ॐ हमारे वेदों का, शास्त्रों का, पुराणों का, उपनिषदों और वेदांत का सार है।
ॐ ही ध्यान का मूल है, और योग का आधार है।
ॐ ही साधना में साध्य है।
ॐ ही शब्द ब्रह्म का स्वरूप है।
ॐ से ही हमारे मंत्र प्रारंभ एवं पूर्ण होते हैं।
आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में 1000 सेकंड्स तक ओंकार नाद के सामूहिक उच्चार का सौभाग्य मिला। उसकी ऊर्जा से अंतर्मन स्पंदित और आनंदित हो रहा है।
ॐ तत् सत्!!