपमहानिरीक्षक मुरादाबाद परिक्षेत्र, श्री मुनीराज जी एवं जोन के अन्य जनपद प्रभारियों तथा अन्य अधिकारियों द्वारा वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से प्रतिभाग किया गया।
इस प्रशिक्षण का उद्देश्य आपराधिक न्याय प्रणाली में कार्यकुशलता, उत्तरदायित्व एवं तकनीकी दक्षता को सुदृढ़ करना है।